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पांच एकड़ जमीन में संचरी किस्म के तरबूज लगा किसान बना आत्मनिर्भर

Sun, 02 May 2021 10:04 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 02 May 2021 10:04 PM IST
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Farmer planted self-sufficient watermelon in five acres of land became self-reliant
नरेश बैनीवाल
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चोपटा। गांव जोड़कियां के किसान राकेश पुत्र ओमप्रकाश ढाका ने अपने किन्नू के बाग की खाली जगह का सदुपयोग कर तरबूज की खेती शुरू की है। किसान एक तरफ किन्नू का बाग तैयार कर रहा और दूसरी ओर गोबर की खाद से तरबूज उगा रहा है। तरबूज की कीमत अब बाजार में अच्छी होने से किसान की आर्थिक स्थिति पहले से सुधर रही है।
घर की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए किसान राकेश ने 5 एकड़ भूमि में 2 साल पहले किन्नू का बाग लगाया था। इस दौरान उसने बताया कि किन्नू के पौधों की लाइनों के बीच में खाली जमीन पड़ी थी। उसने इस खाली जमीन पर संचरी किस्म के तरबूज उगाए। तरबूज की फसल में गोबर की खाद का प्रयोग किया है। कीटनाशकों की जगह चावल की मांड का छिड़काव किया। जैविक विधि से तैयार किया गया तरबूज काफी गुणकारी और मीठा होता है। इससे से उत्पादन भी अच्छा होता है।
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किसान राकेश ने बताया कि 5 एकड़ में करीब 1200 क्विंटल तरबूज का उत्पादन होने की उम्मीद है, जिससे उसे 10 लाख रुपये की आमदनी का अनुमान है। अभी एक सप्ताह पहले ही तरबूज की बिक्री शुरू हुई है, जिसमें करीब एक लाख रुपये के तरबूज बेच चुका है। अगर अच्छा भाव मिल जाता है तो आमदनी बढ़ेगी।
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सोशल मीडिया से जानकारी लेकर उगाया तरबूज
गांव जोड़कियां के राकेश ढाका ने बताया कि परंपरागत कृषि के साथ-साथ अतिरिक्त कमाई का जरिया खोजना शुरू किया। उन्होंने बताया कि परंपरागत खेती में खर्चा ज्यादा व बचत कम होने पर घाटा ही लगता। इस बार लॉकडाउन के कारण और ज्यादा घाटा न हो इसके लिए उसने खेत में तरबूज लगाने का फैसला लिया। सोशल मीडिया पर जानकारी लेकर अपने खेत में किन्नू का बाग के बीच खाली पड़ी जमीन में तरबूज की फसल उगाई। क्षेत्र के आसपास के बरासरी, कुत्तियाना, रामपुरा ढिल्लों, जमाल, गुसाईयाना सहित कई गांवों के लोग हर रोज खेत से ही तरबूज खरीद कर ले जाते हैं।

नाथूसरी चोपटा में विकसित होनी चाहिए फल-सब्जी मंडी
राकेश ने बताया कि उसके लगाए तरबूज आसपास के गांवों के लोग व सब्जी विक्रेता लेकर जाते हैं। सिरसा मंडी में फलों व सब्जियों को ले जाकर बेचने में यातायात खर्च ज्यादा आता है और बचत कम होती है। उसका कहना है कि अगर सब्जियों व फलों की मंडी नाथूसरी चोपटा में विकसित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी। संवाद
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