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माली से मेलजोल बढ़ाकर चीता ने भतीजों का कराया था एडमिशन
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2700 करोड़ के हेरोइन तस्करी मामले में गिरफ्तार रणजीत सिंह उर्फ चीता और उसके भाई गगनदीप के दोनों बच्चों को बेगू गांव के पास एक प्राइवेट स्कूल में एडमीशन दिलाया था। चीता ने अपने भतीजों के एडमीशन के लिए घर के पास ही नर्सरी चलाने वाले माली से मेेल जोल बढ़ाया। चीता ने माली से अपने भतीजों के लिए नजदीक के स्कूल की जानकारी जुटानी शुरू की। माली के बच्चे गांव के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ते थे, इसलिए माली की राय पर चीता ने भी उसी स्कूल में अपने दोनों भतीजों के एडमीशन करवा दिया। सिरसा पुलिस ने अब माली को भी पूछताछ के लिए तलब किया है।
सिरसा पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि चीता अपनी पहचान छिपाकर सिरसा में ही रह रहा था। इसलिए वह साधारण मकान और साधारण व्यक्ति बनकर जीवन व्यतीत कर रहा था। ऐसे में उसने अपने भतीजों की पढ़ाई के लिए किसी ऐसा स्कूल चाहिए था जो कि उसके ठिकाने के आसपास ही हो। इसलिए उसने शहर में दोनों बच्चों को पढ़ाने की बजाए गांव के ही एक स्कूल का चयन किया। माली से प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि चीता ने माली से अपने भतीजों को एडमीशन दिलाने के लिए नजदीक के ही स्कूल की जानकारी ली। माली ने जिस स्कूल में अपने बच्चे पढ़ते हैं, उसी में ही एडमीशन करवाने की राय दी। इस पर चीता ने अपने भाई के दोनों बच्चों का एडमीशन प्रथम और दूसरी कक्षा में करवा दिया। हालांकि माली को इस बात का पता नहीं था कि जिस व्यक्ति को उसने राय दिया है वह 2700 करोड़ के हेरोइन तस्करी मामले में वांछित है। बता दें कि रणजीत सिंह उर्फ चीता के दोनों बच्चे जिस स्कूल में पढ़ते हैं, पुलिस ने उस स्कूल से रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं, ताकि वे एडमीशन रिकॉर्ड की जांच कर सकें। बता दें कि रणजीत उर्फ चीता और उसके भाई गगनदीप को एनआईए, पंजाब पुलिस और सिरसा पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन में बेगू रोड से पकड़ा था। चीता और उसके भाई गगनदीप को उनके रिश्तेदार गुरमीत सिंह ने ही अपनी आईडी से ही मकान किराए पर दिलाया था। गुरमीत ने खुद ही इकरारनामा किया था।
कोट्स
जांच में खुलासा हुआ है कि चीता ने दोनों भतीजों के एडमीशन के लिए माली से जानकारी ली थी। माली को चीता के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी नहीं थी।
- राजेश कुमार चेची, डीएसपी सिरसा।
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सिरसा पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि चीता अपनी पहचान छिपाकर सिरसा में ही रह रहा था। इसलिए वह साधारण मकान और साधारण व्यक्ति बनकर जीवन व्यतीत कर रहा था। ऐसे में उसने अपने भतीजों की पढ़ाई के लिए किसी ऐसा स्कूल चाहिए था जो कि उसके ठिकाने के आसपास ही हो। इसलिए उसने शहर में दोनों बच्चों को पढ़ाने की बजाए गांव के ही एक स्कूल का चयन किया। माली से प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि चीता ने माली से अपने भतीजों को एडमीशन दिलाने के लिए नजदीक के ही स्कूल की जानकारी ली। माली ने जिस स्कूल में अपने बच्चे पढ़ते हैं, उसी में ही एडमीशन करवाने की राय दी। इस पर चीता ने अपने भाई के दोनों बच्चों का एडमीशन प्रथम और दूसरी कक्षा में करवा दिया। हालांकि माली को इस बात का पता नहीं था कि जिस व्यक्ति को उसने राय दिया है वह 2700 करोड़ के हेरोइन तस्करी मामले में वांछित है। बता दें कि रणजीत सिंह उर्फ चीता के दोनों बच्चे जिस स्कूल में पढ़ते हैं, पुलिस ने उस स्कूल से रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं, ताकि वे एडमीशन रिकॉर्ड की जांच कर सकें। बता दें कि रणजीत उर्फ चीता और उसके भाई गगनदीप को एनआईए, पंजाब पुलिस और सिरसा पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन में बेगू रोड से पकड़ा था। चीता और उसके भाई गगनदीप को उनके रिश्तेदार गुरमीत सिंह ने ही अपनी आईडी से ही मकान किराए पर दिलाया था। गुरमीत ने खुद ही इकरारनामा किया था।
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जांच में खुलासा हुआ है कि चीता ने दोनों भतीजों के एडमीशन के लिए माली से जानकारी ली थी। माली को चीता के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी नहीं थी।
- राजेश कुमार चेची, डीएसपी सिरसा।