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Sirsa News: फसल चक्र न अपनाने का मिट्टी की गुणवत्ता पर पड़ रहा बुरा प्रभाव
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सिरसा। जिले में फसल चक्र का असर भूमि की उपजाऊ क्षमता पर दिख रहा है। किसान भले ही अपने खेतों की मिट्टी लाकर उसकी उपजाऊ क्षमता की जांच करवा रह हैं लेकिन उर्वरता में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है। किसानों को मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बनाए रखने के लिए फसल चक्र अपनाने की अपील कई वर्षों से कर रही है। चुनिंदा किसान ही इस पर ध्यान दे रहे हैं। 90 फीसदी किसानों रुटीन फसल चक्र को अपना रहे हैं। इससे भूमि की उपजाऊ क्षमता घट रही है।
मिट्टी जांच केंद्र सिरसा के आंकड़ों के मुताबिक मिट्टी की उपजाऊ क्षमता निरंतर घट रही है। मिट्टी में मैग्नीशियम, पोटैशियम, कार्बन, जिंक आदि की कमी मिल रही है। पानी की गुणवत्ता में भी बड़े स्तर पर गिरावट आई है। तीन वर्षों के आंकड़ों के मुताबिक पानी के 90 फीसदी नमूने फेल हुए हैं। इनका पानी कृषि भूमि में प्रयोग करने याेग्य नहीं पाया गया है। यह स्थिति जिले की सभी मिट्टी पानी जांच लैब में देखने को मिल रही है।
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पानी के सैंपल की स्थिति
वर्ष 2021
किसान सैंपल जांच लेकर आए - 2,164
पास हुए - 5 प्रतिशत
वर्ष 2022 -
किसान सैंपल लेकर आए - 2,919
पास हुए-- 10 प्रतिशत
वर्ष 2023
किसान सैंपल लेकर आए - 1,760
पास हुए - 7 प्रतिशत
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मिट्टी के सैंपल
वर्ष 2021 - 952
वर्ष 2022 - 914
वर्ष 2023 अबतक - 769
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यह है लैब
मुख्य लैब - सिरसा, डबवाली, ऐलनाबाद
मिनी लैब - रानिया, डिंग, कालांवाली
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यह है स्थिति
जिले से आने वाले नमूनों में सबसे ज्यादा फाॅस्फोरस और ऑर्गेनिक कार्बन की कमी मिल रही है। उसके अतिरिक्त जिंक, मैग्नीज, लौह कण आदि भी गुणवत्ता के अनुरूप नहीं हैं। इस कारण भूमि की उपजाऊ क्षमता निरंतर घट रही है।
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किसानों को किया जाता है जागरूक
विश्व मृदा दिवस पर जिले में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कृषि विभाग के साथ किसान विज्ञान केंद्र भी मृदा दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करता है और किसानों को खेतों में फसल चक्र अपनाने की सलाह दे रहा है।
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इन गांवों की भूमि ज्यादा प्रभावित
नटरा, भंभूर, बेगूं, बाजेकां, कोटली, शहीदावाली, सलारपुर, मोरीवाला, भावदीन, डबवाली, कालांवाली, रोडी और रानियां की पंजाब सीमा से लगती जमीनों में उपजाऊ क्षमता कम है क्योंकि वहां नियमित रूप से गेहूं और धान की बिजाई की जा रही है।
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किसानों को फसल चक्र अपनाना चाहिए। किसानों के लिए जरूरी है कि वह अपनी जमीन में फसलों का बदलाव करें। खेतों में गोबर की खाद और अन्य जैविक चीजें डालें। इससे उसकी उपजाऊ क्षमता बढ़े। जमीन को एक फसल काटने के बाद एक सप्ताह से दस दिन तक खाली छोड़ना जरूरी है। किसानों को जागरूक करने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। - डॉ. सुखदेव कंबोज, उप कृषि निदेशक
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हमारे पास नियमित रूप से किसान मिट्टी और पानी की जांच करवाने के लिए आते हैं। सभी किसानों को फसल चक्र के बारे में बताया जाता है ताकि किसान की भूमि की उपजाऊ क्षमता बनी रहे। हमारी ओर से डाटा तैयार कर सरकार को भेज दिया जाता है। इसके बाद सरकार अगला कदम उठाती है। - अनिल शर्मा, प्रभारी, मिट्टी-पानी गुणवत्ता लैब।
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मिट्टी जांच केंद्र सिरसा के आंकड़ों के मुताबिक मिट्टी की उपजाऊ क्षमता निरंतर घट रही है। मिट्टी में मैग्नीशियम, पोटैशियम, कार्बन, जिंक आदि की कमी मिल रही है। पानी की गुणवत्ता में भी बड़े स्तर पर गिरावट आई है। तीन वर्षों के आंकड़ों के मुताबिक पानी के 90 फीसदी नमूने फेल हुए हैं। इनका पानी कृषि भूमि में प्रयोग करने याेग्य नहीं पाया गया है। यह स्थिति जिले की सभी मिट्टी पानी जांच लैब में देखने को मिल रही है।
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पानी के सैंपल की स्थिति
वर्ष 2021
किसान सैंपल जांच लेकर आए - 2,164
पास हुए - 5 प्रतिशत
वर्ष 2022 -
किसान सैंपल लेकर आए - 2,919
पास हुए
वर्ष 2023
किसान सैंपल लेकर आए - 1,760
पास हुए - 7 प्रतिशत
मिट्टी के सैंपल
वर्ष 2021 - 952
वर्ष 2022 - 914
वर्ष 2023 अबतक - 769
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यह है लैब
मुख्य लैब - सिरसा, डबवाली, ऐलनाबाद
मिनी लैब - रानिया, डिंग, कालांवाली
यह है स्थिति
जिले से आने वाले नमूनों में सबसे ज्यादा फाॅस्फोरस और ऑर्गेनिक कार्बन की कमी मिल रही है। उसके अतिरिक्त जिंक, मैग्नीज, लौह कण आदि भी गुणवत्ता के अनुरूप नहीं हैं। इस कारण भूमि की उपजाऊ क्षमता निरंतर घट रही है।
किसानों को किया जाता है जागरूक
विश्व मृदा दिवस पर जिले में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कृषि विभाग के साथ किसान विज्ञान केंद्र भी मृदा दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करता है और किसानों को खेतों में फसल चक्र अपनाने की सलाह दे रहा है।
इन गांवों की भूमि ज्यादा प्रभावित
नटरा, भंभूर, बेगूं, बाजेकां, कोटली, शहीदावाली, सलारपुर, मोरीवाला, भावदीन, डबवाली, कालांवाली, रोडी और रानियां की पंजाब सीमा से लगती जमीनों में उपजाऊ क्षमता कम है क्योंकि वहां नियमित रूप से गेहूं और धान की बिजाई की जा रही है।
किसानों को फसल चक्र अपनाना चाहिए। किसानों के लिए जरूरी है कि वह अपनी जमीन में फसलों का बदलाव करें। खेतों में गोबर की खाद और अन्य जैविक चीजें डालें। इससे उसकी उपजाऊ क्षमता बढ़े। जमीन को एक फसल काटने के बाद एक सप्ताह से दस दिन तक खाली छोड़ना जरूरी है। किसानों को जागरूक करने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। - डॉ. सुखदेव कंबोज, उप कृषि निदेशक
हमारे पास नियमित रूप से किसान मिट्टी और पानी की जांच करवाने के लिए आते हैं। सभी किसानों को फसल चक्र के बारे में बताया जाता है ताकि किसान की भूमि की उपजाऊ क्षमता बनी रहे। हमारी ओर से डाटा तैयार कर सरकार को भेज दिया जाता है। इसके बाद सरकार अगला कदम उठाती है। - अनिल शर्मा, प्रभारी, मिट्टी-पानी गुणवत्ता लैब।