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ऐलनाबाद उपचुनाव: 1968 में विवाद होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया ता चुनाव का परिणाम
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सिरसा। ऐलनाबाद उपचुनाव की घोषणा के बाद नेता अपने रंग में आ चुके हैं। इस बार तिकोना मुकाबला बना हुुुआ है। भाजपा-जजपा, इनेलो और कांग्रेस के प्रत्याशियों ने जीत के लिए पूरा जोर लगा दिया है। ऐसे में चुनाव दिलचस्प होता जा रहा है। लेकिन इससे इतर ऐलनाबाद का सियासी सफर रोचक और विवादित भी रहा है।
कृषि कानूनों को लेकर अभय सिंह चौटाला के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है। इस बार मैदान में इनेेेलो से एक बार फिर अभय सिंह चौटाला, भाजपा-जजपा से साझे उम्मीदवार गोबिंद कांडा और कांग्रेस पार्टी से पवन बैनीवाल चुनाव मैदान में उतरे हैं। ऐलनाबाद विधानसभा का इस बार तीसरा उपचुनाव होगा। इससे पहले दो उपचुनाव 1970 और 2010 में हो चुके हैं। ऐलनाबाद का एक चुनाव विवादित रहा है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा। 1970 के उपचुनाव के पीछे रोचक कहानी है। ये चुनाव सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद हुआ था। 14 मई 1968 को हुए चुनाव में विशाल हरियाणा पार्टी के उम्मीदवार लालचंद खोड़ ने कांग्रेस के उम्मीदवार ओमप्रकाश चौटाला को हराया था। चौटाला ने खोड़ की जीत को लेकर पहले हाईकोर्ट की शरण ली और बाद में सुप्रीम कोर्ट भी गए। सुप्रीम कोर्ट ने चौटाला की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद खोड़ का चुनाव शून्य यानी रद्द कर दिया था। चौटाला ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। व्यक्तिगत चरित्र पर हमला बोलने, एक धार्मिक संप्रदाय की ओर से चौटाला को हराने की अपील करने और विजेता प्रत्याशी खोड़ पर पृथ्वीराज को 20 हजार रुपये नकद देकर चुनाव लड़वाने के आरोप लगाए। इतना ही नहीं चुनाव के दौरान एक विवादित इश्तिहार भी प्रकाशित हुआ था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और साक्ष्यों के आधार पर चुनाव रद्द कर दिया। इस कारण 1970 में दोबारा चुनाव करवाना पड़ा। दूसरी बार हुए चुनाव में ओमप्रकाश चौटाला कांग्रेस की बजाय एनसीजे के उम्मीदवार थे और लालचंद खोड चुनाव नहीं लड़ सके। इस चुनाव में चौटाला करीब 18 हजार 746 वोटों से विजेता रहे।
बड़े भाई से पहले विधायक बने प्रताप चौटाला
ओमप्रकाश चौटाला से छोटे प्रताप चौटाला पहले विधायक बने जबकि ओमप्रकाश चौटाला बाद में। ऐलनाबाद ऐसी सीट है जहां से चौधरी देवीलाल के दो बेटे विधानसभा पहुंचे। 1967 के चुनाव में 28 साल के प्रताप चौटाला विधायक चुने गए। जबकि उनके बड़े भाई ओमप्रकाश चौटाला 1970 के उपचुनाव में पहली बार विधायक बनने में कामयाब हुए।
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कृषि कानूनों को लेकर अभय सिंह चौटाला के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है। इस बार मैदान में इनेेेलो से एक बार फिर अभय सिंह चौटाला, भाजपा-जजपा से साझे उम्मीदवार गोबिंद कांडा और कांग्रेस पार्टी से पवन बैनीवाल चुनाव मैदान में उतरे हैं। ऐलनाबाद विधानसभा का इस बार तीसरा उपचुनाव होगा। इससे पहले दो उपचुनाव 1970 और 2010 में हो चुके हैं। ऐलनाबाद का एक चुनाव विवादित रहा है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा। 1970 के उपचुनाव के पीछे रोचक कहानी है। ये चुनाव सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद हुआ था। 14 मई 1968 को हुए चुनाव में विशाल हरियाणा पार्टी के उम्मीदवार लालचंद खोड़ ने कांग्रेस के उम्मीदवार ओमप्रकाश चौटाला को हराया था। चौटाला ने खोड़ की जीत को लेकर पहले हाईकोर्ट की शरण ली और बाद में सुप्रीम कोर्ट भी गए। सुप्रीम कोर्ट ने चौटाला की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद खोड़ का चुनाव शून्य यानी रद्द कर दिया था। चौटाला ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। व्यक्तिगत चरित्र पर हमला बोलने, एक धार्मिक संप्रदाय की ओर से चौटाला को हराने की अपील करने और विजेता प्रत्याशी खोड़ पर पृथ्वीराज को 20 हजार रुपये नकद देकर चुनाव लड़वाने के आरोप लगाए। इतना ही नहीं चुनाव के दौरान एक विवादित इश्तिहार भी प्रकाशित हुआ था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और साक्ष्यों के आधार पर चुनाव रद्द कर दिया। इस कारण 1970 में दोबारा चुनाव करवाना पड़ा। दूसरी बार हुए चुनाव में ओमप्रकाश चौटाला कांग्रेस की बजाय एनसीजे के उम्मीदवार थे और लालचंद खोड चुनाव नहीं लड़ सके। इस चुनाव में चौटाला करीब 18 हजार 746 वोटों से विजेता रहे।
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बड़े भाई से पहले विधायक बने प्रताप चौटाला
ओमप्रकाश चौटाला से छोटे प्रताप चौटाला पहले विधायक बने जबकि ओमप्रकाश चौटाला बाद में। ऐलनाबाद ऐसी सीट है जहां से चौधरी देवीलाल के दो बेटे विधानसभा पहुंचे। 1967 के चुनाव में 28 साल के प्रताप चौटाला विधायक चुने गए। जबकि उनके बड़े भाई ओमप्रकाश चौटाला 1970 के उपचुनाव में पहली बार विधायक बनने में कामयाब हुए।
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