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घायलों के लिए ‘भगवान’ से कम नहीं डॉ. सीताराम
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
Updated Tue, 07 Oct 2014 12:01 AM IST
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गांव देसूजोधा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक सीताराम धरती के भगवान कहे जाने वाले पेशे के भाव को चरितार्थ करने में लगे हैं।
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इलाके में वे अपने जेब खर्च से सेवा करने के लिए विशेष रूप से चर्चित हैं। मरीज की स्थिति और आर्थिक कमजोरी को वे कभी आड़े नहीं आने देते।
चाहें इसके लिए उन्हें अपनी जेब के पैसे ही क्यों न खर्च करने पड़ जाएं। वे अपनी तरफ से पूरा प्रयास करते हैं कि उनके पास आया हुआ मरीज निराश होकर न लौटे।
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आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए वे किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं, क्योंकि कई बार उन्होंने अपने पैसे से दुर्घटना ग्रस्त मरीजों को दवाइयां खरीद कर दी हैं। इतना ही नहीं अनेक मरीजों को उन्होंने उनके घर तक भी पहुंचाया है।
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रात वे इमरजेंसी ड्यूटी पर सिविल अस्पताल डबवाली में तैनात थे। इसी दौरान दुर्घटना में घायल एक व्यक्ति अस्पताल आया। डॉ. सीता राम ने उसका उपचार किया।
लेकिन घायल को होश नहीं आया। सिर पर चोट की आशंका से उसे एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर पर सीटी स्कैन के लिए ले गए। सिटी स्कैन का खर्च अपनी जेब से दिया।
बाद में मरीज की जेब से मिले कागजात के आधार पर उसके परिजनों से संपर्क साधना चाहा। लेकिन पता गलत निकला।
दिन में करीब दो बजे मरीज को होश आया तो उसने अपनी पहचान बबलू अरोड़ा पुत्र लछमन दास अरोड़ा निवासी बठिंडा के रूप में करवाई।
खुद को पेशे से हलवाई बताया। पता मिलने पर चिकित्सक ने उसे उसके घर तक पहुंचाकर, उसके परिजनों से मिलवाया।
खुद हो चुके दुर्घटना का शिकार
तीस वर्षीय चिकित्सक सीता राम 2010 में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे। उस दौरान अबोहर में रह रही उनकी बुआ के बेटे नरेश की एक दुर्घटना में मौत हो गई।
उस दौरान दुर्घटना के बाद परिजनों की दशा चिकित्सक के दिल में घर कर गई। एमबीबीएस करने के बाद चिकित्सक दुर्घटना के मामले को बेहद गंभीरता से लेते हैं।
मरीज में नरेश नजर आता है
नरेश की मौत से परिवार को गहरा सदमा पहुंचा था। दुर्घटना में घायल व्यक्ति में मुझे नरेश नजर आता है। उसको नरेश समझकर ही उपचार करता हूं।
- सीता राम, चिकित्सक पीएचसी, देसूजोधा