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बेखौफ लुटेरों को रास आ रहा है सिरसा
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
Updated Fri, 26 Feb 2016 01:08 AM IST
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एटीएम लुटेरों को सिरसा जिला काफी रास आया है। 22 महीने बाद भी सिरसा पुलिस उन तक पहुंचने में नाकाम साबित हुई है। लुटेरे सरसाई नगरी से नौ एटीएम उखाड़कर ले जा चुके हैं और आज भी पुलिस के हाथ खाली है।
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ईनाम का सहारा लेकर भी पुलिस एक वारदात की गुत्थी भी सुलझा नहीं सकी। पुलिस ने भी उक्त सभी घटनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
मंगलवार रात को डबवाली में लुटेरों ने फिर यूनियन बैंक के एटीएम को निशाना बनाने का प्रयास किया। इससे पहले 20 फरवरी की रात को लुटेरों ने सिरसा के बरनाला रोड स्थित यूनियन बैंक के एटीएम को उखाड़ लिया जिसमें साढ़े चार लाख रुपये की राशि थी। यह एटीएम लूट की जिले में नौवीं वारदात है।
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सिरसा जिले से लुटेरे जून 2014 से लेकर फरवरी 2016 तक विभिन्न बैंकों के नौ एटीएम उखाड़कर 80 लाख रुपये से अधिक राशि लूट चुके हैं।
लगातार होती जा रही इन वारदातों का मुख्य कारण सिरसा पुलिस का ध्यान एटीएम लुटेरों से हटना माना जा रहा है। पुलिस यह सोच धारण कर चुकी है कि जब कोई गिरोह गिरफ्त में आएगा तो सभी वारदातें अपने आप ही सुलझ जाएंगी।
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पुलिस की इसी सोच का लाभ उठाते हुए लुटेरों ने एटीएम लूट की नौंवी वारदात को आसानी से अंजाम दे दिया। बेखौफ लुटेरों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय के नीचे स्थित एसबीआई एटीएम को भी नहीं छोड़ा। उन्होंने यहां भी चोरी की कोशिश की। चोर दसवीं वारदात को इसलिए अंजाम नहीं दे पाए क्योंकि अलार्म बज उठा।
पंजाब नेशनल बैंक से हुई शुरुआत
वारदातों का सिलसिला 28 जून 2014 की सुबह से शुरू हुआ था। पुलिस सुरक्षा प्रबंधों को ठेंगा दिखाकर इस दिन लुटेरे लालबत्ती चौके के पास पीएनबी एटीएम को उखाड़कर ले गए थे।
एटीएम में 15 लाख रुपये की नगदी थी। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मितेश जैन ने लुटेरों तक पहुंचने के लिए आठ टीमों का गठन किया, लेकिन पुलिस लुटेरों का कोई सुराग नहीं लगा पाई।
17 दिनों बाद ही एसबीआई को बनाया निशाना
पीएनबी वारदात के 17 दिनों बाद लुटेरों ने डिंग रोड स्थित एसबीआई एटीएम को निशाना बनाया और एटीएम उखाड़कर ले गए।
इस एटीएम में 11 लाख रुपये की राशि थी। एसबीआई का यह एटीएम डिंग पुलिस थाने से मात्र 200 मीटर दूर है। लुटेरे मात्र छह मिनट में एसबीआई एटीएम को उखाड़कर गाड़ी में डालकर ले गए।
लुटेरों ने एटीएम कक्ष के ऊपर सो रहे एक मजदूर को गन प्वाइंट पर भी बंधक बनाया। उसी मजदूर ने थाने में जाकर पुलिस को लूट की सूचना दी।
मात्र 17 दिन के अंदर दूसरी वारदात से पुलिस व्यवस्था से पूरी तरह से सवाल खड़ा हो गया और एसपी ने इसे चुनौती मानते हुए इसे केस नंबर एक का दर्जा देकर 12 टीमों का गठन किया पर अभी भी पुलिस के हाथ खाली हैं।
22 अगस्त को डबवाली मार्ग से एटीएम उखाड़ा
22 अगस्त 2014 को डबवाली के सिरसा रोड पर लुटेरों ने पीएनबी एटीएम को उखाड़ा। इस एटीएम में 13 लाख 79 हजार 300 रुपये की नगदी थी।
इसके बाद सितंबर में स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में एटीएम उखाड़कर ले जाने का प्रयास किया। 18 नवंबर को इलाहाबाद बैंक के एटीएम उखाड़ने की घटना पांचवीं वारदात थी।
29 मार्च 2015 को लुटेरों ने शिव चौक स्थित एचडीएफसी बैंक के एटीएम को निशाना बनाया। लुटेरे चंद मिनटों में एटीएम उखाड़कर गाड़ी में लादकर फरार हो गए।
14 लाख रुपये की नगदी एटीएम में थी। इसके बाद अक्टूबर 2015 में डबवाली शहर के बीचों-बीच स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक को लुटेरों ने निशाना बना डाला।
पुलिस हर वारदात की भांति अज्ञात लुटेरों के खिलाफ मामला दर्ज किया, लेकिन उनका पता लगाने में आज तक सफलता हासिल नहीं कर पाई।
बेअसर साबित हुआ एक लाख का ईनाम
सिरसा के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक मितेश जैन ने लुटेरों को पकड़ने के लिए एक लाख रुपये का ईनाम घोषित किया हुआ था, लेकिन इसका फायदा पुलिस को नहीं मिला। पुलिस लुटेरों का कुछ भी पता नहीं लगा पाई।
सैकड़ों बार पुलिस की टीमें राजस्थान व पंजाब में जाकर छापेमारी कर चुकी हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लुटेरे इतने शातिर हैं कि कोई भी सबूत पीछे छोड़कर नहीं जाते।
एक छोटा सा ठोस सबूत ही लुटेरों तक पहुंचने के लिए काफी है, लेकिन ठोस सबूत अब तक नहीं मिला। तत्कालीन एसपी ने लुटेरों तक पहुंचे के लिए स्पेशल टीमें गठित की थी।
इसके बाद पुलिस अधीक्षक अश्विन शैणवी ने भी लुटेरों तक पहुंचने के लिए ईनाम का सहारा लिया परंतु यह प्रयास भी विफल साबित हुआ।