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Sirsa News: गुलाबी सुंडी की नरमे पर मार, किसान दो साल से कर रहे मुआवजे का इंतजार

Sat, 14 Sep 2024 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Sat, 14 Sep 2024 12:18 AM IST
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Farmers have been waiting for compensation for two years due to pink caterpillar attack
सिरसा। गुलाबी सुंडी से नरमा की फसल खराब होने के बाद बीमा राशि न देने का मुद्दा क्षेत्र के किसानों का बड़ा मुद्दा है। बीमा राशि न मिलने के कारण किसान कई बार प्रदर्शन भी कर चुके हैं, लेकिन शासन-प्रशासन किसानों की बात सुनने को तैयार ही नहीं होता। यहां गौर लायक बात यह है कि हर बार किसानों को फसलों के खराब होने पर उनको मुआवजे के वादे तो अनेक किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर ऐसा नहीं है। यही नहीं बीमा प्रीमियम का क्लेम भी दो-दो साल तक लटकाया जाता रहा है।
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दो साल पहले जिले के 97 गांवों में गुलाबी सुंडी का प्रकोप हुआ था। इससे पहले भी गुलाबी सुंडी के कारण किसानों की फसल खराब होती रही हैं। सरकार ने जिन किसानों की फसल बीमित नहीं थी, उसकी स्पेशल गिरदावरी करवाने के आदेश दिए थे। गिरदावरी भी हो गई और आज तक किसानों को पूरा मुआवजा नहीं मिल पाया है।
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विपक्षी पार्टी के लोग भी किसानों के बीच जाकर उनको मुआवजा देने के लिए सरकार को कोस चुके हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हो पाया। पिछले साल विभाग ने खराब कटिंग के माध्यम से सिर्फ 97 गांवों में नुकसान बताया। इसमें से सात गांवों का खराबा 32 से लेकर 674 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दर्शाया गया है। घुक्कांवाली, राजपुरा, नहराना तीन गांवों का बीमा क्लेम अभी लटका हुआ है।
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----हर बार राजनेता किसानों को खराब फसल का मुआवजा देने की बात कहते हैं, लेकिन जब फसल खराब होती है, तो किसानों का साथ देने के लिए कोई सामने नहीं आता। किसानों के नाम पर जमकर राजनीति होती है, लेकिन धरातल पर कोई किसानों का दर्द देखने नहीं आया। अब भी सभी अनेक वादे करेंगे, लेकिन इस बार किसान जागरूक है।
लखविंद्र सिंह औलख, किसान

---पहले किसान मुआवजे के लिए तरस रहे थे, जब से फसल बीमा शुरू हुआ तो अब क्लेम के लिए तरसाया जा रहा है। हद तो तब हो गई, जब बीमा कंपनियों ने साल 2023 में बीमित फसलों का बीमा प्रीमियम उनको वापिस लौटाना आरंभ कर दिया है। यह सब सत्ताधारियों की चाल के कारण हुआ है। बीमा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

-सरदूल सिंह भट्टी, मोरीवाला

---चुनाव के दौरान नेता किसानों के बीच आते हैं और फसली मुआवजे, खाद बीज की कमी न होने सहित अनेक दावे करते हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद वह भूल जाते हैं। खरीफ सीजन 2020 का भी लगभग 65 करोड़ रुपये मुआवजा सरकार की ओर से जारी कर दिया गया है, जोकि ट्रेजरी में पड़ा है। यह अभी तक किसानों के खातों में नहीं डाला गया है।
सुभाष झोरड़, गांव बचेर।
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