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अलीकां पैक्स घोटाला मामला
Updated Fri, 09 Mar 2018 01:52 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
ओढां (सिरसा)।
अलीकां पैक्स में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले मामले में जांच कार्रवाई के बाद सहायक रजिस्ट्रार सहकारी समितियां डबवाली ने आठ लोगों पर मुकदमा दर्ज करवाया है। इस मामले में सोमवार को सहायक रजिस्ट्रार एसएन वर्मा ने उप-रजिस्ट्रार हिसार को पत्र भेजकर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने की अनुमति मांगी थी। इस घोटाले को अमर उजाला ने 24 नवंबर को उजागर किया था, जिसके बाद कार्रवाई शुरू हुई।
इस चर्चित घोटाले में जांच अधिकारी आशीष बिशभनोई ने 13 लोगों को आरोपी बनाया था, जिसमें से तत्कालीन पैक्स प्रबंधक एवं मुख्य आरोपी सुभाष चंद, शाखा प्रबंधक देवेंद्र पारिक, मोहन लाल, बीरबल राम, राजेंद्र कड़वासरा, सतपाल सिंगला, सुभाष भांभू और धर्मवीर साहू के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया है। हालांकि जांच अधिकारी ने तत्कालीन विकास अधिकारी सुरेंद्र भादू, श्रीराम, रमेश जमालिया, आत्मा राम और रायसिंह को भी आरोपी बनाते हुए अपनी रिपोर्ट सहायक रजिस्ट्रार सहकारी समितियां डबवाली को सौंपी थी, लेकिन सहायक रजिस्ट्रार एसएन वर्मा ने नियमों को ताक पर रखकर उक्त पांचों विकास अधिकारियों को क्लीन चिट्ट दे डाली। जांच अधिकारी द्वारा पांच विकास अधिकारियों सहित 13 लोगों पर आरोप तय कर कार्रवाई करने के लिए लिखा था, जिसके बाद सहायक रजिस्ट्रार ने जांच अधिकारी की रिपोर्ट को तो सही मानते हुए शिकायतकर्ता किसान सुखदेव सिंह को इस बात की संतुष्टि करवाई थी कि सभी आरोपियों पर समान रूप से कार्रवाई की जाएगी। ये जांच रिपोर्ट सीएम विंडो पर 24 नवंबर को रिप्लाई के रूप में अपलोड कर दी गई, लेकिन आरोप है कि चार दिन बाद 28 नवंबर को सहायक रजिस्ट्रार ने जांच अधिकारी की रिपोर्ट में फेरबदल करते हुए विकास अधिकारियों से सांठ-गांठ कर उन्हें आरोप मुक्त कर दिया। इस मामले में शिकायतकर्ता मौजगढ़ निवासी सुखदेव सिंह ने इस कार्रवाई पर असंतुष्टि जाहिर करते हुए सहायक रजिस्ट्रार के खिलाफ सीएम विंडो पर पुन: शिकायत की।
किसके समय कितना हुआ गबन
मुख्य आरोपी सुभाष चंद के कार्यकाल में एक करोड़ 14 लाख 50 हजार 383 रुपये का गबन हुआ है। सुभाष चंद 9 नवंबर 2012 से 27 जून 2017 तक पैक्स प्रबंधक रहा। इसके अतिरिक्त 23 जुलाई 2014 से 29 नवंबर 2015 तक जूनियर अकाउंटेंट रहे देवेंद्र पारिक के कार्यकाल में 31 लाख 29 हजार का गबन हुआ, 30 नवंबर 2015 से 18 दिसंबर तक सुभाष भांभू के कार्यकाल में 9 लाख 50 हजार, क्लर्क धर्मवीर साहु के एक अप्रैल 2014 से 30 जून तक के कार्यकाल में एक लाख रुपये का गबन, जूनियर अकाउंटेंट सतपाल सिंगला के 18 जून 2013 से एक मार्च 2014 तक एक लाख 70 हजार का गबन, सीनियर अकाउंटेंट राजेंद्र कड़वासरा के 22 दिसंबर 2012 से 8 जून 2013 तक के कार्यकाल में 7 लाख 50 हजार रुपये, जूनियर अकाउंटेंट बीरबल राम के चार जून 2014 से 23 जुलाई तक के कार्यकाल में 70 हजार रुपये का गबन हुआ, जिसके बाद देवेंद्र पारिक के पुन: संभाले गए कार्यभार के तहत 18 दिसंबर 2015 से 10 जनवरी 2017 तक 58 लाख 82 हजार 383 रुपये का गबन हुआ। वहीं, बीरबल राम के भी 10 जनवरी 2017 से 22 जून तक पुन: संभाले कार्यभार में 4 लाख 99 हजार रुपये का गबन हुआ।
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मुझे फंसाया गया
मुख्य आरोपी सुभाष चंद ने उप-रजिस्ट्रार हिसार के यहां अपील की है। उसने कहा है कि इस घोटाले में उसे अकेेले को बली का बकरा बनाया गया है, जबकि जांच रिपोर्ट के अनुसार उसके स्वयं सहित 13 आरोपी हैं। बता दें कि उक्त आरोपी ने जांच अधिकारी आशीष बिशभनोई को दिए बयानों में बताया है कि वह पिछले करीब 6 वर्षाें से अस्वस्थ चल रहा है। ऐसे मेें वह शाखा प्रबंधक से पेंसिल से राशि का जोड़ लगवाता था और विश्वास के चलते वह उसे पक्का कर देता था। मुख्य आरोपी के अनुसार आरोपी उससे समय-समय पर पैसे ले जाते रहे।
बॉक्स
इस घोटाले में उच्चाधिकारियों के आदेश पर 8 लोगों पर मुकदमा दर्ज करवाया गया है। आरोपियों को 15-15 दिन के दो बार रिकवरी नोटिस दिए गए थे, जिनमें एक आरोपी मोहन लाल ने जवाब दिया था जो असंतुष्टिजनक था।
-एसएन वर्मा, सहायक रजिस्ट्रार डबवाली।
बॉक्स
हमारे पास कोई लिखित कार्रवाई नहीं आई है। जो भी कार्रवाई हुई है वो सहायक रजिस्ट्रार डबवाली की ओर से ही हुई है। हमने अपने स्तर पर टीम जांच के लिए लगा रखी है। जांच अंतिम चरण में है।
-सुरेंद्र भादू, जीएम (सीबी सिरसा)।
पुलिस ने एसएन वर्मा की शिकायत पर आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। रिकॉर्ड कब्जे में लेकर जांच की जाएगी। जिसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
-हवा सिंह, एसएचओ शहर डवबाली।
ओढां (सिरसा)।
अलीकां पैक्स में हुए करोड़ों रुपये के घोटाले मामले में जांच कार्रवाई के बाद सहायक रजिस्ट्रार सहकारी समितियां डबवाली ने आठ लोगों पर मुकदमा दर्ज करवाया है। इस मामले में सोमवार को सहायक रजिस्ट्रार एसएन वर्मा ने उप-रजिस्ट्रार हिसार को पत्र भेजकर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने की अनुमति मांगी थी। इस घोटाले को अमर उजाला ने 24 नवंबर को उजागर किया था, जिसके बाद कार्रवाई शुरू हुई।
इस चर्चित घोटाले में जांच अधिकारी आशीष बिशभनोई ने 13 लोगों को आरोपी बनाया था, जिसमें से तत्कालीन पैक्स प्रबंधक एवं मुख्य आरोपी सुभाष चंद, शाखा प्रबंधक देवेंद्र पारिक, मोहन लाल, बीरबल राम, राजेंद्र कड़वासरा, सतपाल सिंगला, सुभाष भांभू और धर्मवीर साहू के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया है। हालांकि जांच अधिकारी ने तत्कालीन विकास अधिकारी सुरेंद्र भादू, श्रीराम, रमेश जमालिया, आत्मा राम और रायसिंह को भी आरोपी बनाते हुए अपनी रिपोर्ट सहायक रजिस्ट्रार सहकारी समितियां डबवाली को सौंपी थी, लेकिन सहायक रजिस्ट्रार एसएन वर्मा ने नियमों को ताक पर रखकर उक्त पांचों विकास अधिकारियों को क्लीन चिट्ट दे डाली। जांच अधिकारी द्वारा पांच विकास अधिकारियों सहित 13 लोगों पर आरोप तय कर कार्रवाई करने के लिए लिखा था, जिसके बाद सहायक रजिस्ट्रार ने जांच अधिकारी की रिपोर्ट को तो सही मानते हुए शिकायतकर्ता किसान सुखदेव सिंह को इस बात की संतुष्टि करवाई थी कि सभी आरोपियों पर समान रूप से कार्रवाई की जाएगी। ये जांच रिपोर्ट सीएम विंडो पर 24 नवंबर को रिप्लाई के रूप में अपलोड कर दी गई, लेकिन आरोप है कि चार दिन बाद 28 नवंबर को सहायक रजिस्ट्रार ने जांच अधिकारी की रिपोर्ट में फेरबदल करते हुए विकास अधिकारियों से सांठ-गांठ कर उन्हें आरोप मुक्त कर दिया। इस मामले में शिकायतकर्ता मौजगढ़ निवासी सुखदेव सिंह ने इस कार्रवाई पर असंतुष्टि जाहिर करते हुए सहायक रजिस्ट्रार के खिलाफ सीएम विंडो पर पुन: शिकायत की।
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किसके समय कितना हुआ गबन
मुख्य आरोपी सुभाष चंद के कार्यकाल में एक करोड़ 14 लाख 50 हजार 383 रुपये का गबन हुआ है। सुभाष चंद 9 नवंबर 2012 से 27 जून 2017 तक पैक्स प्रबंधक रहा। इसके अतिरिक्त 23 जुलाई 2014 से 29 नवंबर 2015 तक जूनियर अकाउंटेंट रहे देवेंद्र पारिक के कार्यकाल में 31 लाख 29 हजार का गबन हुआ, 30 नवंबर 2015 से 18 दिसंबर तक सुभाष भांभू के कार्यकाल में 9 लाख 50 हजार, क्लर्क धर्मवीर साहु के एक अप्रैल 2014 से 30 जून तक के कार्यकाल में एक लाख रुपये का गबन, जूनियर अकाउंटेंट सतपाल सिंगला के 18 जून 2013 से एक मार्च 2014 तक एक लाख 70 हजार का गबन, सीनियर अकाउंटेंट राजेंद्र कड़वासरा के 22 दिसंबर 2012 से 8 जून 2013 तक के कार्यकाल में 7 लाख 50 हजार रुपये, जूनियर अकाउंटेंट बीरबल राम के चार जून 2014 से 23 जुलाई तक के कार्यकाल में 70 हजार रुपये का गबन हुआ, जिसके बाद देवेंद्र पारिक के पुन: संभाले गए कार्यभार के तहत 18 दिसंबर 2015 से 10 जनवरी 2017 तक 58 लाख 82 हजार 383 रुपये का गबन हुआ। वहीं, बीरबल राम के भी 10 जनवरी 2017 से 22 जून तक पुन: संभाले कार्यभार में 4 लाख 99 हजार रुपये का गबन हुआ।
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मुख्य आरोपी सुभाष चंद ने उप-रजिस्ट्रार हिसार के यहां अपील की है। उसने कहा है कि इस घोटाले में उसे अकेेले को बली का बकरा बनाया गया है, जबकि जांच रिपोर्ट के अनुसार उसके स्वयं सहित 13 आरोपी हैं। बता दें कि उक्त आरोपी ने जांच अधिकारी आशीष बिशभनोई को दिए बयानों में बताया है कि वह पिछले करीब 6 वर्षाें से अस्वस्थ चल रहा है। ऐसे मेें वह शाखा प्रबंधक से पेंसिल से राशि का जोड़ लगवाता था और विश्वास के चलते वह उसे पक्का कर देता था। मुख्य आरोपी के अनुसार आरोपी उससे समय-समय पर पैसे ले जाते रहे।
बॉक्स
इस घोटाले में उच्चाधिकारियों के आदेश पर 8 लोगों पर मुकदमा दर्ज करवाया गया है। आरोपियों को 15-15 दिन के दो बार रिकवरी नोटिस दिए गए थे, जिनमें एक आरोपी मोहन लाल ने जवाब दिया था जो असंतुष्टिजनक था।
-एसएन वर्मा, सहायक रजिस्ट्रार डबवाली।
बॉक्स
हमारे पास कोई लिखित कार्रवाई नहीं आई है। जो भी कार्रवाई हुई है वो सहायक रजिस्ट्रार डबवाली की ओर से ही हुई है। हमने अपने स्तर पर टीम जांच के लिए लगा रखी है। जांच अंतिम चरण में है।
-सुरेंद्र भादू, जीएम (सीबी सिरसा)।
पुलिस ने एसएन वर्मा की शिकायत पर आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। रिकॉर्ड कब्जे में लेकर जांच की जाएगी। जिसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
-हवा सिंह, एसएचओ शहर डवबाली।