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पशु का बांझपन स्थायी समस्या नहीं : डॉ. नलिनी
Sun, 28 Sep 2025 02:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 28 Sep 2025 02:53 AM IST
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ओढ़ां। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उपनिदेशक डॉ. सुखविंद्र चौहान और उपमंडल अधिकारी डॉ. अक्षय कुमार के निर्देशन में शनिवार को गांव भागसर में पशु जागृति शिविर आयोजित किया गया। इसमें गांव पन्नीवाला मोटा के राजकीय पशु औषधालय की वेटरनरी सर्जन डॉ. नलिनी प्रजापति ने पशुपालकों को बताया कि पशुओं में बांझपन कोई स्थायी या गंभीर समस्या नहीं है।
पंचायत विभाग के सहयोग से आयोजित इस शिविर में विभागीय टीम ने 470 पशुपालकों को जानकारी देकर पशुओं के लिए दवाइयां भी बांटी। डॉ. नलिनी ने बताया कि पशु को कृमिनाशक दवा एवं संतुलित आहार देने पर ये दिक्कत ठीक हो जाती है। कई बार पशु के गर्भ में अंडा पूर्ण रूप से विकसित होने से पहले ही नष्ट हो जाता है। इस कारण पशु का गर्भाधान कई बार करवाना पड़ता है। ऐसे में चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार पशु को खनिज तत्वों से भरपूर आहार दें।
उन्होंने कहा कि पशुओं के लिए मुंहखुर एवं गलघोटू का टीकाकरण जरूरी है। इससे दुग्ध उत्पादन पर कोई खास असर नहीं पड़ता बल्कि पशु के नियमित आहार पर कुछ दिन ध्यान देने से दुग्ध उत्पादन पुन: उसी अवस्था में आ जाता है।
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उन्होंने बताया कि विभाग ने गांव खुईयांनेपालपुर, खाईशेरगढ़ और भागसर में शिविर लगाए गए हैं। भागसर में शनिवार को आयोजित शिविर में करीब 470 ओपीडी एवं 330 पशुओं को कृमिनाशक, लिवर टॉनिक, पाचन पाउडर, कैल्शियम पाउडर, मिनरल मिक्सचर आदि दवाएं दी गईं। इस अवसर पर ग्राम सरपंच मुखत्यार सिंह, वीएलडीए प्रवीण कुमार, रजनीश कुमार, फलदीप सिंह, निर्मल कुमार, ग्राम सचिव विष्णु, पंच हरमीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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पंचायत विभाग के सहयोग से आयोजित इस शिविर में विभागीय टीम ने 470 पशुपालकों को जानकारी देकर पशुओं के लिए दवाइयां भी बांटी। डॉ. नलिनी ने बताया कि पशु को कृमिनाशक दवा एवं संतुलित आहार देने पर ये दिक्कत ठीक हो जाती है। कई बार पशु के गर्भ में अंडा पूर्ण रूप से विकसित होने से पहले ही नष्ट हो जाता है। इस कारण पशु का गर्भाधान कई बार करवाना पड़ता है। ऐसे में चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार पशु को खनिज तत्वों से भरपूर आहार दें।
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उन्होंने कहा कि पशुओं के लिए मुंहखुर एवं गलघोटू का टीकाकरण जरूरी है। इससे दुग्ध उत्पादन पर कोई खास असर नहीं पड़ता बल्कि पशु के नियमित आहार पर कुछ दिन ध्यान देने से दुग्ध उत्पादन पुन: उसी अवस्था में आ जाता है।
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उन्होंने बताया कि विभाग ने गांव खुईयांनेपालपुर, खाईशेरगढ़ और भागसर में शिविर लगाए गए हैं। भागसर में शनिवार को आयोजित शिविर में करीब 470 ओपीडी एवं 330 पशुओं को कृमिनाशक, लिवर टॉनिक, पाचन पाउडर, कैल्शियम पाउडर, मिनरल मिक्सचर आदि दवाएं दी गईं। इस अवसर पर ग्राम सरपंच मुखत्यार सिंह, वीएलडीए प्रवीण कुमार, रजनीश कुमार, फलदीप सिंह, निर्मल कुमार, ग्राम सचिव विष्णु, पंच हरमीत सिंह आदि मौजूद रहे।