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शहर में 3 हजार बेसहारा पशु बन रहे हादसों का सबब, डीसी ने कमेटी बनाई, पकड़ने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 24 Aug 2021 12:05 AM IST
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Cause of accidents becoming 3 thousand destitute animals in the city, DC formed committee, instructed to run campaign to catch
शहर में एकत्र आवारा पशु। - फोटो : Sirsa
सिरसा। शहर में 3 हजार से ज्यादा बेसहारा पशु हादसों का कारण बन रहे हैं। लेकिन प्रशासन बेबस है और पशु पकड़ो अभियान कमजोर हो गया है। अब डीसी ने एक बार फिर नगर परिषद अधिकारियों को सख्त आदेश देकर अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए 3-3 अधिकारियों पर आधारित कमेटी का गठन कर दिया गया है। दूसरी समस्या नगर परिषद के पास हाइड्रोलिक ट्रॉली नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि बिना साधनों के अभियान कैसे चलेगा।
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सिटी को स्ट्रे कैटल फ्री बनाने के लिए सीएम के आदेश हैं। बेसहारा पशुओं को शहर से निकालकर रखने के लिए दो नंदीशाला भी बनाई गई हैं। केलनियां स्थित नंदीशाला में पशुओं को रखने के लिए जगह है लेकिन इसके संचालन को लेकर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। शहर में इस समय 3 हजार से ज्यादा बेसहारा पशु सड़कों पर विचरण करते हैं। रात्रि के समय वे कई बार दिखाई नहीं देते और हादसे का कारण बनते हैं।
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जिला प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे पशु पकड़ो अभियान पर ब्रेक लग गया है क्योंकि नगर परिषद के पास जहां एक ओर कर्मचारियों की कमी है वहीं दूसरी ओर संसाधनों की भी उपलब्धता नहीं है। पशु पकड़ो अभियान में सबसे जरूरी संसाधन हाइड्रोलिक ट्रॉली ही नगर परिषद के पास नहीं है। नप के पास ट्रॉली खरीदने के लिए बजट नहीं है। शहर के वार्ड 15 स्थित आर्य समाज रोड, रोड़ी बाजार, सदर बाजार, गीता भवन वाली गली के अलावा अन्य हिस्से बेगू रोड, हुडा सेक्टर, ए,बी,सी,डी, ई और एफ-ब्लॉक, रानियां रोड, हिसार रोड, कंगनपुर रोड, चतरगढ़पट्टी, बरनाला रोड, नोहरिया बाजार, गोशाला रोड, रानियां रोड, सिविल अस्पताल रोड, गांधी कॉलोनी आदि एरिया में भी बेसहारा पशुओं की भरमार है। वार्ड 15 के पार्षद विकास जैन ने तो सीएम विंडो में भी बेसहारा पशुओं को लेकर कई शिकायतें लगाई हैं। पर उनका समाधान नहीं किया जा रहा।
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तीन अधिकारियों की कमेटी गठित
डीसी अनीश यादव ने शहरवासियों को बेसहारा पशुओं से मुक्ति दिलाने के लिए अधिकारियों को अभियान चलाने के सख्त आदेश दिए हैं। डीसी ने 17 अगस्त को अधिकारियों की मीटिंग ली थी। इस अभियान के लिए डीसी ने एक कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी, पुलिस लाइन के उपनिरीक्षक और पशुपालन विभाग से डीडी को शामिल किया है। कमेटी में शामिल अधिकारी अभियान की मॉनीटरिंग करेंगे। इस आदेश के बाद नगर परिषद अधिकारियों ने पशु पकड़ो अभियान चलाने के लिए रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है।
खेतों को नुकसान पहुंचाते हैं पशु
केलनियां के सरपंच सुभाष कुमार गांव के मौजिज लोगों को साथ लेकर नगर परिषद अधिकारियों से मिले। उन्होंने कहा कि नगर परिषद की ओर से पशु पकड़ो अभियान चलाया जाता है। इस दौरान पशुुओं को पैदल नंदीशाला तक ले जाते हैं। लेकिन रास्ते में कई पशु भाग जाते हैं और खेतों में घुस जाते हैं। इतना ही नहीं ये पशु वाहन चालकों की दुर्घटनाओं का भी कारण बनते हैं। सरपंच ने कहा कि नंदीशाला शुरू करते समय अधिकारियों ने वायदा किया था कि गांव के बेसहारा पशु भी इसमें लिए जाएंगे लेकिन अब वे इससे इनकार करते हैं। जबकि ग्रामीण ना केवल उन पशुओं के लिए चारे, तूड़ी, रोटी का का भी प्रबंध करके सहयोग करते हैं। बल्कि दान स्वरूप आर्थिक सहयोग भी करते हैं। सरपंच सुभाष कुमार ने कहा कि अब अधिकारियों ने समस्या के समाधान के आश्वासन दिया है।
आरोप- सुनवाई नहीं कर रहे अधिकारी
मेरे वार्ड में आवारा पशुओं की समस्या सबसे ज्यादा है। आर्य समाज रोड पर स्थित कूड़ा घर के आसपास रात्रि के समय कम से कम 200 पशु एकत्र होते हैं। इनके डर से लोग भी कूड़ा बाहर ही फेंक जाते हैं। मैंने अधिकारियों को कई बार समस्या से अवगत करवाया है और सीएम विंडो में भी शिकायत दी है। मैने गुजारिश की थी कि कम से कम एक स्ट्रीट लाइट ही लगवा दो ताकि रोशनी हो जाए। लेकिन कोई भी अधिकारी समस्या के समाधान के लिए सुनवाई और सहयोग नहीं कर रहा।
विकास जैन, पार्षद, वार्ड 15
बेसहारा पशुओं के कारण तीन साल में हो चुके 50 से ज्यादा हादसे
बेसहारा पशु हादसों का कारण बनते हैं। पुलिस रिकार्ड में ये हादसे दर्ज भी हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन साल के दौरान 50 से ज्यादा हादसे हो चुके हैं। इन हादसों में करीब 20 लोगों की मौत हो चुकी है। ये हादसे ज्यादातर सर्दियों के मौसम में होते हैं। क्योंकि धुंध और रात में अंधेरे के कारण सड़क पर घूमते पशु नजर नहीं आते।

यहां-यहां हो चुके हादसे
- राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित गांव भावदीन के पास बेसहारा पशुओं के कारण फरवरी के पहले हफ्ते में हादसा हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
- जून माह में गांव मोरीवाला के पास भी दो पशु आपस में लड़ रहे थे, इनकी चपेट में आने से हादसा हुआ।
- डबवाली रोड स्थित साहुवाला के पास भी बेसहारा पशु के कारण वाहन चालक मार्च में हादसे का शिकार हुए।
- अभियान के दौरान पशुुओं को नंदीशाला में लेकर जा रहे थे कर्मचारी, केलनियां रोड पर रास्ते में पशु भागे और एक बाइक सवार उनकी चपेट में आकर घायल हो गया।
- नोहरिया बाजार में भी करीब 6 माह पहले पशु आपस में लड़े, जिस कारण साइकिल सवार राहगीर घायल हो गया था।
शहर को बेसहारा पशुओं से मुक्ति के लिए डीसी साहब की ओर से आदेश आए हैं। तीन अधिकारियों की कमेटी का गठन किया गया है। जल्द ही मीटिंग करके प्लानिंग बनाएंगे और अभियान शुरू करेंगे। यदि हाइड्रोलिक ट्रॉली जैसी कोई समस्या है तो इसके समाधान के लिए टेंडर जारी करेंगे।
- संदीप मलिक, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, सिरसा।

शहर में एकत्र आवारा पशु।

शहर में एकत्र आवारा पशु।- फोटो : Sirsa

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