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वर्षों का इंतजार, चंद मिनटों में मिल गया इंसाफ
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
Updated Sun, 13 Dec 2015 01:00 AM IST
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शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का जिले भर में आयोजन
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किया गया। इस दौरान सालों से अदालतों में चल रहे विभिन्न मामलों का निपटारा
किया गया।
सिरसा की अदालतों में एक ही दिन में 3091 केसों का फैसला सुनाकर पीड़ितों को दो करोड़ 78 लाख 73 हजार 378 रुपये की मुआवजा राशि दी।
राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को छह हजार 178 मामले जिलेभर की अदालतों में सुनवाई के लिए रखे गए थे। अदालतों ने पचास प्रतिशत से अधिक केसों का फैसला करके एक कीर्तिमान कायम किया है।
इससे पहले कभी भी एक दिन में इतने केसों का फैसला जिला अदालतों ने नहीं किया। अधिकतर केसों में दोनों पक्षों में समझौते हुए। इस दौरान सुलझाए गए केस अदालतों में कई सालों से लंबित चल रहे थे।
इन मुकदमों में दीवानी, चेक बाउंस, बिजली, यातायात, सड़क दुर्घटना, छोटे आपराधिक व वैवाहिक मामले शामिल हैं।
लोक अदालत में हल हुए मामलों की फीस भी लोगों को वापस की गई। लोक अदालत में सुबह से ही काफी संख्या में लोग पहुंचे थे। इस दौरान लोगों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क बनाए गए थे।
जहां पर लोगों की सहायता की जा रही थी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अक्षदीप महाजन ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का केवल लक्ष्य एक साथ कई केसों को निपटाना नहीं था।
बल्कि लोगों को तुरंत इंसाफ दिलाना था। उन्होंने बताया कि लोक अदालत के दौरान जो भी मामले हल किए गए हैं। उन फैसलों के खिलाफ आगे अपील भी दायर नहीं की जा सकती है।
यह तीसरी मेगा राष्ट्रीय लोक अदालत थी। 2014 में दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक ही दिन में देशभर की अदालतों में 1.25 करोड़ से ज्यादा केस निपटा हुआ था।
सुबह नौ बजे से ही जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिमलेश तंवर, एडीजे संगीता राय, एडीजे सुभाष महला, एडीजे आरके मेहता, एडीजे आरपी सिंह, सीजेएम बलवंत सिंह की अदालतों फटाफट केसों का निपटारा होना शुरू हो गया था। नियमित लोक अदालत में भी पीड़ित उपभोक्ताओं को तुरंत इंसाफ दिया गया।
सिरसा की अदालतों में एक ही दिन में 3091 केसों का फैसला सुनाकर पीड़ितों को दो करोड़ 78 लाख 73 हजार 378 रुपये की मुआवजा राशि दी।
राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को छह हजार 178 मामले जिलेभर की अदालतों में सुनवाई के लिए रखे गए थे। अदालतों ने पचास प्रतिशत से अधिक केसों का फैसला करके एक कीर्तिमान कायम किया है।
इससे पहले कभी भी एक दिन में इतने केसों का फैसला जिला अदालतों ने नहीं किया। अधिकतर केसों में दोनों पक्षों में समझौते हुए। इस दौरान सुलझाए गए केस अदालतों में कई सालों से लंबित चल रहे थे।
इन मुकदमों में दीवानी, चेक बाउंस, बिजली, यातायात, सड़क दुर्घटना, छोटे आपराधिक व वैवाहिक मामले शामिल हैं।
लोक अदालत में हल हुए मामलों की फीस भी लोगों को वापस की गई। लोक अदालत में सुबह से ही काफी संख्या में लोग पहुंचे थे। इस दौरान लोगों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क बनाए गए थे।
जहां पर लोगों की सहायता की जा रही थी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अक्षदीप महाजन ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का केवल लक्ष्य एक साथ कई केसों को निपटाना नहीं था।
बल्कि लोगों को तुरंत इंसाफ दिलाना था। उन्होंने बताया कि लोक अदालत के दौरान जो भी मामले हल किए गए हैं। उन फैसलों के खिलाफ आगे अपील भी दायर नहीं की जा सकती है।
यह तीसरी मेगा राष्ट्रीय लोक अदालत थी। 2014 में दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक ही दिन में देशभर की अदालतों में 1.25 करोड़ से ज्यादा केस निपटा हुआ था।
सुबह नौ बजे से ही जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिमलेश तंवर, एडीजे संगीता राय, एडीजे सुभाष महला, एडीजे आरके मेहता, एडीजे आरपी सिंह, सीजेएम बलवंत सिंह की अदालतों फटाफट केसों का निपटारा होना शुरू हो गया था। नियमित लोक अदालत में भी पीड़ित उपभोक्ताओं को तुरंत इंसाफ दिया गया।