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डेरा सच्चा सौदा प्रकरण : 125 उपद्रवियों पर से कोर्ट ने हटाई देशद्रोह और जानलेवा हमले की धारा

Sat, 01 Feb 2020 11:33 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 01 Feb 2020 11:33 PM IST
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dera sacha souda
25 अगस्त 2017 को डेरा सच्चा सौदा प्रकरण में हुई हिंसा के मामले में चार्ज फ्रेम को लेकर हुई बहस में अतिरिक्त सेशन जज की अदालत ने उपद्रवियों पर से देशद्रोह व जानलेवा हमले की धाराएं हटा दी हैं। अदालत का यह फैसला आरोपियों के लिए राहत भरा है। सिटी थाने में इस मामले में दो एफआईआर दर्ज हुई थी। एक एफआईआर 695 में करीब 85 डेरा प्रेमियों को आरोपी बनाया गया था। यह हिंसा जगदंबे पेपर मिल के पास हुई थी। जबकि एफआईआर नंबर 696 में करीब 40 डेरा प्रेमी आरोपी थे, जिस पर मिल्क प्लांट को आग लगाने का मामला दर्ज किया गया था। देशद्रोह की धारा 124ए हटाने के संबंध में न्यायालय का कहना है कि इस संबंध में गृह मंत्रालय से मंजूरी नहीं ली गई। धारा 307 हटाने के संबंध में कोर्ट का कहना है कि भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया व गोली भी चलाई। लेकिन चिकित्सक अधिकारी की रिपोर्ट में फायर आर्म्स के संबंध में कोई रिपोर्ट नहीं की। आरोपियों ने पुलिस कर्मचारियों पर हमला किया। लेकिन तथ्यों में ये हमला जानलेवा दिखाई नहीं देता, इसलिए कोर्ट की नजर में यह मामला धारा 307 का नहीं बनता। डेरा प्रेमियों के केस की पैरवी कर रहे एडवोकेट संदीप शर्मा, अभिनव शर्मा व परमिंदर गाबा का कहना है कि कोर्ट ने देशद्रोह व जानलेवा हमला करने की धाराएं हटा दी हैं। पुलिस इनसे संबंधित कोई ठोस तथ्य पेश नहीं कर पाई।
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ये था मामला
25 अगस्त 2017 को डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम को साध्वी यौन प्रकरण मामले में सीबीआई कोर्ट ने दोषी करार दिया था। इस फैसले के बाद सिरसा में हिंसा हुई थी। सिरसा में धारा 144 लागू थी। डेरा प्रेमियों ने मिल्क प्लांट व बेगू बिजली घर को आग लगा दी थी। इसके बाद डेरा प्रेमियों ने जगदंबे पेपर मिल के पास भी हिंसा की। डेरा प्रेमी शहर की ओर बढ़ रहे थे। पुलिस ने फायरिंग की। इस फायरिंग में 6 डेरा प्रेमी मारे गए थे। कीर्तिनगर चौकी प्रभारी शैलेंद्र कुमार की शिकायत पर डेरा प्रेमियों के खिलाफ धारा 188, 147, 148,149, 307, 124ए, 435, 332, 353, 186, 120बी, 109 आईपीसी, आर्म्स एक्ट 25, 54, 59 के तहत मामला दर्ज किया गया था। सरकारी पक्ष ने अभियुक्तों को चार्ज फ्रेम की बहस के दौरान चार्जशीट करने का अनुरोध किया था। सिरसा पुलिस ने इस मामले में 900 पेजों का चालान पेश किया था। इसमें 69 लोगों को गवाह बनाया गया था। 6 नवंबर 2017 से आरोपियों पर कोर्ट में आरोप तय होने शुरू हुए थे। अधिकांश आरोपियों को कोर्ट से जमानत मिल गई थी।
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