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धान उत्पादक किसानों के हित में उचित कदम उठाए भाजपा सरकार : कुमारी सैलजा
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सिरसा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव व सांसद कुमारी सैलजा ने बयान जारी करते हुए कहा कि इस बार बाढ़ और बरसात से सबसे ज्यादा नुकसान फसलों खासकर धान की फसल को हुआ, जिसका उचित मुआवजा देने में बीमा कंपनी भी हाथ खड़ा कर रही है। इस बार दाना भी छोटा है और काला भी पड़ गया है, साथ ही पिछले वर्ष की तुलना में इस बार झाड़ भी कम है।
ऐसे में भाजपा सरकार को धान उत्पादक किसानों के हित में उचित कदम उठाना चाहिए। सांसद ने कहा है कि हरियाणा में धान की खेती मुख्य रूप से करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, अंबाला, यमुनानगर, पानीपत, सिरसा और सोनीपत जैसे जिलों में की जाती है। इनमें से करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र, और जींद को धान का कटोरा कहा जाता है।
खासकर करनाल को बासमती चावल के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। करनाल जो बासमती चावल के उत्पादन के लिए बहुत प्रसिद्ध है। कुरुक्षेत्र धान उत्पादन में अग्रणी जिलों में से एक है। कैथल जिला भी धान का कटोरा कहलाता है और चावल उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। अंबाला धान की खेती के लिए यह एक महत्वपूर्ण बेल्ट क्षेत्र है।
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यमुनानगर जिले में भी बड़े पैमाने पर धान की खेती होती है। सिरसा में भी धान की खेती बड़े स्तर पर की जाती है, खासकर धान की सीधी बुवाई की तकनीक पर भी जोर दिया जा रहा है। सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि इस बार मानसून की मार से किसान पीड़ित हैं। खेतों में पानी भरने और अधिक दिनों तक भरा रहने के चलते धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है।
एक ओर जहां दाना छोटा है, वहीं काला भी पड़ गया है। पूसा बासमती 1509 की कीमत और उसकी पैदावार के लिए भी किसान बहुत परेशान हैं, इस बार लागत खर्च निकलने की भी संभावना नहीं दिख रही है। मंडी में इस बार धान की कीमत पिछले वर्ष की अपेक्षा कम है। कुछ जिलों में बीमा कंपनियां धान की फसल को हुए नुकसान का मुआवजा देने में आनाकानी कर रही है। ऐसे में सरकार को ही कोई उचित कदम उठाना चाहिए और पीड़ित किसानों की मदद के लिए अलग से मुआवजा की घोषणा करनी चाहिए।
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ऐसे में भाजपा सरकार को धान उत्पादक किसानों के हित में उचित कदम उठाना चाहिए। सांसद ने कहा है कि हरियाणा में धान की खेती मुख्य रूप से करनाल, कुरुक्षेत्र, कैथल, अंबाला, यमुनानगर, पानीपत, सिरसा और सोनीपत जैसे जिलों में की जाती है। इनमें से करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र, और जींद को धान का कटोरा कहा जाता है।
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खासकर करनाल को बासमती चावल के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। करनाल जो बासमती चावल के उत्पादन के लिए बहुत प्रसिद्ध है। कुरुक्षेत्र धान उत्पादन में अग्रणी जिलों में से एक है। कैथल जिला भी धान का कटोरा कहलाता है और चावल उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है। अंबाला धान की खेती के लिए यह एक महत्वपूर्ण बेल्ट क्षेत्र है।
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यमुनानगर जिले में भी बड़े पैमाने पर धान की खेती होती है। सिरसा में भी धान की खेती बड़े स्तर पर की जाती है, खासकर धान की सीधी बुवाई की तकनीक पर भी जोर दिया जा रहा है। सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि इस बार मानसून की मार से किसान पीड़ित हैं। खेतों में पानी भरने और अधिक दिनों तक भरा रहने के चलते धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है।
एक ओर जहां दाना छोटा है, वहीं काला भी पड़ गया है। पूसा बासमती 1509 की कीमत और उसकी पैदावार के लिए भी किसान बहुत परेशान हैं, इस बार लागत खर्च निकलने की भी संभावना नहीं दिख रही है। मंडी में इस बार धान की कीमत पिछले वर्ष की अपेक्षा कम है। कुछ जिलों में बीमा कंपनियां धान की फसल को हुए नुकसान का मुआवजा देने में आनाकानी कर रही है। ऐसे में सरकार को ही कोई उचित कदम उठाना चाहिए और पीड़ित किसानों की मदद के लिए अलग से मुआवजा की घोषणा करनी चाहिए।