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Sirsa News: 29 साल पहले अपनों को खाेने की पीड़ा आज भी नहीं भुला पाए परिजन
Mon, 23 Dec 2024 11:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 23 Dec 2024 11:35 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। डबवाली में 29 वर्ष पहले स्कूल कार्यक्रम के दौरान हुए अग्निकांड में 442 लोगों की जान गई थी। करीब 150 लोग इस हादसे में घायल हुए थे। इनमें हर उम्र के लोग शामिल थे। उस दौरान आग ने चंद मिनटों में सैकड़ाें लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था। इस हादसे में 100 फीसदी तक झुलसने के बावजूद कुछ लोग भगवान की कृपा से बच तो गए लेकिन वह लोग इस पीड़ा को झेलने के लिए अब भी मजबूर हैं।
कुछ लोगों ने अपने इस दुखद समय को बहुत ही हौसले और संघर्ष के साथ जीया। इनमें से समर्थ लोग ऐसे हादसों से बचाव के लिए युवाओं और बच्चों को प्रेरित कर रहे हैं जबकि कई लोग संसाधनों के अभाव में जीवनयापन करने के लिए मजबूर हैं। अब तो उन्होंने सरकार या किसी अन्य संस्था से मदद की उम्मीद तक छोड़ दी है।
कोट्स, फोटो-- 38
अग्निकांड पीड़ित उमेश मित्तल ने बताया कि वह मंजर बहुत ही भयानक था। आज भी उस मंजर को याद कर रूह कांपने लगती है। उस दौरान वह 13 साल के थे। इस हादसे में वह 80 फीसदी तक झुलस गए थे। उनके दाेनों हाथों की अंगुलियां और आर्म भी जले थे। उस समय सरकारी मदद से इलाज तो मिला लेकिन सीमित समय तक। इलाज का पूरा खर्च लेने के लिए सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगानी पड़ी थी। उसके बाद इलाज तो मिला लेकिन रोजगार के लिए कोई सरकारी सहायता नहीं मिली। इस कारण जीवनयापन के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। अपने बल पर कुछ महीनों पहले ही उन्हें नौकरी मिल सकी लेकिन कई लोग सुविधाओं के अभाव में जीने के लिए मजबूर हैं।
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कोट्स, फोटो -40
पीड़ित रमेश सचदेवा ने बताया कि हादसे के बाद काफी संघर्ष किया है। उस हादसे में उनके बाजू जल गए थे, जो ठीक नहीं हो सके। चिकित्सक कहते हैं कि घर में रहो। आराम करो लेकिन घर चलाने के लिए उन्हें दूसरे जिलों में भी जाना पड़ता है। कई बार तकलीफ बढ़ जाती है। उन्होंने सरकार से हादसे के पीड़िताें की याद में जागरूकता के लिए राज्यस्तर पर कार्यक्रम करवाने और कोई कॉलेज या विश्वविद्यालय बनाने की मांग की है।
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कोट्स , फोटो -39
अग्नि पीड़ित विनोद बंसल ने बताया कि इस हादसेे में 60 फीसदी शरीर झुलसा था लेकिन संघर्ष और परिवार के सहयोग से खुद को संभाला। पीड़ितों की याद में जागरूकता कार्यक्रम हो रहा है। यहां स्मारक बनाया गया है। अब सरकार को हादसे के पीड़ितों को रोजगार के तौर पर नौकरी का प्रावधान करना चाहिए।
-- -फोटो ने देने के विश्वास पर-- --
गीता और गगन भी इस हादसे में घायल हुई थी। हादसे में गीता 100 फीसदी तक झुलस गई थी। इसके बाद काफी संघर्ष भी किया लेकिन काफी समय बाद गीता तनाव में रहने लगी हैं। गगन भी 100 फीसदी झुलसी थी लेकिन संयोग अच्छे होने पर किसी व्यक्ति ने उनसे शादी कर ली। अब वह राजस्थान में विवाहित होकर खुश हैं लेकिन सरकार की ओर से 100 फीसदी झुलसने के बाद भी उनको रोजगार के लिए कोई सहायता नहीं मिल सकी है।
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सिरसा। डबवाली में 29 वर्ष पहले स्कूल कार्यक्रम के दौरान हुए अग्निकांड में 442 लोगों की जान गई थी। करीब 150 लोग इस हादसे में घायल हुए थे। इनमें हर उम्र के लोग शामिल थे। उस दौरान आग ने चंद मिनटों में सैकड़ाें लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था। इस हादसे में 100 फीसदी तक झुलसने के बावजूद कुछ लोग भगवान की कृपा से बच तो गए लेकिन वह लोग इस पीड़ा को झेलने के लिए अब भी मजबूर हैं।
कुछ लोगों ने अपने इस दुखद समय को बहुत ही हौसले और संघर्ष के साथ जीया। इनमें से समर्थ लोग ऐसे हादसों से बचाव के लिए युवाओं और बच्चों को प्रेरित कर रहे हैं जबकि कई लोग संसाधनों के अभाव में जीवनयापन करने के लिए मजबूर हैं। अब तो उन्होंने सरकार या किसी अन्य संस्था से मदद की उम्मीद तक छोड़ दी है।
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कोट्स, फोटो
अग्निकांड पीड़ित उमेश मित्तल ने बताया कि वह मंजर बहुत ही भयानक था। आज भी उस मंजर को याद कर रूह कांपने लगती है। उस दौरान वह 13 साल के थे। इस हादसे में वह 80 फीसदी तक झुलस गए थे। उनके दाेनों हाथों की अंगुलियां और आर्म भी जले थे। उस समय सरकारी मदद से इलाज तो मिला लेकिन सीमित समय तक। इलाज का पूरा खर्च लेने के लिए सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगानी पड़ी थी। उसके बाद इलाज तो मिला लेकिन रोजगार के लिए कोई सरकारी सहायता नहीं मिली। इस कारण जीवनयापन के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। अपने बल पर कुछ महीनों पहले ही उन्हें नौकरी मिल सकी लेकिन कई लोग सुविधाओं के अभाव में जीने के लिए मजबूर हैं।
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कोट्स, फोटो -40
पीड़ित रमेश सचदेवा ने बताया कि हादसे के बाद काफी संघर्ष किया है। उस हादसे में उनके बाजू जल गए थे, जो ठीक नहीं हो सके। चिकित्सक कहते हैं कि घर में रहो। आराम करो लेकिन घर चलाने के लिए उन्हें दूसरे जिलों में भी जाना पड़ता है। कई बार तकलीफ बढ़ जाती है। उन्होंने सरकार से हादसे के पीड़िताें की याद में जागरूकता के लिए राज्यस्तर पर कार्यक्रम करवाने और कोई कॉलेज या विश्वविद्यालय बनाने की मांग की है।
कोट्स , फोटो -39
अग्नि पीड़ित विनोद बंसल ने बताया कि इस हादसेे में 60 फीसदी शरीर झुलसा था लेकिन संघर्ष और परिवार के सहयोग से खुद को संभाला। पीड़ितों की याद में जागरूकता कार्यक्रम हो रहा है। यहां स्मारक बनाया गया है। अब सरकार को हादसे के पीड़ितों को रोजगार के तौर पर नौकरी का प्रावधान करना चाहिए।
गीता और गगन भी इस हादसे में घायल हुई थी। हादसे में गीता 100 फीसदी तक झुलस गई थी। इसके बाद काफी संघर्ष भी किया लेकिन काफी समय बाद गीता तनाव में रहने लगी हैं। गगन भी 100 फीसदी झुलसी थी लेकिन संयोग अच्छे होने पर किसी व्यक्ति ने उनसे शादी कर ली। अब वह राजस्थान में विवाहित होकर खुश हैं लेकिन सरकार की ओर से 100 फीसदी झुलसने के बाद भी उनको रोजगार के लिए कोई सहायता नहीं मिल सकी है।