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जमाबंदी के लिए किसान काट रहे कार्यालयों के चक्कर, नहीं उठा पा रहे विभागीय योजनाओं का लाभ

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 21 Nov 2022 11:21 PM IST
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Farmers are cutting rounds of offices for jamabandi, are unable to take advantage of departmental schemes
ओढां का पटवार भवन। - फोटो : Sirsa
ओढां। राजस्व विभाग में किसानों को भूमि संबंधी कार्यों के लिए पिछले 6 माह से सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। विभाग के कर्मचारियों के पास न ही तो कोई संतोषजनक जवाब है और न ही किसानों के कार्य हो रहे हैं। स्थिति ये है कि किसान न केवल अपनी ही भूमि के मालिकाना हक से वंचित हैं बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं का भी लाभ नहीं मिल पा रहा।
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बता दें कि राजस्व विभाग में हर 5 वर्ष बाद जमाबंदियों को अपडेट किया जाता है। 15 जून के बाद से उपमंडल के 66 गांवों की 29 जमाबंदी अपडेट होनी हैं। इन गांवों में राजस्व विभाग ने अभी तक महज 7 जमाबंदियों को ऑनलाइन किया है। बाकी बची 22 जमाबंदियों के कार्य के लिए आश्वासन दिए जा रहे हैं।
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योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा
जमाबंदी नहीं होने से गांव नुहियांवाली के किसान सतपाल बडजाती ने बताया कि कॉटन योजना के तहत उसके खेत में डिग्गी बनाने का ड्रॉ निकला था, लेकिन जमाबंदी के अभाव में उसका कार्य बाधित होकर रह गया है। जमाबंदी प्राप्त करने के लिए वह पिछले 6 माह से ओढां व कालांवाली के चक्कर काट रहा है। नायब तहसीलदार व पटवारी हर बार 15-20 दिन का आश्वासन देकर उसे टरका देते हैं। किसान सतपाल ने बताया कि उधर कृषि विभाग के अधिकारी उसे डिग्गी बनाने के लिए कह रहे हैं। अगर निर्धारित समय में डिग्गी नहीं बनी तो उसका ड्रॉ रद्द कर दिया जाएगा।
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स्टाफ का टोटा कर रहा किसानों को परेशान
कालांवाली उपमंडल के अधीन 60 सर्कल में 66 गांव पड़ते हैं। नियमानुसार विभाग को 60 पटवारियों की आवश्यकता है। लेकिन विभाग के पास 66 गांव संभालने के लिए महज 11 पटवारी ही हैं। इनमें से 9 पटवारी स्थायी व 2 अस्थायी हैं। एक पटवारी को 5 से 6 गांव का चार्ज दिया गया है। ऊपर से इन पटवारियों पर विभाग अतिरिक्त काम भी जिम्मे लगा रहा है। कभी पराली जलाने से रोकने के लिए इनसे काम लिया जाता है तो कभी अन्य कार्यों में इन्हें भेज दिया जाता है। ऐसे में किसानों के भूमि संबंधी कार्य प्रभावित होना स्वाभाविक है। तहसील कार्यालय में पिछले लंबे समय से तहसीलदार व नायब तहसीलदार दोनों की भी स्थायी ड्यूटी नहीं है। ऐसे में किसान विभागों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
विभाग के पास कर्मचारियों की कमी है। ऐसे में कार्य का बोझ होना स्वाभाविक है। फिर भी लोगों के कार्य कर रहे हैं। कर्मचारियों की नियुक्ति करना तो सरकार का काम है। 7 जमाबंदी अपडेट हो चुकी है। बाकी का कार्य प्रगति पर चल रहा है। बाकी उच्चाधिकारी ही ज्यादा जानकारी दे सकते हैं।

- रोहताश, कार्यालय कानूनगो (कालांवाली)
इस समस्या के लिए लगातार आवाज उठाते आ रहे हैं। किसानों को जमाबंदी के अभाव में काफी परेशानी आ रही हैं। इस समस्या को लेकर एसडीएम व उपायुक्त से भी मिल चुके हैं। एक तरफ तो सरकार किसान हितैषी होने का दम भर रही है और दूसरी तरफ राजस्व विभाग में कर्मचारी ही नहीं है। सरकार किसानों को जानबूझकर परेशान कर रही है। इस विषय में यूनियन के पदाधिकारियों से विचार विमर्श कर कोई रणनीति बनाई जाएगी।
- गुरदास सिंह लक्कड़ांवाली, प्रधान (भारतीय किसान एकता कालांवाली)
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