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Sirsa News: डॉ. संजीव ने 90 घंटे में की 1200 किलोमीटर साइकिलिंग
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सिरसा।चिकित्सक संजीव गोयल को सम्मानित करते हुए अन्य चिकित्सक। स्वयं
सिरसा। डॉ. संजीव गोयल ने महज 90 घंटों के अंदर 1200 किलोमीटर की साइकिल यात्रा पूरी करके रिकॉर्ड कायम किया है। इस उपलब्धि के बाद डॉ. संजीव गोयल ने संजीवनी अस्पताल में मीडिया से रूबरू हुए और अपने अविश्वसनीय अनुभव साझा किए। उन्होंने इस यात्रा को अपनी जिंदगी का सबसे चुनौतीपूर्ण, लेकिन संतोषजनक अनुभव बताया।
डॉ. गोयल ने बताया कि उनका यह महा-चक्र अभियान पटियाला (पंजाब) से शुरू हुआ था। इस रूट में उन्होंने उत्तर भारत के तीन प्रमुख राज्यों हरियाणा, पंजाब, और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों को कवर किया। 1200 किलोमीटर का यह सफर, जिसमें दिन और रात लगातार पैडलिंग शामिल थी। अंततः फिर से पटियाला में ही समाप्त हुआ।
डॉ. गोयल ने बताया कि यह सिर्फ दूरी तय करने की बात नहीं थी, बल्कि प्रकृति और परिस्थितियों से सीधा मुकाबला था। पहाड़ी इलाकों में ऊंचे पहाड़ों की चढ़ाई (क्लाइम्बिंग) करना और फिर टूटी सड़कों पर संतुलन बनाए रखना, एक बड़ा चैलेंज था। कई जगहों पर सड़क की हालत बेहद खराब थी, जिसने शरीर के स्टैमिना की असली परीक्षा ली।
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इसके अलावा, बदलते मौसम और रात के समय कम विजिबिलिटी में साइकिल चलाना भी आसान नहीं था। डॉ. गोयल ने कहा कि उनका यह प्रयास लोगों को, खासकर युवाओं को, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और शारीरिक चुनौतियों को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करेगा।
उन्होंने साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने शारीरिक बाधाएं गौण हो जाती हैं। इस दाैरान डॉ. भावना अग्रवाल, डॉ. एमएम तलवाड़, डाॅ. आजाद सिंह, डॉ. अभिषेक खुराना, डॉ. वीरेश भूषण, डॉ. जीके माैजूद रहे।
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डॉ. गोयल ने बताया कि उनका यह महा-चक्र अभियान पटियाला (पंजाब) से शुरू हुआ था। इस रूट में उन्होंने उत्तर भारत के तीन प्रमुख राज्यों हरियाणा, पंजाब, और हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों को कवर किया। 1200 किलोमीटर का यह सफर, जिसमें दिन और रात लगातार पैडलिंग शामिल थी। अंततः फिर से पटियाला में ही समाप्त हुआ।
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डॉ. गोयल ने बताया कि यह सिर्फ दूरी तय करने की बात नहीं थी, बल्कि प्रकृति और परिस्थितियों से सीधा मुकाबला था। पहाड़ी इलाकों में ऊंचे पहाड़ों की चढ़ाई (क्लाइम्बिंग) करना और फिर टूटी सड़कों पर संतुलन बनाए रखना, एक बड़ा चैलेंज था। कई जगहों पर सड़क की हालत बेहद खराब थी, जिसने शरीर के स्टैमिना की असली परीक्षा ली।
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इसके अलावा, बदलते मौसम और रात के समय कम विजिबिलिटी में साइकिल चलाना भी आसान नहीं था। डॉ. गोयल ने कहा कि उनका यह प्रयास लोगों को, खासकर युवाओं को, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और शारीरिक चुनौतियों को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करेगा।
उन्होंने साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति के सामने शारीरिक बाधाएं गौण हो जाती हैं। इस दाैरान डॉ. भावना अग्रवाल, डॉ. एमएम तलवाड़, डाॅ. आजाद सिंह, डॉ. अभिषेक खुराना, डॉ. वीरेश भूषण, डॉ. जीके माैजूद रहे।