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मिडे डे मील वर्करों ने किया सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
Updated Sun, 10 Dec 2017 12:49 AM IST
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सिरसा। वेतन वृद्धि की मांग को लेकर मिड-डे मील वर्करों ने शनिवार को लघु सचिवालय में जोरदार प्रदर्शन करके धरना दिया। दोपहर बाद प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
मिड-डे मील वर्करों का कहना है कि राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 32 हजार मिड-डे मील वर्कर काम कर रहे हैं। वर्करों में कुछ पुरुषों को छोड़कर अधिकतर महिलाएं हैं। सभी महिलाएं समाज के गरीब तबकों से हैं। महिलाओं में 40 प्रतिशत विधवा महिलाएं हैं, जिनकी आमदन पर ही परिवार का गुजर बसर होता है। वर्करों को प्रति माह 2500 रुपये वेतन दिया जाता है, वो भी साल के दस महीने। सरकार ने दो जनवरी 2017 को भरोसा दिया था कि वर्कर्स की इस श्रेणी का वेतन बढ़ाया जाएगा, लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ है। मिड-डे मील के वर्करों को सातवें वेतन आयोग के आधार पर राज्य में लागू की गई सिफारिशों के अनुरूप वेतन बढ़ोतरी का लाभ दिया जाए।
ये हें प्रमुख मांगें
मिड-डे मील को पंचायत एवं विकास विभाग को सौंपने का निर्णय वापस हो।
न्यूनतम वेतन 18 हजार दिया जाए।
मिड-डे मील वर्करों को चौथे दर्ज का सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए।
180 दिन प्रसूति लाभ दिया जाए।
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मिड-डे मील वर्करों का कहना है कि राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 32 हजार मिड-डे मील वर्कर काम कर रहे हैं। वर्करों में कुछ पुरुषों को छोड़कर अधिकतर महिलाएं हैं। सभी महिलाएं समाज के गरीब तबकों से हैं। महिलाओं में 40 प्रतिशत विधवा महिलाएं हैं, जिनकी आमदन पर ही परिवार का गुजर बसर होता है। वर्करों को प्रति माह 2500 रुपये वेतन दिया जाता है, वो भी साल के दस महीने। सरकार ने दो जनवरी 2017 को भरोसा दिया था कि वर्कर्स की इस श्रेणी का वेतन बढ़ाया जाएगा, लेकिन ऐसा अभी तक नहीं हुआ है। मिड-डे मील के वर्करों को सातवें वेतन आयोग के आधार पर राज्य में लागू की गई सिफारिशों के अनुरूप वेतन बढ़ोतरी का लाभ दिया जाए।
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ये हें प्रमुख मांगें
मिड-डे मील को पंचायत एवं विकास विभाग को सौंपने का निर्णय वापस हो।
न्यूनतम वेतन 18 हजार दिया जाए।
मिड-डे मील वर्करों को चौथे दर्ज का सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए।
180 दिन प्रसूति लाभ दिया जाए।