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जिंदा जल गया दो साल का मासूम: चूल्हे पर बनाने के लिए रखी थी चाय, झोपड़ी में लग गई आग
Sat, 26 Apr 2025 05:58 PM IST
शाहिल शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sat, 26 Apr 2025 05:58 PM IST
सार
मां ने चूल्हे पर चाय बनाने के लिए रखी थी और अचानक झोपड़ी में आग लग गई। इस हादसे में 2 साल के मासूम की जलने से मौत हो गई. डिटेल में पढ़ें खबर...
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झोपड़ी में आग लगने से 2 साल के मासूम की मौत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
डबवाली के गांव शेरगढ़ में शुक्रवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर दिया। चूल्हे पर चाय बनाते समय झोपड़ी में आग लगने से दो वर्षीय मासूम विश्वास गंभीर रूप से झुलस गया। मां के पानी लेने बाहर जाने के दौरान हुए इस हादसे में बच्चे को बठिंडा के एम्स में भर्ती कराया गया, जहां उसने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
घटना शेरगढ़ गांव की चौपाल पर बनी एक झोपड़ी में हुई, जहां हंसराज का परिवार पिछले चार साल से रह रहा था। परिवार बेसहारा पशुओं से फसलों की रखवाली करता है। शुक्रवार को हंसराज की पत्नी सुनीता चूल्हे पर चाय बनाकर पानी लाने बाहर गई थी। इसी दौरान झोपड़ी में आग लग गई। उस समय दो साल का विश्वास अंदर सो रहा था, जबकि चार साल का बड़ा बेटा साहिल बाहर था।
आग की लपटों ने देखते ही देखते झोपड़ी को अपनी चपेट में ले लिया, और छत गिरने से विश्वास नीचे दब गया। सुनीता ने शोर मचाकर मदद मांगी। पड़ोस के दुकानदार बूटा सिंह और अन्य ग्रामीण मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद विश्वास को बाहर निकाला। गंभीर हालत में उसे डबवाली के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद बठिंडा एम्स रेफर किया गया। दुर्भाग्यवश, बच्चे ने वहां दम तोड़ दिया। थाना प्रभारी शैलेंद्र कुमार ने मौके पर पहुंचकर घटना का जायजा लिया और जांच शुरू की।
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मां का दर्द: "मुझे नहीं पता था विश्वास अंदर है"
मां सुनीता ने रोते हुए बताया कि आग लगने पर वह इतना घबरा गई कि उसे कुछ समझ नहीं आया। उसे लगा कि विश्वास बाहर खेल रहा है। चाय बनाने के चक्कर में ऐसा हादसा हो जाएगा, इसका अंदाजा तक नहीं था।
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घटना शेरगढ़ गांव की चौपाल पर बनी एक झोपड़ी में हुई, जहां हंसराज का परिवार पिछले चार साल से रह रहा था। परिवार बेसहारा पशुओं से फसलों की रखवाली करता है। शुक्रवार को हंसराज की पत्नी सुनीता चूल्हे पर चाय बनाकर पानी लाने बाहर गई थी। इसी दौरान झोपड़ी में आग लग गई। उस समय दो साल का विश्वास अंदर सो रहा था, जबकि चार साल का बड़ा बेटा साहिल बाहर था।
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आग की लपटों ने देखते ही देखते झोपड़ी को अपनी चपेट में ले लिया, और छत गिरने से विश्वास नीचे दब गया। सुनीता ने शोर मचाकर मदद मांगी। पड़ोस के दुकानदार बूटा सिंह और अन्य ग्रामीण मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद विश्वास को बाहर निकाला। गंभीर हालत में उसे डबवाली के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद बठिंडा एम्स रेफर किया गया। दुर्भाग्यवश, बच्चे ने वहां दम तोड़ दिया। थाना प्रभारी शैलेंद्र कुमार ने मौके पर पहुंचकर घटना का जायजा लिया और जांच शुरू की।
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मां का दर्द: "मुझे नहीं पता था विश्वास अंदर है"
मां सुनीता ने रोते हुए बताया कि आग लगने पर वह इतना घबरा गई कि उसे कुछ समझ नहीं आया। उसे लगा कि विश्वास बाहर खेल रहा है। चाय बनाने के चक्कर में ऐसा हादसा हो जाएगा, इसका अंदाजा तक नहीं था।