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परिवहन आयुक्त कार्यालय चंडीगढ़ के अधीक्षक को किया जुर्माना
Updated Wed, 07 Feb 2018 01:08 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी निर्धारित समय पर नहीं देने के एक मामले में राज्य सूचना आयोग हरियाणा ने परिवहन आयुक्त चंडीगढ़ कार्यालय के राज्य जनसूचना अधिकारी कम अधीक्षक को आठ हजार रुपये का जुर्माना किया है। मामले के अनुसार सिरसा निवासी मनमोहन सिंह ने अपने वकील पवन पारीक एडवोकेट के माध्यम से परिवहन आयुक्त चंडीगढ़ कार्यालय से सूचना लेने के लिए आवेदन किया था। आवेदन में उन्होंने पूछा था कि परिवहन विभाग चंडीगढ़ द्वारा राज्य में जिला आरटीए स्तर पर वाहनों की पासिंग के संबंध में आरटीए और मोटरयान निरीक्षकों के लिए क्या नियम निर्धारित किए गए हैं। कमर्शियल वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने के बाद वाहनों की जांच व पासिंग के लिए विभाग द्वारा क्या प्रक्रिया निर्धारित है। स्पीड गवर्नर की जांच के लिए विभाग के पास क्या उपकरण/ यंत्र उपलब्ध हैं और इन उपकरणों की खरीद पर कितना खर्च हुआ है। साथ ही यह भी पूछा था कि वाहनों में उच्च सुरक्षा नंबर प्लेट लगाने का ठेका किन नियमों व शर्तों के तहत किस कंपनी को दिया गया है। मनमोहन सिंह का कहना है कि उन्हें यह जानकारी निर्धारित समय पर नहीं मिली जिसकी अपील उन्होंने अपने वकील पवन पारीक एडवोकेट के माध्यम से राज्य सूचना आयोग के समक्ष दायर की थी। राज्य सूचना आयोग ने इस मामले में परिवहन आयुक्त कार्यालय के जनसूचना अधिकारी कम अधीक्षक को दोषी पाया और आठ हजार रुपये का जुर्माना किया है।
समय पर सूचना न देने पर परिवहन आयुक्त कार्यालय चंडीगढ़ के अधीक्षक पर आठ हजार जुर्माना
आरटीआई के तहत निर्धारित समय पर नहीं दी सूचना
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सिरसा।
आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी निर्धारित समय पर नहीं देने के एक मामले में राज्य सूचना आयोग हरियाणा ने परिवहन आयुक्त चंडीगढ़ कार्यालय के राज्य जनसूचना अधिकारी कम अधीक्षक को आठ हजार रुपये का जुर्माना किया है। मामले के अनुसार सिरसा निवासी मनमोहन सिंह ने अपने वकील पवन पारीक एडवोकेट के माध्यम से परिवहन आयुक्त चंडीगढ़ कार्यालय से सूचना लेने के लिए आवेदन किया था। आवेदन में उन्होंने पूछा था कि परिवहन विभाग चंडीगढ़ द्वारा राज्य में जिला आरटीए स्तर पर वाहनों की पासिंग के संबंध में आरटीए और मोटरयान निरीक्षकों के लिए क्या नियम निर्धारित किए गए हैं। कमर्शियल वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने के बाद वाहनों की जांच व पासिंग के लिए विभाग द्वारा क्या प्रक्रिया निर्धारित है। स्पीड गवर्नर की जांच के लिए विभाग के पास क्या उपकरण/ यंत्र उपलब्ध हैं और इन उपकरणों की खरीद पर कितना खर्च हुआ है। साथ ही यह भी पूछा था कि वाहनों में उच्च सुरक्षा नंबर प्लेट लगाने का ठेका किन नियमों व शर्तों के तहत किस कंपनी को दिया गया है। मनमोहन सिंह का कहना है कि उन्हें यह जानकारी निर्धारित समय पर नहीं मिली जिसकी अपील उन्होंने अपने वकील पवन पारीक एडवोकेट के माध्यम से राज्य सूचना आयोग के समक्ष दायर की थी। राज्य सूचना आयोग ने इस मामले में परिवहन आयुक्त कार्यालय के जनसूचना अधिकारी कम अधीक्षक को दोषी पाया और आठ हजार रुपये का जुर्माना किया है।
समय पर सूचना न देने पर परिवहन आयुक्त कार्यालय चंडीगढ़ के अधीक्षक पर आठ हजार जुर्माना
आरटीआई के तहत निर्धारित समय पर नहीं दी सूचना