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Sirsa News: खारे पानी की जमीन में झींगा पालन ने बदली किसान की तकदीर
Mon, 24 Aug 2026 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 24 Aug 2026 11:38 PM IST
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सिरसा। किसान गुरदीप सिंह व अन्य । विभाग
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14 लाख से शुरू किया, 65 लाख रुपये तक पहुंचा वार्षिक कारोबार
फोटो-- 17,18
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। खारा पानी, सीमित सिंचाई और फसलों का उम्मीद से कम उत्पादन रघुआना गांव के किसान गुरदीप सिंह के लिए लंबे समय से चुनौती बना हुआ था। उन्होंने इन परिस्थितियों को बाधा मानने के बजाय नया रास्ता तलाशा और खेती के साथ झींगा पालन शुरू किया।
आज गुरदीप सिंह की पहचान खारे पानी वाली जमीन में वैज्ञानिक तरीके से व्हाइट श्रिंप (झींगा) पालन करने वाले प्रगतिशील किसान के रूप में बन रही है। 14 लाख रुपये के निवेश से शुरू हुआ उनका यह सफर वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 65 लाख रुपये के वार्षिक कारोबार तक पहुंच गया।
गुरदीप सिंह ने बताया कि खारे पानी और सिंचाई की समस्या के कारण पारंपरिक खेती से अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा था। उन्होंने कृषि संबंधी सेमिनारों, विशेषज्ञों और ऑनलाइन माध्यमों से झींगा पालन के बारे में जानकारी जुटाई। इसके बाद मत्स्य विभाग से संपर्क कर तकनीकी प्रशिक्षण लिया।
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वर्ष 2019 में उन्होंने झींगा पालन की शुरुआत की। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत करीब 14 लाख रुपये की लागत से एक हेक्टेयर क्षेत्र में दो तालाब तैयार किए और करीब 3.93 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। बाद में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत दो और तालाब तैयार किए गए।
गुरदीप सिंह ने बताया कि उच्च मांग और उत्पादकता को देखते हुए उन्होंने सफेद झींगा का चयन किया। उन्हें मत्स्य विभाग और एक्वाकल्चर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, हिसार से प्रशिक्षण मिला। फार्म पर वैज्ञानिक तरीके से झींगा पालन किया जाता है।
उन्होंने बताया कि प्रति वर्ग मीटर करीब 25 से 32 झींगा की संख्या रखी जाती है। 120 से 130 दिन में उत्पादन लिया जाता है। पानी की लवणता, गुणवत्ता और संभावित रोगों की नियमित निगरानी की जाती है। शुरुआती वर्ष में 12 टन झींगा का उत्पादन हुआ। 24 लाख रुपये का लाभ मिला।
गुरदीप ने बताया कि इसके बाद कारोबार का विस्तार किया गया और उत्पादन 21 टन तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 65 लाख रुपये का कारोबार और लगभग 22 लाख रुपये का शुद्ध लाभ रहा।
10 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार
गुरदीप सिंह के अनुसार, झींगा पालन से उन्हें आर्थिक लाभ के साथ अन्य लोगों को भी रोजगार मिला है। फार्म से 10 लोगों को प्रत्यक्ष और करीब 15 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में बीमारी और बाजार भाव में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां आईं। जैव सुरक्षा, पानी के बेहतर प्रबंधन, प्रोबायोटिक्स और अलग-अलग बिक्री माध्यमों के जरिये इन चुनौतियों से निपटा गया।
खारी जमीन वाले किसानों के लिए बेहतर विकल्प
जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने बताया कि सिरसा जैसे क्षेत्र में जहां खारे पानी के कारण पारंपरिक खेती प्रभावित होती है वहां वैज्ञानिक तरीके से झींगा पालन किसानों के लिए आय का बेहतर वैकल्पिक साधन बन सकता है। उन्होंने किसानों से झींगा पालन शुरू करने से पहले पानी और जमीन की जांच करवाने तथा मत्स्य विभाग के विशेषज्ञों से तकनीकी सलाह लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से पात्र किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध करवाई जाती है।
अब कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण इकाई लगाने की तैयारी
गुरदीप सिंह अब अपने व्यवसाय को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। उनकी योजना झींगा पालन का क्षेत्र बढ़ाने के साथ आधुनिक तकनीक अपनाने, सिरसा में कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने तथा झींगा बीज, आहार और दवाओं के वितरण की दिशा में काम करने की है। इसके साथ ही वह सीधे निर्यात की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं। उनका लक्ष्य अधिक से अधिक किसानों को झींगा पालन से जोड़कर जिले में इस क्षेत्र का मजबूत नेटवर्क तैयार करना है।
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फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। खारा पानी, सीमित सिंचाई और फसलों का उम्मीद से कम उत्पादन रघुआना गांव के किसान गुरदीप सिंह के लिए लंबे समय से चुनौती बना हुआ था। उन्होंने इन परिस्थितियों को बाधा मानने के बजाय नया रास्ता तलाशा और खेती के साथ झींगा पालन शुरू किया।
आज गुरदीप सिंह की पहचान खारे पानी वाली जमीन में वैज्ञानिक तरीके से व्हाइट श्रिंप (झींगा) पालन करने वाले प्रगतिशील किसान के रूप में बन रही है। 14 लाख रुपये के निवेश से शुरू हुआ उनका यह सफर वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 65 लाख रुपये के वार्षिक कारोबार तक पहुंच गया।
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गुरदीप सिंह ने बताया कि खारे पानी और सिंचाई की समस्या के कारण पारंपरिक खेती से अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा था। उन्होंने कृषि संबंधी सेमिनारों, विशेषज्ञों और ऑनलाइन माध्यमों से झींगा पालन के बारे में जानकारी जुटाई। इसके बाद मत्स्य विभाग से संपर्क कर तकनीकी प्रशिक्षण लिया।
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वर्ष 2019 में उन्होंने झींगा पालन की शुरुआत की। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत करीब 14 लाख रुपये की लागत से एक हेक्टेयर क्षेत्र में दो तालाब तैयार किए और करीब 3.93 लाख रुपये की सब्सिडी मिली। बाद में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत दो और तालाब तैयार किए गए।
गुरदीप सिंह ने बताया कि उच्च मांग और उत्पादकता को देखते हुए उन्होंने सफेद झींगा का चयन किया। उन्हें मत्स्य विभाग और एक्वाकल्चर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, हिसार से प्रशिक्षण मिला। फार्म पर वैज्ञानिक तरीके से झींगा पालन किया जाता है।
उन्होंने बताया कि प्रति वर्ग मीटर करीब 25 से 32 झींगा की संख्या रखी जाती है। 120 से 130 दिन में उत्पादन लिया जाता है। पानी की लवणता, गुणवत्ता और संभावित रोगों की नियमित निगरानी की जाती है। शुरुआती वर्ष में 12 टन झींगा का उत्पादन हुआ। 24 लाख रुपये का लाभ मिला।
गुरदीप ने बताया कि इसके बाद कारोबार का विस्तार किया गया और उत्पादन 21 टन तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2023-24 में करीब 65 लाख रुपये का कारोबार और लगभग 22 लाख रुपये का शुद्ध लाभ रहा।
10 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार
गुरदीप सिंह के अनुसार, झींगा पालन से उन्हें आर्थिक लाभ के साथ अन्य लोगों को भी रोजगार मिला है। फार्म से 10 लोगों को प्रत्यक्ष और करीब 15 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में बीमारी और बाजार भाव में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां आईं। जैव सुरक्षा, पानी के बेहतर प्रबंधन, प्रोबायोटिक्स और अलग-अलग बिक्री माध्यमों के जरिये इन चुनौतियों से निपटा गया।
खारी जमीन वाले किसानों के लिए बेहतर विकल्प
जिला मत्स्य अधिकारी जगदीश चंद्र ने बताया कि सिरसा जैसे क्षेत्र में जहां खारे पानी के कारण पारंपरिक खेती प्रभावित होती है वहां वैज्ञानिक तरीके से झींगा पालन किसानों के लिए आय का बेहतर वैकल्पिक साधन बन सकता है। उन्होंने किसानों से झींगा पालन शुरू करने से पहले पानी और जमीन की जांच करवाने तथा मत्स्य विभाग के विशेषज्ञों से तकनीकी सलाह लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से पात्र किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता उपलब्ध करवाई जाती है।
अब कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण इकाई लगाने की तैयारी
गुरदीप सिंह अब अपने व्यवसाय को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। उनकी योजना झींगा पालन का क्षेत्र बढ़ाने के साथ आधुनिक तकनीक अपनाने, सिरसा में कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने तथा झींगा बीज, आहार और दवाओं के वितरण की दिशा में काम करने की है। इसके साथ ही वह सीधे निर्यात की संभावनाएं भी तलाश रहे हैं। उनका लक्ष्य अधिक से अधिक किसानों को झींगा पालन से जोड़कर जिले में इस क्षेत्र का मजबूत नेटवर्क तैयार करना है।