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बलात्कारी ने जज से लगाई गुहार साहब, बच्चे छोटे और मां-बाप बूढ़े हैं इसलिए सजा में नरमी बरतें
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
Updated Thu, 21 Jul 2016 01:30 AM IST
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- फोटो : Desk
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दिव्यांग नाबालिग से बलात्कार मामले में बुधवार को अदालत का फैसला सुनने के लिए हर शख्स बेकरार था। अदालत परिसर में सुबह से ही इसी दोषी किशोरी लाल की सजा को लेकर चर्चा होती ही। किशोरी लाल ने अपने अंतिम बयानों में न्यायाधीश से गुहार लगाते हुए कहा कि जज साहब मैं अकेला कमाने वाला हूं, बच्चे छोटे और मां-बाप बूढ़े हैं। मुझसे गलती हुई है पर मेरे बच्चों का भविष्य और बूढ़े मां-बाप की तरफ देखकर सजा में नरमी बरतना।
इसके बाद न्यायाधीश प्रवीण कुमार ने फैसला लिखवाना शुरू किया और शाम सवा चार बजे बलात्कारी किशोरी लाल को सात साल कैद व 21 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। किशोरी लाल की गुहार पर अदालत ने सजा देने में नरमी दिखाई। फैसला सुनने के बाद हर तरफ यही चर्चा थी कि अदालत ने सजा में बहुत रहमदिली दिखाई है। जिस प्रकार का अपराध था। समाज में एक संदेश देने के लिए कड़ी सजा की आस लोगों ने लगा रखी थी, ताकि कोई भी शख्स इस प्रकार का अपराध करने से पहले हजार बार सोचे। खास बात यह है कि दिव्यांग पीड़िता ने इशारों की भाषा से अदालत को सारी आपबीती बताई। अदालत ने इशारों से उसकी बात समझने के लिए खास तौर पर एक विशेषज्ञ बुलाया। घंटों चली गवाही के दौरान न्यायाधीश संगीता राय स्वयं पीड़िता की आपबीती जानकर हैरान रह गई। एडीजे संगीता राय का तबादला करनाल होने के बाद नवनियुक्त न्यायाधीश प्रवीण कुमार ने इस मामले में का निपटारा किया।
मामले के अनुसार ऐलनाबाद के वार्ड नंबर छह निवासी 46 वर्षीय किशोर लाल ने 11 मई 2015 को क्षेत्र में घूमने वाली एक नि:शक्तजन नाबालिग को अपने घर ले आया। परिवार वाले बाहर गए हुए थे। उसने नि:शक्तजन को अपनी हवस का शिकार बनाया। जब किशोरी लाल गेट खोलकर नाबालिग को बाहर छोड़ने जाने लगा तो पड़ोस के कुछ लोगों ने उसे देख लिया। नाबालिग की हालत देखकर लोगों को आभास हो गया कि उसके साथ कुछ न कुछ गलत हुआ है। लोगों ने नाबालिग के परिजनों को बुलवाया और पुलिस को मामले की सूचना दी। पुलिस ने पीड़िता की मेडिकल जांच करवाई तो उसके साथ बलात्कार की पुष्टि हो गई। पुलिस ने किशोरी लाल के खिलाफ रेप और पोस्को एक्ट के तहत केस दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया।
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इसके बाद न्यायाधीश प्रवीण कुमार ने फैसला लिखवाना शुरू किया और शाम सवा चार बजे बलात्कारी किशोरी लाल को सात साल कैद व 21 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। किशोरी लाल की गुहार पर अदालत ने सजा देने में नरमी दिखाई। फैसला सुनने के बाद हर तरफ यही चर्चा थी कि अदालत ने सजा में बहुत रहमदिली दिखाई है। जिस प्रकार का अपराध था। समाज में एक संदेश देने के लिए कड़ी सजा की आस लोगों ने लगा रखी थी, ताकि कोई भी शख्स इस प्रकार का अपराध करने से पहले हजार बार सोचे। खास बात यह है कि दिव्यांग पीड़िता ने इशारों की भाषा से अदालत को सारी आपबीती बताई। अदालत ने इशारों से उसकी बात समझने के लिए खास तौर पर एक विशेषज्ञ बुलाया। घंटों चली गवाही के दौरान न्यायाधीश संगीता राय स्वयं पीड़िता की आपबीती जानकर हैरान रह गई। एडीजे संगीता राय का तबादला करनाल होने के बाद नवनियुक्त न्यायाधीश प्रवीण कुमार ने इस मामले में का निपटारा किया।
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मामले के अनुसार ऐलनाबाद के वार्ड नंबर छह निवासी 46 वर्षीय किशोर लाल ने 11 मई 2015 को क्षेत्र में घूमने वाली एक नि:शक्तजन नाबालिग को अपने घर ले आया। परिवार वाले बाहर गए हुए थे। उसने नि:शक्तजन को अपनी हवस का शिकार बनाया। जब किशोरी लाल गेट खोलकर नाबालिग को बाहर छोड़ने जाने लगा तो पड़ोस के कुछ लोगों ने उसे देख लिया। नाबालिग की हालत देखकर लोगों को आभास हो गया कि उसके साथ कुछ न कुछ गलत हुआ है। लोगों ने नाबालिग के परिजनों को बुलवाया और पुलिस को मामले की सूचना दी। पुलिस ने पीड़िता की मेडिकल जांच करवाई तो उसके साथ बलात्कार की पुष्टि हो गई। पुलिस ने किशोरी लाल के खिलाफ रेप और पोस्को एक्ट के तहत केस दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया।
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