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गुस्से मे डीसी बोलीं, अगर अपनी बेटी ही नहीं बचा सकते तो कैसे सरपंच हैं आप
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Fri, 05 Aug 2016 01:27 AM IST
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डीसी श्ारण्ादीप
- फोटो : Bureau
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ओढां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ ने सरपंचों और एएनएम की क्लास ली। उन्होंने उन्हें जमकर लताड़ते हुए कहा कि क्या वे गांव की गलियां बनवाने व ग्रांट लेने के लिए सरपंच बने हैं। आपके गांव में बेटियां मारी जा रही हैं और आप कह रहें हैं कि हम प्रयास कर रहे हैं। जिस गांव में लिंगानुपात कम है उन्हें कोई ग्रांट नहीं मिलेगी और एएनएम आप क्या कर रही हैं आपको तो टर्मिनेट कर घर भेज देना चाहिए।
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दरअसल उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ वीरवार को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत ओढां के स्वास्थ्य केंद्र में क्षेत्र की ग्राम पंचायतों व एएनएम आदि कर्मचारियों की बैठक ले रही थीं। इस बैठक के दौरान उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से हर गांव केे लिंगानुपात की रिपोर्ट पूछते हुए संबंधित गांव के सरपंचों को खड़ा कर उनसे जवाब-तलबी की जिसके तहत उन्होंने दो चार गांवों को छोड़कर ओढां ब्लॉक के सभी गांवों के सरपंचों की खूब क्लास लगाते हुए कहा कि क्या वे ग्रांट लेने या चौधर करने के लिए ही सरपंच बने हैं।
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उन्होंने ब्लॉक में सबसे कम लिंगानुपात होने पर आनंदगढ़ की सरंपच को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि जब आपके गांव में खुला दरबार लगा था तो उस वक्त आप बड़े दावे कर रही थीं लेकिन आपका गांव लिंगानुपात में सबसे पिछड़ा हुआ है आपके गांव की 500 बेटियां कहां गई। वहीं उन्होंने वहां की एएनएम को लताड़ लगाते हुए कहा कि उसे टर्मिनेट कर दिया जाए। वहीं गांव गदराना में भी इसी तर्ज पर सरंपच को कहा कि आपके दिमाग में ग्रांट लेने के सिवाय भी और कुछ आता है क्या। उन्होंने वहां की एएनएम को भी फटकार लगाते हुए टर्मिनेट (बर्खास्त) करने के आदेश दिए।
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उन्होंने गांव देसू मलकाना के सरपंच प्रतिनिधि बिंद्र सिंह, ओढां की सरपंच लखवीर कौर, घुंकावाली के सरपंच नायब सिंह सहित अन्य गांवों के सरपंचों को खड़ा करते हुए जमकर डांट पिलाते हुए कहा कि आप कैसे सरपंच हैं आपके गांवों में बेटियां गर्भ में मारी जा रही हैं। हालांकि कुछ सरपंचों ने अपने तर्क भी दिए लेकिन उपायुक्त ने किसी की एक न सुनते हुए कहा कि उन्हें तर्क नहीं बेटियां बचाकर लिंगानुपात ऊपर चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग को भी लिया आड़े हाथों
लिंगानुपात के मामले में उपायुक्त इस कदर खफा नजर आईं कि उन्होंने सरपंचों, आशा वर्कर व एएनएम के अलावा सीएमओ डॉ. सुरजभान कंबोज आदि से कहा कि आपका विभाग कर क्या रहा है अगर आपसे कुछ नहीं होता तो मुझे बताएं मेरे पास बेटी बचाओ अभियान के तहत पूरा समय है। उन्होंने कहा कि मीटिंग व भाषणबाजी से काम नहीं चलेगा जैसा भी हो मुझे इस अभियान में कार्य चाहिए। उन्होंने लोगों से कहा कि जो एएनएम हेड क्वार्टर मेनटेन नहीं करती या किसी तरह की लापरवाही करती है तो इसकी शिकायत सीधे रूप से मुझे दें। वहीं उन्होंने महिला सरपंचों से गांवों में गर्भवती औरतों ेक बारे पूछा तो किसी के पास भी कोई जवाब नहीं था इसके लिए सभी को कड़ी डांट सहनी पड़ी।
अस्पताल में नर्सें करती हैं नर्सें
इस मौके पर ओढां की एक महिला सुखदीप कौर ने उपायुक्त को शिकायत देते हुए कहा कि वहां अस्पताल में नर्सें मनमर्जी करते हुए मरीजों को परेशान करती हैं उसने कहा वह डिलीवरी हेतु अस्पताल में गई थी जहां उसे कहा गया कि डिलीवरी में अभी करीब एक महीना शेष है लेकिन निजी अस्पताल में उसी रात को डिलीवरी हो गई। इसके अलावा सामान्य मरीजों को रेफर करने व चिकित्सकों द्वारा कोई देखभाल न करने सहित अनेक शिकायतें की गई जिस पर अस्पताल के कर्मचारियों की सांसें फूली रहीं। उपायुक्त इस कदर खफा नजर आईं कि उन्होंने बैठक मेें चाय पानी तक लेने से इनकार कर दिया। उपायुक्त ने सरपंचों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि वे एएनएम व आशा वर्कर की समय समय पर बैठक लें। करीब दो घंटे तक रुकी उपायुक्त ने सभी सरपंचों, आशा वर्कर, एएनएम एवं स्वास्थ्य विभाग की खूब परेड किए रखी।
आंकड़ों पर उठे सवाल
लिंगानुपात के जो आंकड़े उपायुक्त को बताए गए उन पर भी सवाल उठ खड़े हुए। कहा गया कि जो आंकड़े पंचायतें बता रही हैं वे सही नहीं है तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी अपनी साख बचाने के लिए बता रहे हैं तो वहीं उन्होंने एएनएम द्वारा हेड क्वार्टर मैनटेन न करने पर उन्होंने अधिकारियों को चैक करने के आदेश देते हुए आमजन व मीडिया से भी सहयोग की अपील की।