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डेढ़ लाख लेकर किसान को थमा देते थे 1000 की रसीद

Sun, 03 Jan 2016 12:17 AM IST
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो Updated Sun, 03 Jan 2016 12:17 AM IST
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half a million taken, Give 1000 Rs receipts

दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम उपमंडल कालांवाली में करोड़ों रुपये के घपले की जांच रिपोर्ट सामने आई है।

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जांच अधिकारी ने एसडीई पंकज गंडा, जेई बलकरण सिंह, विनोद कुमार, जंटा सिंह, कंज्यूमर क्लर्क गोबिंद सिंह सहित कार्यकारी अभियंता के कार्यालय में मौजूद ड्राइंग सेक्शन में कार्यरत सभी कर्मचारियों को दोषी ठहराया है।

आरोप है कि इन लोगों ने मिलीभगत कर भोले-भाले किसानों का जमकर शोषण किया। करोड़ों रुपये की हेरफेर करते हुए निगम को चूना लगाया।

घोटाला उजागर करने वाले बिजली निगम की विजिलेंस विंग हिसार के एक्सईएन  शमशेर सिंह का तबादला हरियाणा सरकार ने नूंह कर दिया है। तबादला से पूर्व वे अपनी जांच रिपोर्ट डीजीपी आरपी सिंह को दे चुके थे।
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उनकी रिपोर्ट पर दोषी अधिकारियों तथा कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के लिए सरकार ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के एमडी अरुण वर्मा को आदेश जारी किए हैं।
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रिपोर्ट के अनुसार कालांवाली सब डिजीवन के बिजली कार्यालय में एसडीई पंकज गंडा ने अपने कार्यकाल 2010 से 2014 तक सिंगल फेस के 150 से 200 ट्रांसफार्मर ढाणियों में लगवाए हैं।

निगम में इनका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। यहीं नहीं उपरोक्त कर्मचारियों द्वारा पेट्रोल पंप व स्कूलों का कनेक्शन लगाने पर भारी रिश्वत लेने की बात का भी खुलासा हुआ है।

जांच अधिकारी ने गांव रोहण निवासी बलविंद्र सिंह का जिक्र करते हुए कहा है कि 77 हजार रुपये  की रिश्वत मांगने पर इन कर्मचारियों के खिलाफ 15 जुलाई 2015 को एफआईआर दर्ज करवाई गई है।

जांच अधिकारी ने कहा है कि उपरोक्त कर्मचारियों ने हजारों किसानों से डेढ़-डेढ़ लाख रुपये  रिश्वत लेकर उन्हें हफ्ते भर में कनेक्शन चालू करने का भरोसा दिलाया। 1000-1200 रुपये  की रसीद किसानों को दी।

शेष राशि खुद हजम कर गए। कनेक्शनों पर ज्यादा सामान विभाग से तथा कुछ निजी ठेकेदारों से खरीदा गया। नकली मीटर देकर इनके कनेक्शन चालू कर दिए।

जोकि एक वर्ष चलने के बाद शिकायत होने पर चेकिंग के दौरान नजायज पाए गए। ऐसा होने पर 50 से 60 हजार रुपये जुर्माना राशि किसानों द्वारा भरी गई है।

रिकॉर्ड के अनुसार 200 से ज्यादा किसानों के नलकूप कनेक्शनों की चेकिंग हुई। जिन्होंने डर के मारे अपने ट्रांसफार्मर व तारें उतार कर रख लिए। अब इन किसानों के नलकूप बिना ट्रांसफार्मर व बिजली कनेक्शन के लटके पड़े हैं।

कुछ किसानों ने अदालत की शरण ली है। इस मामले में गांव सिंघपुरा तथा पिपली के किसानों ने तीन अक्तूबर 2015 तथा एक दिसंबर 2015 को थाना कालांवाली में एफआईआर दर्ज करवाई है।

क्या है जांच रिपोर्ट में
जांच अधिकारी शमशेर सिंह ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कालांवाली उपमंडल के सभी गांवों के किसानों को बिना कागजातों के ही 500 से 700 कनेक्शन जारी किए गए हैं।

इनका रिकॉर्ड कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। जाली प्रमाण-पत्रों तथा नकली रसीदों से एसडीई द्वारा गरीब किसानों को लूटा ही गया है। महकमे को भी करोड़ों रुपये की चपत लगाई गई है।


महकमे ने उक्त अधिकारी के खिलाफ 23 लाख नकली रसीदें काटने पर पांच अक्तूबर 2015 को एफआईआर नंबर 279 दर्ज कराई है।

राइस शेलरों व पेट्रोल पंपों पर शहरी फीडर से निगम की मंजूरी के बिना बिजली कनेक्शन दिए जाने पर 10 से 29 लाख रुपये तक की रिश्वत इन अधिकारियों ने ली है।

जेई ने एसडीओ के साथ मिलकर बिजली चोरी चैकिंग के लिए 900 एलएल-1 कॉपी, जो बिजली चेकिंग में इस्तेमाल होती है, उनको भरकर कभी भी दफ्तर में नहीं लौटाया।

चेकिंग की एलएल-1 कॉपी भरी, पेज नष्ट किए और पैसे जेब में। इन भ्रष्ट कर्मचारियों के अलावा दो निजी ठेकेदार रोहित तथा संदीप ने भी इन किसानों को जमकर लूटा है।

पुलिस पर भी आरोप
जांच अधिकारी के अनुसार भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ थाना कालांवाली में चार केस दर्ज हैं। लेकिन पुलिस ने अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं की है।

पुलिस उन्हें बचाने का प्रयास कर रही है। जांच अधिकारी ने कहा कि रानियां तथा जीवननगर में भी ऑडिट करवाया जाए तो उपरोक्त घपलेबाजी वहां भी मिलेगी।

जांच रिपोर्ट शुक्रवार को ही मेरे पास आई है। दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-अरूण वर्मा, एमडी, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम, हिसार

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