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ड्राइविंग लाइसेंस में फर्जीवाड़े की आशंका, एसडीएम ने बैठाई जांच
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ड्राइविंग लाइसेंस बनाने से पहले ट्रैफिक पार्क में वाहन चालक का होता है ट्रायल।
- फोटो : Sirsa
ड्राइविंग लाइसेंस की फाइल तैयार करने वाले टाइपिस्ट व दलालों ने जिला रेडक्रॉस सोसाइटी द्वारा जारी ट्रेनिंग सर्टिफिकेट के फर्जी सर्टिफिकेट तैयार करके फाइलें तैयार कर दी। हालांकि अभी यह जांच का विषय बन गया है कि फर्जी सर्टिफिकेट पर कितने लाइसेंस बन गए। ट्रेनिंग सर्टिफिकेट पर आवेदनकर्ता का नाम, जन्म तिथि, ट्रांजेक्शन आईडी, रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित होता है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीएम सिरसा ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी अनुसार कचहरी में ड्राइविंग लाइसेंस की फाइल तैयार करने वाले कुछ टाइपिस्टों व दलालों ने जिला रेडक्रॉस सोसाइटी द्वारा जारी रोड सेफ्टी एवं फर्स्ट एड ट्रेनिंग सर्टिफिकेट से छेड़छाड़ करके फर्जी फाइलें तैयार कर लिए। इस मामले की पोल उस समय खुली, जब एक जाली सर्टिफिकेट पर क्यूआर कोड स्कैन किया गया तो वह मैच हो गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीएम जयबीर यादव ने नवंबर महीने में बने सभी ड्राइविंग लाइसेंस की फाइलें जांचने के आदेश जारी कर दिए। वहीं जिला रेडक्रास विभाग से पहले बने हुए सर्टिफिकेट की जानकारी भी ली जा रही है, ताकि फाइलों में लगे सर्टिफिकेट और रेडक्रास द्वारा जारी सर्टिफिकेट का डाटा मिलान किया जा सकें।
रेडक्रॉस सोसाइटी से 300 रुपये में बनता है रोड सेफ्टी सर्टिफिकेट
ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए आवेदनकर्ता को रेडक्रास से बेसिक रोड सेफ्टी एंड फर्स्ट एड ट्रेनिंग ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना पड़ता है। यह जरूरी है। इसके लिए एक घंटे की कक्षा लगती है। कक्षा लगाने के बाद 300 रुपये की रसीद कटवाने के बाद रेडक्रॉस कार्यालय द्वारा बेसिक रोड सेफ्टी एंड फर्स्ट एड ट्रेनिंग सर्टिफिकेट ऑनलाइन जारी किया जाता है। यह सर्टिफिकेट उम्मीदवार के पास ऑनलाइन पहुंचता है। इस पर क्यूआर कोड भी दर्ज होता है। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाले दलालों ने इस सर्टिफिकेट से छेड़छाड़ करते हुए पुराने उम्मीदवार के नाम व पता बदलकर, आवेदनकर्ताओं के नाम व पता बदलकर फर्जी सर्टिफिकेट तैयार कर दिए। आवेदनकर्ता से लिए जाने वाले 300 रुपये अपनी जेब में रख दिए। मामले की पोल उस समय खुली जब एक फाइल पर क्यूआर कोड मैच हो गया। क्यूआर कोड मैच होते ही एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों में हलचल हो गई। मामला एसडीएम जयबीर यादव तक पहुंचा तो उन्होंने तुरंत ही मामले की संदिग्धता को देखते हुए जांच बैठा दी है।
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कोट
मामले की अभी जांच की जा रही है। पिछले महीने की ड्राइविंग लाइसेंस की फाइलें चेक की जा रही है। रिकॉर्ड जांचने के बाद ही पता चलेगा कि कितने मामले ऐसे हैं।
-जयबीर यादव, एसडीएम सिरसा।
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जानकारी अनुसार कचहरी में ड्राइविंग लाइसेंस की फाइल तैयार करने वाले कुछ टाइपिस्टों व दलालों ने जिला रेडक्रॉस सोसाइटी द्वारा जारी रोड सेफ्टी एवं फर्स्ट एड ट्रेनिंग सर्टिफिकेट से छेड़छाड़ करके फर्जी फाइलें तैयार कर लिए। इस मामले की पोल उस समय खुली, जब एक जाली सर्टिफिकेट पर क्यूआर कोड स्कैन किया गया तो वह मैच हो गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीएम जयबीर यादव ने नवंबर महीने में बने सभी ड्राइविंग लाइसेंस की फाइलें जांचने के आदेश जारी कर दिए। वहीं जिला रेडक्रास विभाग से पहले बने हुए सर्टिफिकेट की जानकारी भी ली जा रही है, ताकि फाइलों में लगे सर्टिफिकेट और रेडक्रास द्वारा जारी सर्टिफिकेट का डाटा मिलान किया जा सकें।
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रेडक्रॉस सोसाइटी से 300 रुपये में बनता है रोड सेफ्टी सर्टिफिकेट
ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए आवेदनकर्ता को रेडक्रास से बेसिक रोड सेफ्टी एंड फर्स्ट एड ट्रेनिंग ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना पड़ता है। यह जरूरी है। इसके लिए एक घंटे की कक्षा लगती है। कक्षा लगाने के बाद 300 रुपये की रसीद कटवाने के बाद रेडक्रॉस कार्यालय द्वारा बेसिक रोड सेफ्टी एंड फर्स्ट एड ट्रेनिंग सर्टिफिकेट ऑनलाइन जारी किया जाता है। यह सर्टिफिकेट उम्मीदवार के पास ऑनलाइन पहुंचता है। इस पर क्यूआर कोड भी दर्ज होता है। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाले दलालों ने इस सर्टिफिकेट से छेड़छाड़ करते हुए पुराने उम्मीदवार के नाम व पता बदलकर, आवेदनकर्ताओं के नाम व पता बदलकर फर्जी सर्टिफिकेट तैयार कर दिए। आवेदनकर्ता से लिए जाने वाले 300 रुपये अपनी जेब में रख दिए। मामले की पोल उस समय खुली जब एक फाइल पर क्यूआर कोड मैच हो गया। क्यूआर कोड मैच होते ही एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों में हलचल हो गई। मामला एसडीएम जयबीर यादव तक पहुंचा तो उन्होंने तुरंत ही मामले की संदिग्धता को देखते हुए जांच बैठा दी है।
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मामले की अभी जांच की जा रही है। पिछले महीने की ड्राइविंग लाइसेंस की फाइलें चेक की जा रही है। रिकॉर्ड जांचने के बाद ही पता चलेगा कि कितने मामले ऐसे हैं।
-जयबीर यादव, एसडीएम सिरसा।