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ग्रामीणों ने ठेका बंद कराने के लिए तीन घंटे दिया धरना, सड़क पर फेंकी शराब की बोतलें
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कालांवाली। कालांवाली के नजदीकी गांव पक्कां शहीदां में शराब का ठेका खुलने पर ग्रामीणों ने अपनी नाराजगी जताते हुए ठेके के सामने धरना प्रदर्शन किया। लेकिन जब ठेकेदार ने शाम पांच बजे तक ठेका बंद नहीं किया तो ग्रामीणों ने ठेके से शराब की बोतलें बाहर फेंक दी। पुलिस ने आकर ग्रामीणों को शांत करवाया।
गांव पक्कां शहीदां में शनिवार को पहले दिन शराब का ठेका खुला। खुले ठेके को लेकर ग्रामीणों में काफी रोष देखने को मिला। ग्रामीणों ने बताया कि 12 बजे के करीब ठेकेदार लगभग 20 पेटी शराब ठेके में रखवा के चला गया। इसका पता चलने पर ग्रामीणों ने दोपहर करीब 2 बजे इकट्ठे होकर ठेके के सामने धरना प्रदर्शन किया व ठेकेदार से ठेका हटाने के लिए कहा। इस पर ठेकेदार उन्हें ठेका बंद करने का आश्वासन देता रहा। ग्रामीण ठेके के सामने धरने पर बैठ गए। लेकिन शाम के 5 बजे तक जब कोई भी प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों की फरियाद सुनने नहीं पहुंचा तो ग्रामीणों ने गुस्से में आकर 20 पेटी शराब को उठाकर बाहर फेंक दिया। इसके बाद शाम के लगभग सवा 6 बजे पुलिस टीम पहुंची तो पुलिस ने शराब की बोतलें इक्ट्ठी करवाई।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों में चरणजीत कौर, हरजिंदर कौर, नसीब कौर, सुखबीर कौर, मनप्रीत कौर, हरबंस कौर, अमरजीत कौर, परमजीत कौर, मूर्ति, गुरजीत कौर, शिंदर कौर, हरजिंदर कौर, गुरमेल सिंह, जरनैल सिंह, मनजीत सिंह, कौर सिंह, गुरदेव सिंह, गुरतेज सिंह, रेशम सिंह ने कहा कि इस संदर्भ में उन्होंने दो बार डीसी को भी मांग पत्र दिया था। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामवासी हरबंस कौर ने कहा कि उसके परिवार के तीन सदस्य शराब के कारण मर चुके हैं। उसका 21 वर्षीय पोता भी शराब के कारण ही चल बसा। उसका कहना था कि ‘मैं अपनी जान दे दूंगी, लेकिन किसी भी कीमत पर यहां ठेका नहीं खुलने दूंगी’। सिंहपुरा पुलिस चौकी से आए कर्मचारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि वे इस मामले की जांच करेंगे कि यह ठेका लीगल है या नहीं। यदि लीगल है तो डीसी से मिलकर ग्रामीण अपनी बात रखें। इसके बाद ग्रामीण संतुष्ट हुए।
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गांव पक्कां शहीदां में शनिवार को पहले दिन शराब का ठेका खुला। खुले ठेके को लेकर ग्रामीणों में काफी रोष देखने को मिला। ग्रामीणों ने बताया कि 12 बजे के करीब ठेकेदार लगभग 20 पेटी शराब ठेके में रखवा के चला गया। इसका पता चलने पर ग्रामीणों ने दोपहर करीब 2 बजे इकट्ठे होकर ठेके के सामने धरना प्रदर्शन किया व ठेकेदार से ठेका हटाने के लिए कहा। इस पर ठेकेदार उन्हें ठेका बंद करने का आश्वासन देता रहा। ग्रामीण ठेके के सामने धरने पर बैठ गए। लेकिन शाम के 5 बजे तक जब कोई भी प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों की फरियाद सुनने नहीं पहुंचा तो ग्रामीणों ने गुस्से में आकर 20 पेटी शराब को उठाकर बाहर फेंक दिया। इसके बाद शाम के लगभग सवा 6 बजे पुलिस टीम पहुंची तो पुलिस ने शराब की बोतलें इक्ट्ठी करवाई।
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प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों में चरणजीत कौर, हरजिंदर कौर, नसीब कौर, सुखबीर कौर, मनप्रीत कौर, हरबंस कौर, अमरजीत कौर, परमजीत कौर, मूर्ति, गुरजीत कौर, शिंदर कौर, हरजिंदर कौर, गुरमेल सिंह, जरनैल सिंह, मनजीत सिंह, कौर सिंह, गुरदेव सिंह, गुरतेज सिंह, रेशम सिंह ने कहा कि इस संदर्भ में उन्होंने दो बार डीसी को भी मांग पत्र दिया था। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामवासी हरबंस कौर ने कहा कि उसके परिवार के तीन सदस्य शराब के कारण मर चुके हैं। उसका 21 वर्षीय पोता भी शराब के कारण ही चल बसा। उसका कहना था कि ‘मैं अपनी जान दे दूंगी, लेकिन किसी भी कीमत पर यहां ठेका नहीं खुलने दूंगी’। सिंहपुरा पुलिस चौकी से आए कर्मचारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि वे इस मामले की जांच करेंगे कि यह ठेका लीगल है या नहीं। यदि लीगल है तो डीसी से मिलकर ग्रामीण अपनी बात रखें। इसके बाद ग्रामीण संतुष्ट हुए।
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