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Sirsa News: भूमिगत जलस्तर नीचे जाने के कारण किसान पलायन करने को मजबूर
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सिरसा। धिंगतानियां खरीफ चैनल 1-2 भंभूर-सलारपुर खरीफ चैनलों के निर्माण कार्य शुरू करने को लेकर किसान संघर्ष समिति का धरना लघु सचिवालय में जारी है। धरनारत किसान संघर्ष समिति के प्रधान हीरा सिंह, मीडिया प्रभारी बलकार सिंह ने बताया कि 15 गांवों के लोग साल 2009 से घग्घर नदी के पानी के लिए मांग करते आ रहे हैं। पर इसे पूरा नहीं किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि जिले के 15 गांवों मंगाला, मोडिया खेड़ा, चौबुर्जा, धिंगतानियां, रंगड़ी खेड़ा, शहीदांवाली, सलारपुर, टीटू खेड़ा, नानकपुर, भम्बूर, ढाणी जस्सा राम राम नगरिया, नटार, चकराईया, खाजा खेड़ा, शाहपुर बेगू आदि में जमीन के पानी का स्तर लगभग 500 फुट तक नीचे जा चुका है। इससे नीचे का पानी खेती व पीने योग्य नहीं है। इस कारण से भूमि की उपज पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि फसल न होने के कारण मजबूरी में लोग यहां से पलायन कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इन चैनलों की मुख्यमंत्री ने 2014 में घोषणा की थी और 2019 में चैनलों के निर्माण को लेकर बजट भी मंजूर हो गया, लेकिन अधिकारियों की कारगुजारी के कारण आज तक काम शुरू नहीं हो पाया। जिस कारण किसानों को धरना लगाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक किसी प्रशासनिक अधिकारी ने किसानों से बातचीत करना भी मुनासिब नहीं समझा है। उन्होंने सरकार से गुहार लगाई कि जल्द से जल्द इन खरीफ चैनलों काम शुरू किया जाए, ताकि ग्रामीण इन गांवों से पलायन करने की बजाय बेहतर तरीके से अपना गुजर बसर कर सकें।
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ग्रामीणों ने कहा कि जिले के 15 गांवों मंगाला, मोडिया खेड़ा, चौबुर्जा, धिंगतानियां, रंगड़ी खेड़ा, शहीदांवाली, सलारपुर, टीटू खेड़ा, नानकपुर, भम्बूर, ढाणी जस्सा राम राम नगरिया, नटार, चकराईया, खाजा खेड़ा, शाहपुर बेगू आदि में जमीन के पानी का स्तर लगभग 500 फुट तक नीचे जा चुका है। इससे नीचे का पानी खेती व पीने योग्य नहीं है। इस कारण से भूमि की उपज पर भी असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि फसल न होने के कारण मजबूरी में लोग यहां से पलायन कर रहे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि इन चैनलों की मुख्यमंत्री ने 2014 में घोषणा की थी और 2019 में चैनलों के निर्माण को लेकर बजट भी मंजूर हो गया, लेकिन अधिकारियों की कारगुजारी के कारण आज तक काम शुरू नहीं हो पाया। जिस कारण किसानों को धरना लगाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक किसी प्रशासनिक अधिकारी ने किसानों से बातचीत करना भी मुनासिब नहीं समझा है। उन्होंने सरकार से गुहार लगाई कि जल्द से जल्द इन खरीफ चैनलों काम शुरू किया जाए, ताकि ग्रामीण इन गांवों से पलायन करने की बजाय बेहतर तरीके से अपना गुजर बसर कर सकें।
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