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खरीफ फसलों का मुआवजा मिलने में देरी होन पर किसानों ने दिया धरना
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ओढां में मुआवजे में देरी को लेकर बैंक के बाहर प्रदर्शन करते किसान।
- फोटो : Sirsa
ओढां के किसानों ने खरीफ की फसल का मुआवजा न मिलने पर एसबीआई बैंक के सामने सांकेतिक धरना प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की। किसानों का कहना था कि अगर उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आगामी कड़ा फैसला लेने को मजबूर होंगे। दूसरी ओर शाखा प्रबंधक का कहना था कि उन्होंने समय रहते किसानों के दस्तावेज भिजवा दिए थे। धरने उपरांत किसानों ने ओढां के तीन बैंक प्रबंधकों को मांग पत्र भी सौंपा।
सोमवार को ओढां के किसानों ने खरीफ की फसल के मुआवजे में देरी को लेकर एसबीआई बैंक के सामने धरना प्रदर्शन करते हुए बैंक व सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों की मांग थी कि उनकी खरीफ की फसल का अभी तक क्लेम नहीं आया है। जिसके चलते उन्हें बैंक के सामने धरना प्रदर्शन करना पड़ा। किसान कौर सिंह कुंडर, गुरचेत सिंह, मंजीत सिंह महराजका व हरबंस सिंह ने कहा कि बैंकों ने उनके खाते से वर्ष 2020 में खरीफ की फसल के बीमा की प्रीमियम राशि काटकर कंपनी को भेज दी थी। जिसके बाद बरसात के कारण जलभराव के चलते किसानों की नरमे की फसल में करीब 60 प्रतिशत तक का नुकसान हो गया था। लेकिन अभी तक उन्हें हुए नुकसान का क्लेम नहीं मिला। किसानों ने कहा कि बैंक ने उनके खाते से पैसे काटकर बीमा कंपनी को दे दिए थे। इसलिए उनका क्लेम बैंक ही उन्हें दिलवाए। किसानों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें फसलों का बीमा करवाने के बावजूद भी कंपनी उनका क्लेम नहीं दे रही। जिसके चलते उन्होंने बैंक के समक्ष सांकेतिक धरना दिया है। अगर उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 26 जनवरी के बाद अगली रणनीति बनाई जाएगी। किसानों के रोष को देखते हुए बैंक कर्मचारियों ने लेनदेन की प्रक्रिया बंद करते हुए बैंक को अंदर से ताला लगा लिया। जिसके बाद ओढां पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की।
किसानों ने कहा कि उन्होंने न ही तो बैंक की कोई लेनदेन की प्रक्रिया प्रभावित की और न ही किसी को कोई चेतावनी दी। किसानों ने कहा कि उनका संघर्ष अव्यवस्थाओं के खिलाफ है। इसमें वे बेवजह उपभोक्ताओं को परेशान नहीं करना चाहते। वहीं बैंक प्रबंधन का कहना था कि उन्होंने तो सरकार के निर्देशों का पालन किया है। इसमें क्लेम आने या न आने की उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। किसानों ने सुबह 11 बजे से लेकर 3 बजे तक धरना जारी रखा। जिसके बाद उन्होंने एसबीआई, सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक व एचडीएफसी सहित 3 बैंकों को मांग पत्र सौंपा।
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हमने सरकार के निर्देशों की पालना करते हुए किसानों के खाते से कंपनी को फसल बीमा के लिए प्रीमियम राशि भेज दी थी। क्लेम मिलना या न मिलना उनकी जिम्मेदारी नहीं है। अगर कंपनी की तरफ से कोई राशि जारी की जाती है तो वे किसानों को दे देंगे। एसबीआई ने 388 किसानों के खाते से 68 लाख 46 हजार 990 रुपये का प्रीमियम कंपनी को भेजा था। किसानों का मांग पत्र उच्चाधिकारियों को भेज दिया जाएगा
-राजकुमार, बैंक प्रबंधक एसबीआई ओढां।
बैंक का कार्य होता है सरकार के निर्देशों की पालना करना। प्रीमियम को लेकर कोई जबरदस्ती नहीं की गई। जब कंपनी क्लेम डालेगी तो हम किसानों को वितरित कर देंगे। हमारी शाखा में करीब 900 किसानों के खातों से करीब 55 लाख 95 हजार रुपये कॉटन का प्रीमियम कंपनी को भेजा गया था।
-रमेश गुबंर, शाखा प्रबंधक सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक, ओढां।
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सोमवार को ओढां के किसानों ने खरीफ की फसल के मुआवजे में देरी को लेकर एसबीआई बैंक के सामने धरना प्रदर्शन करते हुए बैंक व सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों की मांग थी कि उनकी खरीफ की फसल का अभी तक क्लेम नहीं आया है। जिसके चलते उन्हें बैंक के सामने धरना प्रदर्शन करना पड़ा। किसान कौर सिंह कुंडर, गुरचेत सिंह, मंजीत सिंह महराजका व हरबंस सिंह ने कहा कि बैंकों ने उनके खाते से वर्ष 2020 में खरीफ की फसल के बीमा की प्रीमियम राशि काटकर कंपनी को भेज दी थी। जिसके बाद बरसात के कारण जलभराव के चलते किसानों की नरमे की फसल में करीब 60 प्रतिशत तक का नुकसान हो गया था। लेकिन अभी तक उन्हें हुए नुकसान का क्लेम नहीं मिला। किसानों ने कहा कि बैंक ने उनके खाते से पैसे काटकर बीमा कंपनी को दे दिए थे। इसलिए उनका क्लेम बैंक ही उन्हें दिलवाए। किसानों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें फसलों का बीमा करवाने के बावजूद भी कंपनी उनका क्लेम नहीं दे रही। जिसके चलते उन्होंने बैंक के समक्ष सांकेतिक धरना दिया है। अगर उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो 26 जनवरी के बाद अगली रणनीति बनाई जाएगी। किसानों के रोष को देखते हुए बैंक कर्मचारियों ने लेनदेन की प्रक्रिया बंद करते हुए बैंक को अंदर से ताला लगा लिया। जिसके बाद ओढां पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की।
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किसानों ने कहा कि उन्होंने न ही तो बैंक की कोई लेनदेन की प्रक्रिया प्रभावित की और न ही किसी को कोई चेतावनी दी। किसानों ने कहा कि उनका संघर्ष अव्यवस्थाओं के खिलाफ है। इसमें वे बेवजह उपभोक्ताओं को परेशान नहीं करना चाहते। वहीं बैंक प्रबंधन का कहना था कि उन्होंने तो सरकार के निर्देशों का पालन किया है। इसमें क्लेम आने या न आने की उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। किसानों ने सुबह 11 बजे से लेकर 3 बजे तक धरना जारी रखा। जिसके बाद उन्होंने एसबीआई, सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक व एचडीएफसी सहित 3 बैंकों को मांग पत्र सौंपा।
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हमने सरकार के निर्देशों की पालना करते हुए किसानों के खाते से कंपनी को फसल बीमा के लिए प्रीमियम राशि भेज दी थी। क्लेम मिलना या न मिलना उनकी जिम्मेदारी नहीं है। अगर कंपनी की तरफ से कोई राशि जारी की जाती है तो वे किसानों को दे देंगे। एसबीआई ने 388 किसानों के खाते से 68 लाख 46 हजार 990 रुपये का प्रीमियम कंपनी को भेजा था। किसानों का मांग पत्र उच्चाधिकारियों को भेज दिया जाएगा
-राजकुमार, बैंक प्रबंधक एसबीआई ओढां।
बैंक का कार्य होता है सरकार के निर्देशों की पालना करना। प्रीमियम को लेकर कोई जबरदस्ती नहीं की गई। जब कंपनी क्लेम डालेगी तो हम किसानों को वितरित कर देंगे। हमारी शाखा में करीब 900 किसानों के खातों से करीब 55 लाख 95 हजार रुपये कॉटन का प्रीमियम कंपनी को भेजा गया था।
-रमेश गुबंर, शाखा प्रबंधक सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक, ओढां।