{"_id":"6882669027b2e5080f027cc2","slug":"evening-procession-taken-out-from-ancient-shri-shyam-temple-sirsa-news-c-128-1-sir1002-141340-2025-07-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirsa News: प्राचीन श्री श्याम मंदिर से निकाली संध्या फेरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirsa News: प्राचीन श्री श्याम मंदिर से निकाली संध्या फेरी
विज्ञापन
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से संध्या फेरी निकालते हुए
सिरसा। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से 5 से 11 सितंबर को होने वाली श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के प्रचार के लिए संध्या फेरियाें के अंतर्गत वीरवार को पांचवीं संध्या फेरी निकाली गई। यह संध्या फेरी प्राचीन श्री श्याम मंदिर से प्रारंभ हुई। साध्वी संतोष भारती ने बताया कि एक ओर समाज में महिलाओं के साथ बढ़ती हिंसा एवं अपराध है, दूसरी ओर बढ़ता मार्केटिंग बाजार एवं उपभोक्तावाद है।
साध्वी संतोष भारती ने कहा कि ऐसे परिवेश में विज्ञापन चित्रों, चलचित्रों इत्यादि के माध्यम से महिलाओं का वस्तु या पदार्थ रूप में मूल्यांकन अर्थात वास्तुकार पूरे जोरों पर है। यह प्रक्रम प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों ही रूपों में महिलाओं को बार-बार यह अहसास दिलाता है कि तुम मात्र एक भोगने की वस्तु हो। ऐसा समाज जो नारी को उसका अधिकृत स्थान एवं सम्मान प्रदान नहीं करता।
साध्वी संतोष भारती ने कहा कि इसलिए जब-जब पुरुष प्रधान समाज ने नारी को शौर्य बल विहीन अबला और मात्र कामिनी के रूप में देखकर उसके समर्थ का न्यूनतम आकलन किया। तब-तब समाज में जागृति का आगाज हुआ। जागृत महिलाएं परिवर्तन प्रतिनिधि बनकर सामने आई। सामाजिक भ्रांतियों की अदृश्य ग्लास सीलिंग को आत्म बल के आधार पर पहले स्वयं उन्होंने पार किया और फिर अग्रणी होकर अन्य महिलाओं को भी इसे पार करवाया। पूजन के दौरान मंदिर कमेटी तारा शर्मा, सुनील कुमार शर्मा, तेजपाल शर्मा, रमन सराफ, राजकुमार सिंघल, मनीष सोनी, हेमंत साहुवाला, दीपक, ललित मोंगा, भारती शर्मा विशेष रूप से शामिल हुए।
विज्ञापन
विज्ञापन
साध्वी संतोष भारती ने कहा कि ऐसे परिवेश में विज्ञापन चित्रों, चलचित्रों इत्यादि के माध्यम से महिलाओं का वस्तु या पदार्थ रूप में मूल्यांकन अर्थात वास्तुकार पूरे जोरों पर है। यह प्रक्रम प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दोनों ही रूपों में महिलाओं को बार-बार यह अहसास दिलाता है कि तुम मात्र एक भोगने की वस्तु हो। ऐसा समाज जो नारी को उसका अधिकृत स्थान एवं सम्मान प्रदान नहीं करता।
विज्ञापन
साध्वी संतोष भारती ने कहा कि इसलिए जब-जब पुरुष प्रधान समाज ने नारी को शौर्य बल विहीन अबला और मात्र कामिनी के रूप में देखकर उसके समर्थ का न्यूनतम आकलन किया। तब-तब समाज में जागृति का आगाज हुआ। जागृत महिलाएं परिवर्तन प्रतिनिधि बनकर सामने आई। सामाजिक भ्रांतियों की अदृश्य ग्लास सीलिंग को आत्म बल के आधार पर पहले स्वयं उन्होंने पार किया और फिर अग्रणी होकर अन्य महिलाओं को भी इसे पार करवाया। पूजन के दौरान मंदिर कमेटी तारा शर्मा, सुनील कुमार शर्मा, तेजपाल शर्मा, रमन सराफ, राजकुमार सिंघल, मनीष सोनी, हेमंत साहुवाला, दीपक, ललित मोंगा, भारती शर्मा विशेष रूप से शामिल हुए।
विज्ञापन