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जिले की 772 अवैध कॉलोनियों को मर्ज कर बनाईं 97, अब हो सकेंगी वैध

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 01 Aug 2022 11:27 PM IST
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97 made by merging 772 illegal colonies of the district, now they will be valid
अवैध कॉलोनी पर पीला पंजा चलवाते जिला नगर योजनाकार विभाग के अधिकारी-कर्मचारी। फाइल फोटो - फोटो : Sirsa
सिरसा। जिले की 772 अवैध कॉलोनी में बसी डेढ़ लाख से ज्यादा की आबादी के लिए अच्छी खबर है। अब ये कॉलोनियां भी वैध हो सकेंगी। इसके लिए सरकार ने विशेष योजना लाकर गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस संबंध में जिला नगर योजनाकार विभाग ने ड्रोन से सर्वे कर लिया है। इसकी रिपोर्ट भी भेजी जा चुकी है। हालांकि इन 772 कॉलोनियों को मर्ज करके 97 बड़ी कॉलोनियों में तब्दील किया गया है। अब कॉलोनी के संस्थापक या एसोसिएशन कोे आवेदन जमा करवाना होगा। इसके बाद नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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सरकार के फैसले के अनुसार केवल नगर परिषद एरिया में आने वाली कॉलोनियां ही नहीं, बल्कि बाहरी क्षेत्र की कॉलोनियां भी वैध हो सकेंगी। इसके लिए सरकार ने विशेष प्रावधान करते हुए मंजूरी दे दी है और नियम-शर्तें भी बना दी है। जिला प्रशासन को सोमवार को मिले पत्र में नियमितीकरण के लिए आने वाले प्रस्ताव पर तेजी से काम शुरू करने के आदेश मिले हैं। इसके लिए विभाग को केवल छह माह का समय दिया गया है। इस अवधि में यानी 18 दिसंबर के बीच प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
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केवल बड़ी कॉलोनियों होगी वैध, इसलिए छोटी कीं मर्ज
सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि केवल ऐसी कॉलोनियों को नियमित किया जाएगा, जो बड़ी होंगी। जिले में बड़ी संख्या में कॉलोनियां ऐसी हैं, जो इस नियम में नहीं आती। इसके बाद विभाग ने कई छोटी कॉलोनियों को एक बड़ी कॉलोनी दर्शा कर इसका हल निकाला। जिला नगर योजनाकार विभाग के रिकॉर्ड अनुसार जिले में 772 छोटी-बड़ी कॉलोनियां ऐसी हैं, जो इस समय अवैध हैं। इसलिए विभाग ने ड्रोन सर्वे करवाया और इन कॉलोनियों को मर्ज करते हुए रिकॉर्ड में 97 कॉलोनियां तैयार कर दी हैं। विभाग ने इसका जनवरी-फरवरी में सर्वे करवाया था और विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर भेज दी गई है। अब केवल कॉलोनी के संस्थापक या एसोसिएशन की ओर से आवेदन जमा करवाना होगा। इसके बाद नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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यहां है अवैध कॉलोनियां
इनमें शहरी एरिया के साथ लगती चत्तरगढ़पट्टी, खाजाखेड़ा, गांव शाहपुर बेगू के आसपास का क्षेत्र, केलनिया रोड, कंगनपुर के आसपास का क्षेत्र, रानियां रोड, भादरा रोड, वैदवाला के आसपास का क्षेत्र, डबवाली रोड, हिसार रोड और ऐलनाबाद रोड के आसपास के क्षेत्र में अवैध कॉलोनियां हैं।
ऐसे करना होगा आवेदन, कमेटी करेगी जांच
यदि कोई अवैध कॉलोनी है और इसे नियमित करवाना है। तो इसके लिए या तो रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन का गठन करना होगा या फिर कॉलोनी स्थापित करने वाले को सरकार और प्रशासन के पास आवेदन करना होगा। आवेदन हरियाणा रूरल डेवलेपमेंट अथॉरिटी यानी एचआरडीए को भेजा जाएगा। आवेदन आने के बाद अधिकारी समीक्षा करेंगे और मंथन के बाद रिपोर्ट देंगे। डीसी के चेयरमैनशिप में नौ सदस्यीय कमेटी इस पर मंथन करेगी। आवेदन आने पर ये कमेटी अपनी रिपोर्ट बनाकर भेजेगी।
बिल्डिंग के लिए कलेक्टर रेट का 5 फीसदी, खाली प्लॉट के लिए रेट का 10 फीसदी देनी होगी फीस
जांच कमेटी में डीटीपी, जिला परिषद के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर, डीडीपीओ, पंचायत विभाग के एक्सईएन, बीएंडआर के एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन, जिला फायर ऑफिसर और तहसीलदार, एसई पंचायती राज शामिल होंगे। आवेदन के साथ निर्धारित फीस भी देनी होगी। नियम बनाया गया है कि आवेदनकर्ता को बिल्डिंग के लिए कलेक्टर रेट का 5 फीसदी, जबकि खाली प्लॉट के लिए 10 फीसदी रेट अनुसार फीस जमा करानी होगी।
वैध होने पर थम जाएगा पीला पंजा
जिला नगर योजनाकर विभाग से बिना मंजूरी लिए कॉलोनी स्थापित करने पर कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे में समय-समय पर अभियान चलाकर विभाग की ओर से अवैैध कॉलोनियों में सड़कें, इमारतें और चहारदीवारी पर पीला पंजा चलाया जाता था, लेकिन अब ये कार्रवाई भी थम जाएगी। हालांकि बिना सीएलयू लिए काम करने वालों पर अभी भी विभाग शिकंजा कसता रहेगा।
इन क्षेत्र में कॉलोनियों को नहीं मिलेगी वैधता : फैक्टरी, शॉपिंग मॉल, रेस्टोरेंट, कामर्शियल मार्केट, मल्टीप्लेक्स, सिनेमा के पास के क्षेत्र में कॉलोनियों को वैधता नहीं मिलेगी।

सरकार ने अवैध कॉलोनियों को नियमित करने के लिए मंजूरी दे दी है। अब अवैध कॉलोनी को लेकर संस्थापक या वेलफेयर एसोसिएशन को प्रस्ताव भेजना होगा। सर्वे रिपोर्ट और मंथन के बाद जिला स्तर पर कमेटी रिपोर्ट बनाकर भेजेगी। निर्धारित फीस भरने के बाद इन कॉलोनियों को वैध किया जा सकेगा। खास बात ये है कि नगर परिषद से बाहर के क्षेत्र की अवैध कॉलोनियों को भी वैध करने का रास्ता साफ हो गया है। -अशोक गर्ग, डीटीपी।
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