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इनके लिए कैसा बाल दिवस

Sun, 15 Nov 2015 02:10 AM IST
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो Updated Sun, 15 Nov 2015 02:10 AM IST
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Children Day

सरकार गरीबों के हित में भले कितनी ही योजना बना लें, लेकिन योजना महज कागजों व फाइलों तक ही सिमटकर रह जाती हैं। अगर गरीबी की दलदल में मासूमों का भविष्य धूमिल हो रहा हो तो मामला और भी गंभीर बन जाता है।

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ऐसे बच्चों के लिए क्या दिवाली और क्या बालदिवस। ऐसा नजारा आजकल क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, जब देश 14 नवंबर को बाल दिवस के रूप में मनाकर उन्हें सम्मान देने की बात कर रहा है तो दूसरी तरफ कई मासूम ऐसे हैं जो कूड़े के ढेरों में ही अपना भविष्य तलाश कर रहे हैं।
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परिस्थिति अनुसार इसे गरीबी की मार कहें या देश का दुर्भाग्य कि जिन बच्चों के हाथों में किताब होनी चाहिए, वे हाथ या तो कूड़ा बीनने व पत्थर तोड़ने पर मजबूर हैं या फिर ठंड में चाय की दुकानों पर बर्तन साफ कर रहे हैं और ऐसा जीवन कई बच्चों का है, जो सीधा बुढ़ापे में पहुंच जाता है, क्योंकि इनकी जवानी बेरोजगारी और कचरे के ढेर में रोटी तलाशने में गुजर जाती है।
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वहीं आज शनिवार को पूरा देश इन्हीं मासूम बच्चों के प्रिय व देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिवस बाल दिवस के रूप में धूमधाम से मनाने जा रहा है।

इसके अलावा सरकार और विभिन्न समाजसेवी संस्थाएं इसके आयोजन को लेकर लाखों-करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही हैं। दूसरी तरफ भारत के स्वतंत्र होने के इतने वर्ष बाद भी देश में असहाय व आर्थिक हालत से मजबूर बच्चे सिसकते रहते हैं।

अगर उप तहसील गोरीवाला क्षेत्र की बात करें तो अनेक बच्चे अल सुबह ही कूड़ा बीनने निकल पड़ते हैं और करीब दो दर्जन बच्चे तो दिनभर सड़कों पर कूड़े के ढेर में ही मस्त नहीं रहते हैं, बल्कि दो समय की रोटी की भी व्यवस्था करते हैं।

गौरतलब है कि गत कुछ माह पहले प्रशासन की ओर से कई जगहों व प्रतिष्ठानों से ऐसे बाल मजदूरों को मुक्त भी करवाया जा चुका है, लेकिन दोषियों के खिलाफ कार्रवाई महज कार्यालयों की चार दिवारी तक ही सिमट कर रह गई थी और जिन इन बच्चों के हाथ में कलम व किताब होनी चाहिए थी उनके हाथों में कूड़े के थैले हैं या फिर झूठे बर्तन देखे जा सकते हैं।


वहीं कुछ वर्ष पहले उच्च न्यायालय ने बाल मजदूरी करवाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए थे, बावजूद इसके क्षेत्र में आदेशों की अवहेलना हो रही है।

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