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Sirsa News: गोगामेड़ी में मेला शुरू, 40 लाख श्रद्धालु पहुंचने की उम्मीद
Wed, 30 Aug 2023 11:46 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 30 Aug 2023 11:46 PM IST
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गोगामेडी मेला का ध्वजारोहण कर शुभारंभ करते मुख्य अतिथि। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
चोपटा। हरियाणा की सीमा से सटे राजस्थान के धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पवित्र स्थल गोगामेड़ी में मेले का बुधवार को विधिवत पूजा अर्चना तथा झंडारोहण के साथ शुभारंभ हुआ। प्रबंधन समिति के अनुसार इस वर्ष 40 लाख श्रद्धालुओं के मेले में पहुंचने की उम्मीद है। पिछले वर्ष कोरोना तथा लंपी डिजिज के कारण पशु मेला आयोजित नहीं किया गया था। इस बार पशु मेले का विशेष रूप से आयोजन किया गया है।
देवस्थान विभाग और पशुपालन विभाग ने संयुक्त रूप से गोगामेड़ी मेले का उद्घाटन किया। नोहर एसडीएम सत्यनारायण सुथार ने कहा कि मेले में अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई है। हमारा उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़े। मेले क्षेत्र को चार सेक्टर में विभाजित किया गया है तथा प्रत्येक सेक्टर के लिए एक प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रभारी अधिकारियों की सहायता के लिए कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है। इस मौके पर भादरा विधायक बलवान पूनिया, नोहर एडीएम चंचल वर्मा, नोहर पंचायत समिति प्रधान सोहन ढील, मंगेज चौधरी, नोहर एसडीएम सत्यनारायण सुथार, भादरा एसडीएम शकुंतला चौधरी, नोहर एडिशनल एसपी सुरेश जांगिड़ व अन्य मौजूद रहे।
बॉक्स
गोगामेड़ी मेले एक नजर
जाहरवीर गोगा का जन्म भादो मास में नवमी को माना जाता है। इसे गोगा नवमी कहते हैं। इसलिए पूरे भादो मास गोगामेड़ी में मेला लगता है। इसमें हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल सहित देश के दूर-दूर के राज्यों श्रद्धालु आते हैं। इस बार यह मेला 30 अगस्त से शुरू होगा और 29 सितंबर तक चलेगा। सबसे बड़ा मेला 7 और 8 सितंबर गोगा नवमी को लगेगा। गोगा जी के भक्त गुरु शिष्य परंपरा का निर्वाह करते हुए पहले गुरु गोरखनाथ के धूणें पर जाकर नमन करते हैं। फिर गोरक्षा गंगा में स्नान करने के बाद 3 किलोमीटर तक पैदल चलकर कनक दंडवत गोगामेड़ी में जाहरवीर की समाधि पर धोक लगाते हैं। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु नारियल, खील, पतासे, नारियल, नीली ध्वजा, सोने व चांदी के छत्र इत्यादि चढ़ावा चढ़ाते हैं।
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पिछले वर्ष मेले में 26 लाख श्रद्धालु आए थे। इस वर्ष 40 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। गोगामेड़ी से ददरेवा के लिए अब सीधी सड़क है। आसपास के गांवों को भी गोगामेड़ी के साथ सड़कों से जोड़ा गया है। मेले में स्वच्छता और पेयजल सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। - बलवार पूनिया, विधायक, भादरा
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चोपटा। हरियाणा की सीमा से सटे राजस्थान के धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पवित्र स्थल गोगामेड़ी में मेले का बुधवार को विधिवत पूजा अर्चना तथा झंडारोहण के साथ शुभारंभ हुआ। प्रबंधन समिति के अनुसार इस वर्ष 40 लाख श्रद्धालुओं के मेले में पहुंचने की उम्मीद है। पिछले वर्ष कोरोना तथा लंपी डिजिज के कारण पशु मेला आयोजित नहीं किया गया था। इस बार पशु मेले का विशेष रूप से आयोजन किया गया है।
देवस्थान विभाग और पशुपालन विभाग ने संयुक्त रूप से गोगामेड़ी मेले का उद्घाटन किया। नोहर एसडीएम सत्यनारायण सुथार ने कहा कि मेले में अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई है। हमारा उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना न करना पड़े। मेले क्षेत्र को चार सेक्टर में विभाजित किया गया है तथा प्रत्येक सेक्टर के लिए एक प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रभारी अधिकारियों की सहायता के लिए कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है। इस मौके पर भादरा विधायक बलवान पूनिया, नोहर एडीएम चंचल वर्मा, नोहर पंचायत समिति प्रधान सोहन ढील, मंगेज चौधरी, नोहर एसडीएम सत्यनारायण सुथार, भादरा एसडीएम शकुंतला चौधरी, नोहर एडिशनल एसपी सुरेश जांगिड़ व अन्य मौजूद रहे।
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गोगामेड़ी मेले एक नजर
जाहरवीर गोगा का जन्म भादो मास में नवमी को माना जाता है। इसे गोगा नवमी कहते हैं। इसलिए पूरे भादो मास गोगामेड़ी में मेला लगता है। इसमें हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल सहित देश के दूर-दूर के राज्यों श्रद्धालु आते हैं। इस बार यह मेला 30 अगस्त से शुरू होगा और 29 सितंबर तक चलेगा। सबसे बड़ा मेला 7 और 8 सितंबर गोगा नवमी को लगेगा। गोगा जी के भक्त गुरु शिष्य परंपरा का निर्वाह करते हुए पहले गुरु गोरखनाथ के धूणें पर जाकर नमन करते हैं। फिर गोरक्षा गंगा में स्नान करने के बाद 3 किलोमीटर तक पैदल चलकर कनक दंडवत गोगामेड़ी में जाहरवीर की समाधि पर धोक लगाते हैं। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु नारियल, खील, पतासे, नारियल, नीली ध्वजा, सोने व चांदी के छत्र इत्यादि चढ़ावा चढ़ाते हैं।
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पिछले वर्ष मेले में 26 लाख श्रद्धालु आए थे। इस वर्ष 40 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। गोगामेड़ी से ददरेवा के लिए अब सीधी सड़क है। आसपास के गांवों को भी गोगामेड़ी के साथ सड़कों से जोड़ा गया है। मेले में स्वच्छता और पेयजल सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया है। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। - बलवार पूनिया, विधायक, भादरा