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Sirsa News: तोरण द्वार और बस क्यू शेल्टर बनाने के मामले में कांग्रेसी नेताओं ने अधिकारियों पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप, सीएम को सौंपेंगे दस्तावेज

Fri, 05 Apr 2024 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा Updated Fri, 05 Apr 2024 11:31 PM IST
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Congress leaders accuse officials of corruption in the matter of building archway and bus queue shelter, will hand over documents to CM
शहर में बस स्टैंड के पास बना तोरण द्वार।
सिरसा। शहर के 20 तोरण द्वार और 20 बस क्यू शेल्टर बनाने का टेंडर एजेंसी को नियमों के खिलाफ दिए जाने का मुद्दा गरमा गया है। जहां प्रशासनिक तौर पर यह मामला चर्चाओं में है, वहीं इसने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। इस मामले में कांग्रेस नेता वेद भाट सोमवार को भ्रष्टाचार के दस्तावेज सहित मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को शिकायत करेंगे।
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बता दें कि अमर उजाला से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद शुक्रवार को कांग्रेसी नेताओं ने इस मामले में अपना मोर्चा खोला। कांग्रेसी नेता वेद भाट ने कहा कि यदि उनका टेंडर में भ्रष्टाचार का दावा गलत पाया जाता है तो प्रशासन उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा सकता है। टेंडर का विरोध के स्वर उठाने के बाद वीरवार रात से ही अधिकारियों व कई अन्य लोगों द्वारा विरोध करने वालों को मनाने की कवायद शुरू हो गई है। एक अधिकारी फ्लेक्स प्रिंटर और कांग्रेसी नेता से संपर्क साधकर उन्हें मनाते भी नजर आए। इतना ही नहीं, इस मामले में चौंकाने वाली बात सामने आई है कि टेंडर में तीन अधिकारियों की कमेटी बनाई गई थी। एक अधिकारी ने टेंडर प्रक्रिया से अंसतोष जाहिर किया था, लेकिन दो उच्चाधिकारियों ने अपनी पॉवर का प्रयोग करते हुए टेंडर को खोलकर एजेंसी को दे दिया। वहीं नगर परिषद में चर्चाएं हैं कि दो अधिकारी सिर्फ अपनी मनमानी कर रहे हैं। ऐसे में भ्रष्टाचार की परतें जल्द ही खुलकर सामने आएंगी।
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गबन मामले में नहीं हुई कार्रवाई
कांग्रेसी नेता ने नगर परिषद के अधिकारी के खिलाफ 2016 के मामले में कार्रवाई के आदेश सार्वजनिक किए हैं। वेद भाट ने कहा कि यह आदेश तीसरे माह में जारी हुए थे और उसमें मुख्यालय ने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए थे, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इतना ही नहीं, इस मामले में भी स्ट्रीट लाइटों को लेकर तत्कालीन ईओ ने भ्रष्टाचार किया था।
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विज्ञापन पॉलिसी का यह है नियम
मुख्य सड़कों को लेकर हाईकोर्ट के जज ने प्रदेश भर में विज्ञापन पॉलिसी तैयार की थी। इस पॉलिसी के तहत जारी की गई गाइड लाइन में साफ लिखा हुआ है कि ऐसा कोई विज्ञापन मुख्य रोड पर नहीं लगाया जाएगा, जिसको देखने के चक्कर में वाहन चालक का ध्यान भटकता है। इस दौरान यदि कोई हादसा होता है तो यूनिपोल लगाने वाले विभाग और विज्ञापन वाली कंपनी दोनों के खिलाफ पुलिस मामला दर्ज कर सकती है। ऐसे में नगर परिषद ने 20 द्वार विज्ञापन के लिए कैसे दे दिए। जो सीधे तौर पर विज्ञापन पॉलिसी का उल्लंघन है।
तोरण द्वार बनाकर नहीं लगाए जा सकते विज्ञापन
विज्ञापन पॉलिसी के नियमानुसार तोरण द्वार बनाकर विज्ञापन नहीं लगाए जा सकते। शहरी स्थानीय निकाय विभाग की विज्ञापन पॉलिसी में यह साफतौर पर लिखा हुआ है। हैरानी की बात है कि मौजूदा समय में भी बस स्टैंड व कई अन्य जगहों पर तोरण द्वार बनाकर विज्ञापन प्रकाशित किए जा रहे हैं। जो सीधे सीधे विभाग की पॉलिसी के खिलाफ है।



नए टेंडर से नगर परिषद को लाभ ही होगा। पहले ही 32 साइटाें का टेंडर न होने से विभाग को डेढ़ करोड़ के आसपास का नुकसान हुआ है। -सुरेंद्र बैनीवाल, जिला नगर आयुक्त।
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