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बिजाई से पहले मिट्टी की जांच करवाएं किसान, संतुलित खाद का इस्तेमाल करें : डाॅ. बीडी यादव
Fri, 24 May 2024 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Fri, 24 May 2024 12:39 AM IST
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ओढां। गांव रोहिड़ावाली में वीरवार को ग्वार फसल पर प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को सही समय पर बिजाई, बीजोपचार, संतुलित खाद का प्रयोग व अनावश्यक खरपतवारनाशक दवाई के इस्तेमाल न करने पर जानकारी दी।
यह शिविर कृषि विभाग ओढां के एटीएम डॉ. पवन कुमार के तत्वावधान में ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव के साथ मिलकर ट्रेनिंग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. पवन ने कहा कि किसी भी फसल की बिजाई से पहले अपने खेत की मिट्टी व पानी की जांच अवश्य करवाएं। खाद का उपयोग मिट्टी की जांच के आधार पर करें। इसके साथ-साथ उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने व इसको बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस गांव में लगभग 30-35 प्रतिशत रकबे पर ग्वार की खेती होती है।ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव किसानों से रूबरू हुए। किसानों के अनुसार जड़गलन रोग ग्वार फसल में 40 से 60 प्रतिशत तक आ जाता है। इसलिए इस तरह का प्रशिक्षण जरूरी है। इस अवसर पर शिविर में 76 मौजूद किसानों को बीज उपचार के लिए दो एकड़ की वेबिस्टिन दवाई, एक मास्क तथा एक जोड़ी दस्ताने मुफ्त दिए गए। कार्यक्रम मेें गांव के सरपंच महेंद्र सिंह का में विशेष योगदान रहा। इसके मौके पर विनोद कुमार, अमर सिंह, मंगत सिंह, भरत सिंह, जसविंद्र सिंह, चरनपाल, जगसीर सिंह आदि किसान मौजूद थे।
ऐसे करें बीज का उपचार
ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने जड़गलन की रोकथाम व इसके इलाज के बारे में किसानों को बताया। उन्होंने कहा कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए 3 ग्राम कार्बन्डाजिम, 50 प्रतिशत (बेविस्टीन) प्रति किलो बीज की दर से सूखा उपचारित करने के बाद ही बिजाई करनी चाहिए। ऐसा करने से 80 से 95 प्रतिशत इस रोग पर काबू पाया जा सकता है। जड़गलन का इलाज मात्र 15 रुपये बीज उपचार से संभव है। ऐसा करने से करीबन 1.0-1.5 क्विंटल प्रति एकड़ ग्वार की पैदावार बढ़ जाती है।
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ग्वार विशेषज्ञ ने किसानों को उन्नतशील किस्में एचजी 365, एचजी 563 व एचजी 2-20 की बिजाई करने की सलाह दी। ये किस्में 85 से 110 दिन में पककर तैयार हो जाती।
संतुलित खाद का प्रयोग
ग्वार विशेषज्ञ ने किसानों को अच्छी पैदावार लेने के लिए 100 किलो सिंगल सुपर फास्फेट तथा 15 किलो यूरिया या 35 किलो डीएपी प्रति एकड़ के हिसाब से बिजाई के समय डालने के लिए सलाह दी। डॉ. बीडी यादव ने बताया कि ग्वार की अच्छी पैदावार लेने के लिए अपने खेत में गोबर की खाद अवश्य डालें। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी।
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यह शिविर कृषि विभाग ओढां के एटीएम डॉ. पवन कुमार के तत्वावधान में ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव के साथ मिलकर ट्रेनिंग का आयोजन किया गया। इस अवसर पर डॉ. पवन ने कहा कि किसी भी फसल की बिजाई से पहले अपने खेत की मिट्टी व पानी की जांच अवश्य करवाएं। खाद का उपयोग मिट्टी की जांच के आधार पर करें। इसके साथ-साथ उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने व इसको बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस गांव में लगभग 30-35 प्रतिशत रकबे पर ग्वार की खेती होती है।ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव किसानों से रूबरू हुए। किसानों के अनुसार जड़गलन रोग ग्वार फसल में 40 से 60 प्रतिशत तक आ जाता है। इसलिए इस तरह का प्रशिक्षण जरूरी है। इस अवसर पर शिविर में 76 मौजूद किसानों को बीज उपचार के लिए दो एकड़ की वेबिस्टिन दवाई, एक मास्क तथा एक जोड़ी दस्ताने मुफ्त दिए गए। कार्यक्रम मेें गांव के सरपंच महेंद्र सिंह का में विशेष योगदान रहा। इसके मौके पर विनोद कुमार, अमर सिंह, मंगत सिंह, भरत सिंह, जसविंद्र सिंह, चरनपाल, जगसीर सिंह आदि किसान मौजूद थे।
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ऐसे करें बीज का उपचार
ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने जड़गलन की रोकथाम व इसके इलाज के बारे में किसानों को बताया। उन्होंने कहा कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए 3 ग्राम कार्बन्डाजिम, 50 प्रतिशत (बेविस्टीन) प्रति किलो बीज की दर से सूखा उपचारित करने के बाद ही बिजाई करनी चाहिए। ऐसा करने से 80 से 95 प्रतिशत इस रोग पर काबू पाया जा सकता है। जड़गलन का इलाज मात्र 15 रुपये बीज उपचार से संभव है। ऐसा करने से करीबन 1.0-1.5 क्विंटल प्रति एकड़ ग्वार की पैदावार बढ़ जाती है।
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ग्वार विशेषज्ञ ने किसानों को उन्नतशील किस्में एचजी 365, एचजी 563 व एचजी 2-20 की बिजाई करने की सलाह दी। ये किस्में 85 से 110 दिन में पककर तैयार हो जाती।
संतुलित खाद का प्रयोग
ग्वार विशेषज्ञ ने किसानों को अच्छी पैदावार लेने के लिए 100 किलो सिंगल सुपर फास्फेट तथा 15 किलो यूरिया या 35 किलो डीएपी प्रति एकड़ के हिसाब से बिजाई के समय डालने के लिए सलाह दी। डॉ. बीडी यादव ने बताया कि ग्वार की अच्छी पैदावार लेने के लिए अपने खेत में गोबर की खाद अवश्य डालें। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी।