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Sirsa News: धान खरीद में गड़बड़ी, नमी के नाम पर कटौती और पुराने कांटे से तुलाई पर भड़के किसान, तीन घंटे मार्केट कमेटी कार्यालय का किया घेराव

Wed, 14 Oct 2026 10:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Wed, 14 Oct 2026 10:42 PM IST
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Farmers got angry over issues in paddy procurement, deductions in the name of moisture, and weighing with old scales, and they surrounded the market committee office for three hours.
सिरसा मार्केट कमेटी कार्यालय परिसर में धरने पर बैठे किसान। 
सिरसा। धान की खरीद में कथित धांधली, नमी के नाम पर कटौती और तुलाई में गड़बड़ी के विरोध में किसान संगठनों ने बुधवार को सिरसा मार्केट कमेटी कार्यालय का तीन घंटे तक घेराव किया। संयुक्त किसान मोर्चा हरियाणा और किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा हरियाणा के आह्वान पर प्रदेश की मंडियों में यह प्रदर्शन किया गया। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि मंडियों में किसानों की परेशानी दूर करने के बजाय उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है।
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घेराव में बीकेयू टिकैत एआई के एस 1936, हरियाणा किसान मंच, एआई के एस, बीकेयू एकता उग्राहां, पगड़ी संभाल जट्टा और राष्ट्रीय किसान मंच के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। किसान नेताओं ने सरकार से मंडियों में खरीद व्यवस्था सुधारने और किसानों की लूट रोकने की मांग की।
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डाॅ. सुखदेव सिंह जम्मू ने कहा कि धान की खरीद में रेट, नमी और तुलाई को लेकर धांधली हो रही है। सरकारी खरीद एजेंसियां समय पर मंडियों में नहीं पहुंच रहीं। इसके चलते निजी खरीदार सरकारी खरीद दर 2461 रुपये प्रति क्विंटल से भी कम कीमत पर धान खरीद रहे हैं।
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उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह मशीनों के जरिये नमी के मानकों में गड़बड़ी कर किसानों को कम भाव दिया जा रहा है। डिजिटल डाटा एंट्री और प्रति एकड़ उपज की सीमा जैसे नियमों के नाम पर भी किसानों को परेशान किया जा रहा है। मंडी सचिवों की मौजूदगी के बावजूद व्यापारी और कमीशन एजेंट किसानों का शोषण कर रहे हैं। मार्केट कमेटियों का अमला मूकदर्शक बना हुआ है।
किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने मंडियों में पोर्टल व्यवस्था लागू की है, ताकि बाहर से आने वाले अनाज पर रोक लगाई जा सके। लेकिन उनके अनुसार यह व्यवस्था अपने उद्देश्य में सफल नहीं हुई। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मौसम में नमी होने के कारण 17 प्रतिशत नमी की सीमा बढ़ाकर 20 प्रतिशत की जानी चाहिए। साथ ही सरकारी खरीद एजेंसियां समय पर खरीद शुरू करें, ताकि निजी खरीदार कम दाम पर फसल न खरीद सकें।

एक साल बाद भी नहीं पहुंचे डिजिटल कांटे
किसान नेताओं ने तुलाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्ष 2025 में कंप्यूटर कांटों से तुलाई के आदेश जारी किए थे। इसके बावजूद मंडियों में अब तक पूरी तरह डिजिटल कांटे नहीं लगाए गए हैं। किसानों की फसल की तुलाई अभी भी पुराने कांटों से की जा रही है। उन्होंने मांग की कि प्रदेश की सभी मंडियों में सरकारी कांटे उपलब्ध करवाए जाएं और उन्हें सही हालत में चलाया जाए। किसान नेताओं ने कहा कि तुलाई में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि किसानों को उनकी फसल का सही वजन और उचित मूल्य मिल सके।
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