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Sirsa News: चौटाला माइन तक पानी पहुंचाने का प्रयास विफल, दबाव ज्यादा होने से टूटी
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डबवाली।चौटाला माइनर पर पानी की किल्लत को लेकर किसान धरना दिए हुए। संवाद
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डबवाली। चौटाला माइनर पर पानी की किल्लत के चलते बुधवार को किसानों का धरना लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। सिंचाई विभाग का टेल तक पानी पहुंचाने का प्रयास विफल रहा और माइनर बीच में टूट गई। दरअसल, प्रशासन की ओर से रतिया-फतेहाबाद मुख्य नहर से अतिरिक्त पानी लेकर चौटाला माइनर में छोड़ा गया था।
पहले से क्षतिग्रस्त माइनर पानी का दबाव सह नहीं सकी और एक बार फिर टूट गई। जेसीबी मशीन की मदद से बांधने का प्रयास किया गया। प्रशासन के इन प्रयासों के बाद भी पानी अभी भी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। धरनास्थल पर किसानों ने बताया कि तीन दिन का अतिरिक्त पानी छोड़ने के बावजूद टेल क्षेत्र अब भी सूखा है। पानी की किल्लत के चलते पशुओं की प्यास नहीं बुझा पा रहे हैं।
किसानों ने विरोध स्वरूप मवेशियों के गले से सांकलें निकालकर उन्हें खुला छोड़ दिया है। धरने के दौरान किसानों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने सिंचाई विभाग और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरने को और तेज करने का संकल्प लिया। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी प्रशासनिक दबाव को अब सहन नहीं किया जाएगा।
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कांग्रेस नेता ने दिया समर्थन
धरनास्थल पर पहुंचे युवा कांग्रेस नेता कुंवर वीर हिटलर ने कहा कि उनकी खुद की जमीन भी इसी माइनर पर पड़ती है और वे किसानों की तकलीफ को भलीभांति समझते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से इस नहर में पानी की भारी कमी है। उनका पूरा समर्थन अपने किसानों के साथ है। कमेटी जो भी आदेश देगी, उस पर हर समय उनके साथ खड़े हैं।
प्रशासन बना बेपरवाह, किसान बेहाल
किसानों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी इस संकट को गंभीरता से नहीं ले रहे है और 20 किलोमीटर दूर बैठे एसडीएम को हमारी आवाज सुनाई नहीं दे रही है। किसानों ने कहा कि हालात बेहद नाजुक हो चले हैं और प्रशासन अब भी अपने रुख पर अड़ा हुआ है। इस मौके पर धरने में प्रमुख किसान नेता दयाराम उलानिया, गुरदास सरदार, चानचराम सिहाग, अनिल जाखड़, सुभाष सुथार, लालचंद गोदारा, अशोक सहाराण समेत सैकड़ों किसान धरने में मौजूद रहे।
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पहले से क्षतिग्रस्त माइनर पानी का दबाव सह नहीं सकी और एक बार फिर टूट गई। जेसीबी मशीन की मदद से बांधने का प्रयास किया गया। प्रशासन के इन प्रयासों के बाद भी पानी अभी भी टेल तक नहीं पहुंच पा रहा है। धरनास्थल पर किसानों ने बताया कि तीन दिन का अतिरिक्त पानी छोड़ने के बावजूद टेल क्षेत्र अब भी सूखा है। पानी की किल्लत के चलते पशुओं की प्यास नहीं बुझा पा रहे हैं।
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किसानों ने विरोध स्वरूप मवेशियों के गले से सांकलें निकालकर उन्हें खुला छोड़ दिया है। धरने के दौरान किसानों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने सिंचाई विभाग और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरने को और तेज करने का संकल्प लिया। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी प्रशासनिक दबाव को अब सहन नहीं किया जाएगा।
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कांग्रेस नेता ने दिया समर्थन
धरनास्थल पर पहुंचे युवा कांग्रेस नेता कुंवर वीर हिटलर ने कहा कि उनकी खुद की जमीन भी इसी माइनर पर पड़ती है और वे किसानों की तकलीफ को भलीभांति समझते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से इस नहर में पानी की भारी कमी है। उनका पूरा समर्थन अपने किसानों के साथ है। कमेटी जो भी आदेश देगी, उस पर हर समय उनके साथ खड़े हैं।
प्रशासन बना बेपरवाह, किसान बेहाल
किसानों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी इस संकट को गंभीरता से नहीं ले रहे है और 20 किलोमीटर दूर बैठे एसडीएम को हमारी आवाज सुनाई नहीं दे रही है। किसानों ने कहा कि हालात बेहद नाजुक हो चले हैं और प्रशासन अब भी अपने रुख पर अड़ा हुआ है। इस मौके पर धरने में प्रमुख किसान नेता दयाराम उलानिया, गुरदास सरदार, चानचराम सिहाग, अनिल जाखड़, सुभाष सुथार, लालचंद गोदारा, अशोक सहाराण समेत सैकड़ों किसान धरने में मौजूद रहे।