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बीएड कॉलेजों में कर्मचारियों की संख्या होगी डबल
sirsa
Updated Thu, 29 May 2014 11:39 PM IST
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शिक्षा में गुणात्मक सुधार करने के मकसद से अब एजुकेशन कॉलेजों में शिक्षक व गैर शिक्षक कर्मचारियों की संख्या में इजाफा किया जाएगा। एनसीटीई (नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर एजुकेशन) की नई नीति के अनुसार बीएड कॉलेजों में सात विद्यार्थियों पर एक शिक्षक नियुक्त करना अनिवार्य कर दिया गया है।
इसी प्रकार एमएड में भी चार विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात के अनुसार एक शिक्षक की व्यवस्था संस्थान को करनी होगी। यह नीति सभी विश्वविद्यालयों में लागू होगी। इसके तहत सीडीएलयू के 27 शिक्षण संस्थान आएंगे। इसके अलावा बीएड में दाखिले के लिए सबजेक्ट वाइज सीटें भी निर्धारित की गई हैं।
बीएड के पांचों विषयों में समान अनुपात में सीटाें पर दाखिले किए जा सकेेंगे। 16 मई 2014 की एनसीटीआई द्वारा दी गई रिपोर्ट में इस बात के साफ संकेत हैं कि दो जून के बाद संस्थानों की राय जानने के बाद इसे लागू किया जा सकता है।
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जेसीडी कॉलेज ऑफ एजुकेशन के प्राचार्य डॉ. जय प्रकाश ने बताया कि एनसीटीई द्वारा निर्धारित की गई नई शर्तों के अनुसार अब हर कॉलेज में 20 प्रतिशत मैथ, 20 प्रतिशत साइंस, 20 प्रतिशत सामाजिक विज्ञान, 20 प्रतिशत अंग्रेजी भाषा व 20 प्रतिशत प्रथम भाषा की सीटों पर दाखिला किया जा सकेगा।
इससे पूर्व किसी भी कॉलेज में विषय अनुसार सीटों पर दाखिला नहीं होता था। उन्होंने बताया कि नई नीति के अनुसार बीएड में 100 विद्यार्थियों की यूनिट पर 15 तथा एमएड में 50 विद्यार्थियों की यूनिट पर 14 शिक्षकों की नियुक्ति करनी होगी।
जो शिक्षक पांच वर्षों से कॉलेज में पढ़ा रहा है हर पांच वर्ष के रोटेशन के आधार पर उसे प्राचार्य का पद भी संस्थान को देना होगा। इसके अलावा एक शारीरिक शिक्षक, एक म्यूजिक शिक्षक, फाइन आर्ट शिक्षक, एक फिलोशिपी का शिक्षक, एक मनोविज्ञान का शिक्षक, एक लाइब्रेरियन, एक मैनेजर, एक ऑफिस असिस्टेंट, एक तकनीकी असीस्टेंट, एक स्टोर कीपर व दो अटेंडेंट के पद पर स्टाफ भी रखना अनिवार्य होगा।
इससे नीति के अनुसार अब सभी कॉलेजों में शिक्षक व गैर शिक्षक कर्मियों की संख्या पहले की अपेक्षा लगभग दो गुणी हो जाएगी। सीडीएलयू के 27 बीएड कॉलेजों में सैकड़ों की संख्या में भर्ती होगी, जिससे बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। इसी प्रकार प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों में बीएड में शिक्षक व गैर शिक्षकों की संख्या एनसीटीई के अनुसार बढ़ानी होगी।
इस मामले में सभी विश्वविद्यालय व कॉलेज दो जून तक अपनी राय एनसीटीई को दे सकता है। एनसीटीई ने यह नीति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर गठित की गई कमेटी की सिफारिश के आधार पर लागू करने का निर्णय है।
यह थी स्थिति और अब क्या होगी
बीएड में 100 सीटों पर सात शिक्षक होते थे और अब इतने ही विद्यार्थियों पर 15 शिक्षक अनिवार्य किए गए हैं। इसी प्रकार पहले एमएड की एक यूनिट में चार शिक्षक होते और अब 50 विद्यार्थियों की यूनिट पर 14 शिक्षक नियुक्त होंगे। इसी प्रकार पहले किसी भी बीएड कॉलेज में प्रबंध का पद नहीं था पर प्रबंध का पद अनिवार्य कर दिया गया है। गैर शिक्षकों कर्मियों की संख्या में भी काफी बढ़ोतरी होगी।
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इसी प्रकार एमएड में भी चार विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात के अनुसार एक शिक्षक की व्यवस्था संस्थान को करनी होगी। यह नीति सभी विश्वविद्यालयों में लागू होगी। इसके तहत सीडीएलयू के 27 शिक्षण संस्थान आएंगे। इसके अलावा बीएड में दाखिले के लिए सबजेक्ट वाइज सीटें भी निर्धारित की गई हैं।
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बीएड के पांचों विषयों में समान अनुपात में सीटाें पर दाखिले किए जा सकेेंगे। 16 मई 2014 की एनसीटीआई द्वारा दी गई रिपोर्ट में इस बात के साफ संकेत हैं कि दो जून के बाद संस्थानों की राय जानने के बाद इसे लागू किया जा सकता है।
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जेसीडी कॉलेज ऑफ एजुकेशन के प्राचार्य डॉ. जय प्रकाश ने बताया कि एनसीटीई द्वारा निर्धारित की गई नई शर्तों के अनुसार अब हर कॉलेज में 20 प्रतिशत मैथ, 20 प्रतिशत साइंस, 20 प्रतिशत सामाजिक विज्ञान, 20 प्रतिशत अंग्रेजी भाषा व 20 प्रतिशत प्रथम भाषा की सीटों पर दाखिला किया जा सकेगा।
इससे पूर्व किसी भी कॉलेज में विषय अनुसार सीटों पर दाखिला नहीं होता था। उन्होंने बताया कि नई नीति के अनुसार बीएड में 100 विद्यार्थियों की यूनिट पर 15 तथा एमएड में 50 विद्यार्थियों की यूनिट पर 14 शिक्षकों की नियुक्ति करनी होगी।
जो शिक्षक पांच वर्षों से कॉलेज में पढ़ा रहा है हर पांच वर्ष के रोटेशन के आधार पर उसे प्राचार्य का पद भी संस्थान को देना होगा। इसके अलावा एक शारीरिक शिक्षक, एक म्यूजिक शिक्षक, फाइन आर्ट शिक्षक, एक फिलोशिपी का शिक्षक, एक मनोविज्ञान का शिक्षक, एक लाइब्रेरियन, एक मैनेजर, एक ऑफिस असिस्टेंट, एक तकनीकी असीस्टेंट, एक स्टोर कीपर व दो अटेंडेंट के पद पर स्टाफ भी रखना अनिवार्य होगा।
इससे नीति के अनुसार अब सभी कॉलेजों में शिक्षक व गैर शिक्षक कर्मियों की संख्या पहले की अपेक्षा लगभग दो गुणी हो जाएगी। सीडीएलयू के 27 बीएड कॉलेजों में सैकड़ों की संख्या में भर्ती होगी, जिससे बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। इसी प्रकार प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों में बीएड में शिक्षक व गैर शिक्षकों की संख्या एनसीटीई के अनुसार बढ़ानी होगी।
इस मामले में सभी विश्वविद्यालय व कॉलेज दो जून तक अपनी राय एनसीटीई को दे सकता है। एनसीटीई ने यह नीति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर गठित की गई कमेटी की सिफारिश के आधार पर लागू करने का निर्णय है।
यह थी स्थिति और अब क्या होगी
बीएड में 100 सीटों पर सात शिक्षक होते थे और अब इतने ही विद्यार्थियों पर 15 शिक्षक अनिवार्य किए गए हैं। इसी प्रकार पहले एमएड की एक यूनिट में चार शिक्षक होते और अब 50 विद्यार्थियों की यूनिट पर 14 शिक्षक नियुक्त होंगे। इसी प्रकार पहले किसी भी बीएड कॉलेज में प्रबंध का पद नहीं था पर प्रबंध का पद अनिवार्य कर दिया गया है। गैर शिक्षकों कर्मियों की संख्या में भी काफी बढ़ोतरी होगी।