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Sirsa News: सीडीएलयू में सावरकर के नाम पर रखा गतिविधि केंद्र का नाम
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वीर सावरकर
सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय परिसर स्थित छात्र गतिविधि केंद्र का नामकरण अब स्वतंत्रता सेनानी, प्रखर विचारक और क्रांतिकारी साहित्यकार वीर सावरकर के नाम पर किया गया है। यह निर्णय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई की ओर से लिया गया है।
विश्वविद्यालय के कार्यकारी अभियंता राकेश गोदारा ने कहा कि कुलपति प्रो. नरसी राम ने यह निर्णय लेकर संदेश दिया है कि आज के युवाओं को वीर सावरकर के पदचिह्नों पर चलकर राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनना चाहिए। यह नामकरण राष्ट्र के उन नायकों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है, जिन्होंने अपने साहस, बलिदान और दूरदर्शी विचारों से भारत के स्वतंत्र भविष्य की नींव रखी।
प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बताया कि वीर सावरकर के नाम पर छात्र गतिविधि केंद्र का नामकरण, विश्वविद्यालय के छात्रों को उनके आदर्शों और विचारों से जोड़ने का माध्यम बनेगा। यह केंद्र अब केवल सह-शैक्षणिक गतिविधियों का स्थान नहीं रहेगा, बल्कि विचारों, रचनात्मकता और राष्ट्रीय चेतना के विकास का मंच भी बनेगा।
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वीर सावरकर न केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे, बल्कि वे एक उच्चकोटि के लेखक, समाज सुधारक और राष्ट्रवादी विचारक भी थे। उनका जीवन भारतीय युवाओं के लिए साहस, नेतृत्व और आत्मबलिदान का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि वीर विनायक दामोदर सावरकर का जीवन और साहित्य राष्ट्र चेतना, स्वत्व बोध और भारत की सांस्कृतिक पहचान की पुनर्स्थापना के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा हमारा प्रयास है कि हम छात्रों को महापुरुषों की जीवनी के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा दें।
वीर सावरकर का जीवन इसके लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह भवन एक प्रतीक बनेगा जो साधारण देशभक्ति, विचारों की स्पष्टता और राष्ट्रीय दायित्व के प्रति सजगता का।
कुलपति ने कहा कि सावरकर साहित्य में स्व का बोध और राष्ट्र निर्माण में युवा पीढ़ी के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शन निहित है।
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विश्वविद्यालय के कार्यकारी अभियंता राकेश गोदारा ने कहा कि कुलपति प्रो. नरसी राम ने यह निर्णय लेकर संदेश दिया है कि आज के युवाओं को वीर सावरकर के पदचिह्नों पर चलकर राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनना चाहिए। यह नामकरण राष्ट्र के उन नायकों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है, जिन्होंने अपने साहस, बलिदान और दूरदर्शी विचारों से भारत के स्वतंत्र भविष्य की नींव रखी।
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प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बताया कि वीर सावरकर के नाम पर छात्र गतिविधि केंद्र का नामकरण, विश्वविद्यालय के छात्रों को उनके आदर्शों और विचारों से जोड़ने का माध्यम बनेगा। यह केंद्र अब केवल सह-शैक्षणिक गतिविधियों का स्थान नहीं रहेगा, बल्कि विचारों, रचनात्मकता और राष्ट्रीय चेतना के विकास का मंच भी बनेगा।
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वीर सावरकर न केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे, बल्कि वे एक उच्चकोटि के लेखक, समाज सुधारक और राष्ट्रवादी विचारक भी थे। उनका जीवन भारतीय युवाओं के लिए साहस, नेतृत्व और आत्मबलिदान का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि वीर विनायक दामोदर सावरकर का जीवन और साहित्य राष्ट्र चेतना, स्वत्व बोध और भारत की सांस्कृतिक पहचान की पुनर्स्थापना के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा हमारा प्रयास है कि हम छात्रों को महापुरुषों की जीवनी के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा दें।
वीर सावरकर का जीवन इसके लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह भवन एक प्रतीक बनेगा जो साधारण देशभक्ति, विचारों की स्पष्टता और राष्ट्रीय दायित्व के प्रति सजगता का।
कुलपति ने कहा कि सावरकर साहित्य में स्व का बोध और राष्ट्र निर्माण में युवा पीढ़ी के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शन निहित है।