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एसडीएम बोले तमाशा बंद करो
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
Updated Wed, 04 Nov 2015 01:19 AM IST
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पिछले दो माह से मजदूरी की मांग कर रहे मनरेगा मजदूरों ने मंगलवार को एसडीएम सुरेश कस्वां की गाड़ी को घेर लिया। हंगामा कर रहे मजदूरों ने गाड़ी को एक इंच नहीं सरकने नहीं दिया।
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इस बीच मजदूरों ने गाड़ी का शीशा तोड़ने की धमकी दे डाली। जिससे डीएसपी भड़क उठे। डीएसपी को गुस्सा देख मजदूर पीछे हट गए जिसके बाद पुलिस ने एसडीएम को लघु सचिवालय के बाहर निकाला।
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जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय मजदूर एकता पार्टी के बैनर तले गांव लंबी के मजदूर पिछले दो माह से मजदूरी का पैसा मांग रहे हैं। मजदूरों का करीब दस लाख रुपये बकाया हैं।
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उनका आरोप है कि लाखों रुपये की राशि का गबन किया गया है। मंगलवार को जांच के लिए एसडीएम ने दोनों पक्षों को बुलाया था।
ष्ट्रीय मजदूर एकता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष रोहताश कश्यप ने 64 मजदूरों की सूची प्रशासन के आगे रखी। जो पिछले पांच साल से मनरेगा के तहत कार्य कर रहे हैं।
उन्हें दो साल से वेतन नहीं मिल रहा था। जैसे ही सूची का अवलोकन हुआ, तो एसडीएम सुरेश कस्वां ने कहा कि उपरोक्त नाम मस्ट्रोल में नहीं हैं।
फिर उन्हें कैसे वेतन दिया जाए। एसडीएम ने मजदूरों को तमाशा खत्म करने की बात कहते हुए केस दर्ज करवाने की चेतावनी दी। इतना कहकर एसडीएम कार्यालय के बाहर आकर गाड़ी में बैठकर जाने लगे।
गुस्साए मजदूरों ने गाड़ी को घेर लिया। मजदूर गाड़ी के आगे-पीछे बैठ गए। सिरसा में जरूरी बैठक के लिए रवाना हो रहे एसडीएम का घेराव करने से पुलिस में हड़कंप मच गया।
डीएसपी सत्यपाल यादव, शहर थाना प्रभारी सुखदेव सिंह दलबल सहित मौका पर पहुंचे। गाड़ी के आगे बैठी महिला मजदूर इंद्रजीत कौर, जसवीर कौर, गुरदीप कौर ने बताया कि पिछले दो साल में पंचायत ने रास्तों के साथ-साथ जलघर तथा शमशान भूमि में कार्य करवाया है।
काम के बदले मजदूरी नहीं दी गई। अबा मस्ट्रोल में उनके नाम की जगह गांव के दबंग तथा प्रभावशाली लोगों के नाम दिखाए जा रहे हैं। उन पर मामला दर्ज करने की धमकी दी जा रही है।
एक युवक ने सरेआम एसडीएम की गाड़ी के शीशे तोड़ने की धमकी दे डाली। जिस पर डीएसपी को गुस्सा आ गया। डीएसपी ने लॉ एंड ऑर्डर तोड़ने पर कड़ा रुख अख्तियार करने की चेतावनी दे दी।
जिसके बाद मजदूर गाड़ी से दूर हट गए। करीब एक घंटा बाद पुलिस सुरक्षा में एसडीएम को लघु सचिवालय से बाहर निकाला गया।
मजदूरों ने बयान दर्ज करवाए
मजदूरों ने कहा कि मनरेगा में घोटाला हुआ है। बयान दर्ज करने के बहाने एबीपीओ मनमर्जी से बयान दर्ज करने लगा। जिसके बाद प्रशासन ने उसे बदलकर एसईपीओ रामप्रकाश ग्रोवर की ड्यूटी लगा दी। मजदूरों ने बारी-बारी से अपने बयान दर्ज करवाए।
घोटाले में जिसका नाम, उसे ही जांच
आरोप है कि पिछले दो माह से लगातार आंदोलन करके मजदूरी मांग रहे मजदूरों की शिकायत पर डबवाली प्रशासन का रवैया अब भी नकारात्मक बना हुआ है।
शिकायत में बीडीपीओ का नाम भी शामिल है। प्रशासन से उसे ही जांच सौंप दी। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या मजदूरों के साथ न्याय होगा या फिर जांच दम तोड़ देगी।
यह भी सवाल खड़ा हुआ है कि गांव में 250 मजदूर हैं, उनमें से 64 मजदूरों के नामों के अतिरिक्त अन्य नाम कैसे आ गए?
मजदूरों का कहना है कि उन्होंने काम किया है। उन्हें पैसा दिया जाए। मजदूरों के बयान दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।
-सुरेश कस्वां, एसडीएम, डबवाली