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मीठी वाणी से मन भी शीतल, दूसरे भी सुखी : स्वामी रामाचार्य
Mon, 31 Aug 2026 11:15 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 31 Aug 2026 11:15 PM IST
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डबवाली। आचार्य स्वामी रामाचार्य । संवाद
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बिश्नोई धर्मशाला में श्री जाम्भाणी हरिकथा समारोह का तीसर दिन
फोटो-- 16
संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। बिश्नोई धर्मशाला में श्री गुरु जम्भेश्वर महाराज के 576वें अवतार दिवस पर श्री जाम्भाणी हरि कथा समारोह का सोमवार तीसरा दिन था। इस दिन श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। कथा का शुभारंभ आचार्य स्वामी रामाचार्य ने श्री-श्री मन नारायण संकीर्तन के साथ किया।
कथा में आचार्य स्वामी रामाचार्य और अन्य संतों का सभा कमेटी ने तिलक लगाकर स्वागत किया। स्वामी रामाचार्य ने श्रद्धालुओं को शिक्षाप्रद प्रसंग सुनाए। उन्होंने जाम्भाणी सूक्ति का भावार्थ समझाया। स्वामी रामाचार्य ने कहा कि व्यक्ति को पहले स्वयं अच्छे मार्ग पर चलना चाहिए।
इसके बाद ही दूसरों को उस मार्ग पर चलने की सीख देनी चाहिए। मनुष्य को सदैव मधुर वाणी बोलनी चाहिए। मीठे शब्द सामने वाले को सुख और शांति देते हैं। वे स्वयं के मन को भी प्रसन्न रखते हैं।
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भजनों और सम्मान का आयोजन
स्वामी रामाचार्य ने मीठो-मीठो बोल भैया भजन प्रस्तुत किया। इस पर संगत आनंदित होकर झूम उठी। श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान के जन्मोत्सव की खुशी में आव-आव म्हारा कृष्ण कन्हैया भजन भी गाया गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति में सराबोर होकर भजनों का आनंद लिया।
सामाजिक योगदान और सम्मान
समारोह में रामस्नेही द्वारा बिश्नोई धर्मशाला परिसर में बनवाए गए कमरे का उद्घाटन हुआ। कमरे के निर्माण की खुशी में संगत को केले का प्रसाद बांटा गया। सभा कमेटी ने रामस्नेही को स्मृति चिह्न और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। डॉ. सुरभि बिश्नोई के पदोन्नति पर उनके परिवार ने लड्डुओं का प्रसाद वितरित किया। डबवाली के मंदिरों और गोशालाओं के प्रधानों को भी सम्मानित किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा सुनी और श्री गुरु जम्भेश्वर महाराज के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।
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फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
डबवाली। बिश्नोई धर्मशाला में श्री गुरु जम्भेश्वर महाराज के 576वें अवतार दिवस पर श्री जाम्भाणी हरि कथा समारोह का सोमवार तीसरा दिन था। इस दिन श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। कथा का शुभारंभ आचार्य स्वामी रामाचार्य ने श्री-श्री मन नारायण संकीर्तन के साथ किया।
कथा में आचार्य स्वामी रामाचार्य और अन्य संतों का सभा कमेटी ने तिलक लगाकर स्वागत किया। स्वामी रामाचार्य ने श्रद्धालुओं को शिक्षाप्रद प्रसंग सुनाए। उन्होंने जाम्भाणी सूक्ति का भावार्थ समझाया। स्वामी रामाचार्य ने कहा कि व्यक्ति को पहले स्वयं अच्छे मार्ग पर चलना चाहिए।
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इसके बाद ही दूसरों को उस मार्ग पर चलने की सीख देनी चाहिए। मनुष्य को सदैव मधुर वाणी बोलनी चाहिए। मीठे शब्द सामने वाले को सुख और शांति देते हैं। वे स्वयं के मन को भी प्रसन्न रखते हैं।
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भजनों और सम्मान का आयोजन
स्वामी रामाचार्य ने मीठो-मीठो बोल भैया भजन प्रस्तुत किया। इस पर संगत आनंदित होकर झूम उठी। श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान के जन्मोत्सव की खुशी में आव-आव म्हारा कृष्ण कन्हैया भजन भी गाया गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति में सराबोर होकर भजनों का आनंद लिया।
सामाजिक योगदान और सम्मान
समारोह में रामस्नेही द्वारा बिश्नोई धर्मशाला परिसर में बनवाए गए कमरे का उद्घाटन हुआ। कमरे के निर्माण की खुशी में संगत को केले का प्रसाद बांटा गया। सभा कमेटी ने रामस्नेही को स्मृति चिह्न और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। डॉ. सुरभि बिश्नोई के पदोन्नति पर उनके परिवार ने लड्डुओं का प्रसाद वितरित किया। डबवाली के मंदिरों और गोशालाओं के प्रधानों को भी सम्मानित किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा सुनी और श्री गुरु जम्भेश्वर महाराज के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।