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बार एसोसिएशन ने की जाट आंदोलन में हिंसा की निंदा

Tue, 01 Mar 2016 01:04 AM IST
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो Updated Tue, 01 Mar 2016 01:04 AM IST
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 District Bar Association
 स्थानीय बार एसोसिएशन ने अध्यक्ष संदीप कामरा के नेतृत्व में सोमवार को एक ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम प्रदीप दहिया को सौंपा। जिसमें कहा गया है कि जाट आंदेलन की आड़ में हुए आगजनी, लूटपाट, हत्या व बलात्कार की घटना की एसोसिएशन कड़ी ङ्क्षनदा करती है।
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    इस अवसर पर उनके साथ रणवीर झोरड़, हर्ष मेहता, राकेश बब्बर, अजायब ङ्क्षसह बराड़, जगतार ङ्क्षसह रंधावा, कर्णवीर सहू, सतीश अरोड़ा, विरेंद्र भादू, भरत पारीक, विष्णु जोशी, उदयपाल सिद्धु, रवि किरण गिजवानी व श्रीकांत थेपड़ा सहित अनेक अधिवक्ता उपस्थित थे। उन्होंने अपने ज्ञापन में लिखा है कि जाट आंदोलन की आड़ में हुए घिनौने कार्यों की हम न केवल कड़े शब्दों में ङ्क्षनदा करते है बल्कि इस मांग पत्र के माध्यम से आपसे अनुरोध करते है कि शांत हरियाणा के अंदर हुए इस ङ्क्षनदनीय घटनाक्रम से हरियाएणा के साथ-साथ पूरे देश की जनता शर्मसार हुई है।
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प्रभावित गैर जाट समुदाय के लोग किसी आरक्षण के विरुद्ध नहीं थे बल्कि आथक आधार पर आरक्षण का समर्थन करते है। कुछ स्वार्थी राजनीतिज्ञों, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को पथभ्रष्ट कर दिया। जिसका नाजायज फायदा शरारती व स्वार्थी तत्वों ने उठाकर हरियाणा के स्वर्णीम इतिहास को मैला कर ऐसा माहौल कायम कर दिया जिसके कारण पूरे हरियाणा प्रदेश में आतंक व दहशत का माहौल बन गया।     बार एसोसिएशन के सदस्य मांग की है कि  इस घिनौने घटनाक्रम की जांच उच्च न्यायालय के सिङ्क्षटग जज से करवाई जाए जिससे इस घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके व इस को अंजाम देने वाले शरारती व स्वार्थी तत्वों के साथ-साथ, राजनीतिज्ञों, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ देशद्रोह, हत्या, लूटपाट, बलात्कार आदि का मुकदमा दर्ज करके इन सभी को जेल की सलाखों के पीछे डाला जाए।
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 जिन निर्दोष लोगों का आथक व जानी नुकसान हुआ है उसकी पूत दोषीगण की संपति कुर्क करके की जाए ताकि आने वाले समय में समाज के अंदर ऐसे सत्ता के लोभियों, भ्रष्ट पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक सबक मिले और ऐसी घिनौनी घटना की पुनरावृत्ति न हो सके। इस ज्ञापन की प्रतियां उन्होंने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एवं मानवाधिकार आयोग, राज्यपाल आदि को भी प्रेषित की है।

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