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Sirsa News: पैंतालीसा क्षेत्र के किसान बोले, नहीं मिल रहा फसलों का उचित मूल्य

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 24 Dec 2023 10:47 PM IST
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Farmers of Pantalisa area said, they are not getting fair price for their crops.
चौपटा । राजस्थान की सीमा से सटे पैंतालीसा क्षेत्र के किसानों से बातचीत की तो उन्होंने कहा संसाधनों के अभाव में खेती मुख्य रूप से बारिश पर ही निर्भर रहती है। लेकिन कम गुणवत्ता वाले बीज, खाद, डीएपी व नहरी पानी के अभाव में किसानों की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसान फसल पकाने के लिए महीनों कड़ी मेहनत करता है और हजारों रुपए खर्च करता है। लेकिन फसलों का उचित मूल्य न मिलने के कारण किसानों के अरमानों पर पानी फिर जाता है। किसानों का साफ तौर पर कहना है की 2022 में कृषि आय दोगुनी का वादा किया लेकिन 2023 में भी आय दोगुनी नही हुई है, बल्कि खेती से आय लगातार कम होती जा रही है। लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही कृषि से किसानों का मोहभंग होता जा रहा है।
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वर्तमान में किसानों की हालत बहुत खराब है। किसानों को फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। कहने को तो फसलों के मूल्य के लिए एमएसपी लागू है। लेकिन गेहूं की फसल के अलावा किसी भी फसल पर एमएसपी मूल्य नहीं मिल रहा है। किसान फसल पकाने के लिए महीनों कड़ी मेहनत करता है और हजारों रुपए खर्च करता है। लेकिन फसलों का उचित मूल्य न मिलने के कारण किसानों के अरमानों पर पानी फिर जाता है। सरकार से मांग है कि किसानों को फसलों का उचित मूल्य प्रदान करें।
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- राजेश कासनियां, किसान माखोसरानी ।


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आज के दिन किसान के हालात ठीक नहीं है। चौपटा क्षेत्र कॉटन बेल्ट का क्षेत्र है। इसमें सबसे बड़ी जरूरत बीटी कॉटन के बीजों में सुधार की है, क्योंकि कॉटन का किसान पिछले चार-पांच वर्ष से घाटे में जा रहा है। बीजों की निम्न गुणवत्ता के कारण किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। इसके अलावा किसान और किसानी को बचाने के लिए सरकार को डॉ. स्वामीनाथन रिपोर्ट का फार्मूला हर हाल में लागू करनी चाहिए ।

-वीरेंद्र कासनियां, किसान नाथूसरी कलां ।


-----------------------------------संसाधनों के अभाव में खेती मुख्य रूप से बारिश पर ही निर्भर रहती है। लेकिन कम गुणवत्ता वाले बीज, खाद, डीएपी व नहरी पानी के अभाव में किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। फसलों के दाम भी कम मिलते हैं। सरकार अगर किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, खाद व डीएपी समय पर उपलब्ध करवाएं तो किसानों की स्थिति में सुधार हो सकता है। साथ ही फसलों के उचित दाम भी किसानों को मिलने चाहिए। भारत एक कृषि प्रधान देश है लेकिन आलम यह है कि इस देश में किसान ही दुखी है ।

-भरत सिंह छिम्पा, किसान लुदेसर।


-------------------------------डीएपी और यूरिया की कमी के कारण किसान परेशान है। किसानों को समय पर कोई भी चीज उपलब्ध नहीं हो रही है। ना तो समय पर खाद व डीएपी मिलती है और ना ही फसल खराब होने पर फसलों का मुआवजा समय पर मिलता है । किसानों को खाद व डीएपी लेने के लिए घंटों लाइनों में खड़ा रहना पड़ता है। उसके बावजूद भी कई बार खाद व डीएपी नहीं मिलती। ऐसे में किसानों की स्थिति अच्छी नहीं है ।
-संदीप कासनियां, किसान नाथूसरी कलां।
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