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Sirsa News: किसानों को पराली जलाने के नुकसान बताए, फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किया जागरूक
Fri, 16 Oct 2026 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Fri, 16 Oct 2026 11:51 PM IST
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फोटो - रानियां02 जागरूकता रैली निकालते विद्यार्थी एवं कृषि विभाग के अधिकारी।
रानियां। फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से शुक्रवार को अभियान चलाया गया।
विभागीय टीम ने किसानों को पराली जलाने के दुष्प्रभावों की जानकारी देकर फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए प्रेरित किया। वहीं, राजकीय उच्च विद्यालय, रानियां के विद्यार्थियों ने जागरूकता रैली निकालकर पराली न जलाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस दौरान विद्यार्थियों को कॉपियां भी वितरित की गईं।
कृषि विभाग के सहायक तकनीकी प्रबंधक डॉ. दीपक कुमार और उनकी टीम ने किसानों को बताया कि फसल अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और खेतों की मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है। पराली जलाने से भूमि में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता और कृषि भूमि की उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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डॉ. दीपक कुमार ने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को आग लगाने के बजाय उनके उचित प्रबंधन के विकल्प अपनाएं। इससे वायु प्रदूषण कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों का सही प्रबंधन किसानों और पर्यावरण, दोनों के लिए लाभकारी है। इस अवसर पर कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विद्यालय का स्टाफ और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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विभागीय टीम ने किसानों को पराली जलाने के दुष्प्रभावों की जानकारी देकर फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए प्रेरित किया। वहीं, राजकीय उच्च विद्यालय, रानियां के विद्यार्थियों ने जागरूकता रैली निकालकर पराली न जलाने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस दौरान विद्यार्थियों को कॉपियां भी वितरित की गईं।
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कृषि विभाग के सहायक तकनीकी प्रबंधक डॉ. दीपक कुमार और उनकी टीम ने किसानों को बताया कि फसल अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और खेतों की मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है। पराली जलाने से भूमि में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता और कृषि भूमि की उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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डॉ. दीपक कुमार ने किसानों से अपील की कि वे फसल अवशेषों को आग लगाने के बजाय उनके उचित प्रबंधन के विकल्प अपनाएं। इससे वायु प्रदूषण कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों का सही प्रबंधन किसानों और पर्यावरण, दोनों के लिए लाभकारी है। इस अवसर पर कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विद्यालय का स्टाफ और विद्यार्थी मौजूद रहे।