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सुरक्षा बलों की घेराबंदी के बीच डेरा के अंदर पहुंची केंद्रीय खुफिया एजेंसी
Updated Sun, 03 Sep 2017 11:52 PM IST
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सुरक्षा बलों की घेराबंदी के बीच डेरा के अंदर पहुंची केेंद्रीय खुफिया एजेंसी
डेरा के अंदर हर जगह नजर आई सफाई, कहीं से भी नहीं लगता वहां मौजूद थे 25 से 30 हजार अनुयायी
कोई सामान बिखरा पड़ा नहीं मिला, डेरा प्रमुख की गुफा के बाहर बैठे नजर आए चंद सेवादार
सरकार ने अभी तक नहीं दी सुरक्षा बलों को डेरा के अंदर जाने की अनुमति, सरकार की मंशा पर लोग में खड़े कर रहे हैं सवाल
हितेश चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
डेरा सच्चा सौदा के चारों ओर सुरक्षा बलों की घेराबंदी के बावजूद प्रशासन ने डेरा के अंदर अभी तक सर्च अभियान नहीं चलाया, लेकिन खुफिया एजेंसियों ने डेरा सच्चा सौदा के अंदर जाकर अहम जानकारियां जुटा ली हैं। केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी की स्पेशल ब्रांच के ऑफिसर बुधवार 30 अगस्त को सुरक्षा बलों की निगरानी के बीच डेरा सच्चा सौदा में गए।
आईबी सूत्रों के अनुसार डेरा सच्चा सौदा के अंदर सारा दृश्य बदला मिला। डेरा के पुराने सेवादार के तौर पर कुछ अनुयायी डेरा के अगले हिस्से में दिखाई दिए। डेरा में हर हिस्से में सफाई मिली। ऐसा कहीं से भी नहीं लगता कि 25 अगस्त से लेकर 28 अगस्त के बीच डेरा में 25 से 30 हजार लोग मौजूद थे। न कोई सामान बिखरा पड़ा और न ही कोई खास गतिविधियां अंदर नजर आईं। हर तरफ खामोशी और थोड़े बहुत सेवादारों की चहल कदमी दिखाई दी।
डेरा में बने हॉल के बाहरी गेट और अंदर कमरों में ताले लटके मिले। लंगर हॉल में भी कोई सामान और बर्तन खुले में नहीं पडे़ मिले। डेरा के सिनेमा हॉल के पीछे वाली मार्केट में कुछ वृद्ध सेवादार बैठे मिले, शोरूम पर ताले लगे हुए थे। इसी प्रकार का आलम इंटेलिजेंस कर्मियों को डेरा के अस्पताल में देखने को मिला। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की गुफा के बाहर कोई खास गतिविधि नहीं देखाई दी, बस चंद सेवादार खडे़ नजर आए।
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सूत्रों के अनुसार डेरा के अंदर की साफ-सफाई को देखकर ऐसा कहीं से नहीं लगता कि तीन दिन पहले तक हजारों लोगों वहां मौजूद रहे। ऐसा लगता है कि डेरा के अंदर हुई हर घटना के सारे सबूत मिटा दिए गए हैं। सूचनाएं मिल रहीं थीं कि सुरक्षा बलों की फायरिंग में घायल हुए डेरा प्रेमियों में से कुछ की मौत होने के बाद उनकी लाशें डेरा के अस्पताल के अंदर पड़ी हुईं हैं, लेकिन इसके सबूत अस्पताल और डेरा में मौजूद नहीं मिले। जिस प्रकार से सूचनाएं मिल रहीं थीं की डेरा में कट्टर अनुयायी हथियार लेकर तैनात हैं ऐसा कुछ भी नजारा अंदर देखने को नहीं मिला। खुफिया एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट सीनियर ऑफिसरों को भेज दी, जिसके बाद गृह मंत्रालय ने हरियाणा गृह सचिव से रिपोर्ट को सांझा किया। डेरा सच्चा सौदा के नाम पर जितने भी आर्म लाइसेंस जारी हुए सिरसा प्रशासन ने वो हथियार डेरा प्रबंधकों को प्रशासन को सौंपने के लिए बोला और डेरा प्रबंधकों ने अधिकतर हथियार जमा करवाए दिए हैं। खुफिया एजेंसी ने सरकार को एहतियात बरतकर आगे की कार्रवाई को अंजाम देने की सलाह दी है। सलाह के तौर पर ये कहा गया है कि डेरा सच्चा सौदा और इसके आसपास के इलाकों में कर्फ्यू को कुछ समय तक बरकरार रखा जाए। इसके अलावा सिरसा तक रेल सेवा की बहाली अभी न की जाए। डेरा के कट्टर अनुयायियों में अभी भी रोष देखा जा रहा है।
25 को डेरा से हट गए थे स्टेट इंटेलिजेंस कर्मी
डेरा सच्चा सौदा में कई सालों से स्टेट इंटेलिजेंस एजेंसी सीआईडी के कर्मियों की तैनाती थी। मेन डेरा सच्चा सौदा और बेगू रोड पर स्थित छोटे डेरे में सीआईडी कर्मी हर गतिविधि की रिपोर्ट मुख्यालय में भेजते थे। सीआईडी में हरियाणा पुलिस के जवान शामिल हैं। 25 अगस्त को जब डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सीबीआई कोर्ट ने दोषी करार दिया तो उससे दो घंटे पहले सीआईडी ने अपने सारे कर्मियों को डेरा सच्चा सौदा से वापस बुला लिया। इसका कारण ये रहा कि डेरा सच्चा सौदा के प्रबंधक और अनुयायी सीआईडी कर्मियों को अच्छी तरह पहचानते थे। इसलिए फैसले के बाद हिंसा पर उतारू डेरा प्रेमी इन कर्मियों को अपना निशाना बना सकते थे। इसलिए स्टेट इंटेलिजेेंस ने अपने कर्मचारियों को डेरा में डटे रहने का जोखिम नहीं उठाया। अब स्टेट इंटेलिजेंस की भूमिका डेरा सच्चा सौदा के बाहर और डेरा प्रेमी बहुल इलाकों पर पैनी नजर रखने की है।
अभी तक नहीं सर्च ऑपरेशन का निर्देश
हर किसी के जहन में ये सवाल उठ रहा है कि सिरसा प्रशासन ने सुरक्षा बलों को डेरा सच्चा सौदा के अंदर भेजकर सर्च ऑपरेशन क्यों नहीं शुुरू किया। शुरू से प्रशासन यही बोल रहा है कि डेरा के अंदर जाने में कानूनी अड़चन है, बिना मंजूरी के किसी के संस्थान में घुसा नहीं जा सकता। सर्च ऑपरेशन न चलाने से डेरा को इतना समय मिला कि 25 अगस्त की हिंसा के बाद डेरा में जो भी असामान्य रहा उसे सामान्य कर दिया। इसलिए लोगों में सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा हो रहा है। डेरा प्रबंधन का प्रशासन से मिलकर यहां स्थापित शिक्षण संस्थानों को खोलने की अनुमति मांगने से यह साफ हो जाता है कि डेरा के अंदर किसी भाग में जो भी प्रतिबंधित चीजें रही होंगी उन्हें यहां से हटाया जा चुका है। अगर अब प्रशासन सर्ज ऑपरेशन चलाता भी है तो डेरा सच्चा सौदा के अंदर केवल आलीशान भवन, कीमती सामान और डेरा मुखी की गुफा अंदर से कैसी है यही पता चलेगा। नौ दिन बीत जाने के बाद डेरा में कुछ गैर कानूनी चीजें मिलने की संभावना अब लोगों को नहीं दिखती।
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डेरा के अंदर हर जगह नजर आई सफाई, कहीं से भी नहीं लगता वहां मौजूद थे 25 से 30 हजार अनुयायी
कोई सामान बिखरा पड़ा नहीं मिला, डेरा प्रमुख की गुफा के बाहर बैठे नजर आए चंद सेवादार
सरकार ने अभी तक नहीं दी सुरक्षा बलों को डेरा के अंदर जाने की अनुमति, सरकार की मंशा पर लोग में खड़े कर रहे हैं सवाल
हितेश चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
डेरा सच्चा सौदा के चारों ओर सुरक्षा बलों की घेराबंदी के बावजूद प्रशासन ने डेरा के अंदर अभी तक सर्च अभियान नहीं चलाया, लेकिन खुफिया एजेंसियों ने डेरा सच्चा सौदा के अंदर जाकर अहम जानकारियां जुटा ली हैं। केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी की स्पेशल ब्रांच के ऑफिसर बुधवार 30 अगस्त को सुरक्षा बलों की निगरानी के बीच डेरा सच्चा सौदा में गए।
आईबी सूत्रों के अनुसार डेरा सच्चा सौदा के अंदर सारा दृश्य बदला मिला। डेरा के पुराने सेवादार के तौर पर कुछ अनुयायी डेरा के अगले हिस्से में दिखाई दिए। डेरा में हर हिस्से में सफाई मिली। ऐसा कहीं से भी नहीं लगता कि 25 अगस्त से लेकर 28 अगस्त के बीच डेरा में 25 से 30 हजार लोग मौजूद थे। न कोई सामान बिखरा पड़ा और न ही कोई खास गतिविधियां अंदर नजर आईं। हर तरफ खामोशी और थोड़े बहुत सेवादारों की चहल कदमी दिखाई दी।
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डेरा में बने हॉल के बाहरी गेट और अंदर कमरों में ताले लटके मिले। लंगर हॉल में भी कोई सामान और बर्तन खुले में नहीं पडे़ मिले। डेरा के सिनेमा हॉल के पीछे वाली मार्केट में कुछ वृद्ध सेवादार बैठे मिले, शोरूम पर ताले लगे हुए थे। इसी प्रकार का आलम इंटेलिजेंस कर्मियों को डेरा के अस्पताल में देखने को मिला। डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की गुफा के बाहर कोई खास गतिविधि नहीं देखाई दी, बस चंद सेवादार खडे़ नजर आए।
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सूत्रों के अनुसार डेरा के अंदर की साफ-सफाई को देखकर ऐसा कहीं से नहीं लगता कि तीन दिन पहले तक हजारों लोगों वहां मौजूद रहे। ऐसा लगता है कि डेरा के अंदर हुई हर घटना के सारे सबूत मिटा दिए गए हैं। सूचनाएं मिल रहीं थीं कि सुरक्षा बलों की फायरिंग में घायल हुए डेरा प्रेमियों में से कुछ की मौत होने के बाद उनकी लाशें डेरा के अस्पताल के अंदर पड़ी हुईं हैं, लेकिन इसके सबूत अस्पताल और डेरा में मौजूद नहीं मिले। जिस प्रकार से सूचनाएं मिल रहीं थीं की डेरा में कट्टर अनुयायी हथियार लेकर तैनात हैं ऐसा कुछ भी नजारा अंदर देखने को नहीं मिला। खुफिया एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट सीनियर ऑफिसरों को भेज दी, जिसके बाद गृह मंत्रालय ने हरियाणा गृह सचिव से रिपोर्ट को सांझा किया। डेरा सच्चा सौदा के नाम पर जितने भी आर्म लाइसेंस जारी हुए सिरसा प्रशासन ने वो हथियार डेरा प्रबंधकों को प्रशासन को सौंपने के लिए बोला और डेरा प्रबंधकों ने अधिकतर हथियार जमा करवाए दिए हैं। खुफिया एजेंसी ने सरकार को एहतियात बरतकर आगे की कार्रवाई को अंजाम देने की सलाह दी है। सलाह के तौर पर ये कहा गया है कि डेरा सच्चा सौदा और इसके आसपास के इलाकों में कर्फ्यू को कुछ समय तक बरकरार रखा जाए। इसके अलावा सिरसा तक रेल सेवा की बहाली अभी न की जाए। डेरा के कट्टर अनुयायियों में अभी भी रोष देखा जा रहा है।
25 को डेरा से हट गए थे स्टेट इंटेलिजेंस कर्मी
डेरा सच्चा सौदा में कई सालों से स्टेट इंटेलिजेंस एजेंसी सीआईडी के कर्मियों की तैनाती थी। मेन डेरा सच्चा सौदा और बेगू रोड पर स्थित छोटे डेरे में सीआईडी कर्मी हर गतिविधि की रिपोर्ट मुख्यालय में भेजते थे। सीआईडी में हरियाणा पुलिस के जवान शामिल हैं। 25 अगस्त को जब डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सीबीआई कोर्ट ने दोषी करार दिया तो उससे दो घंटे पहले सीआईडी ने अपने सारे कर्मियों को डेरा सच्चा सौदा से वापस बुला लिया। इसका कारण ये रहा कि डेरा सच्चा सौदा के प्रबंधक और अनुयायी सीआईडी कर्मियों को अच्छी तरह पहचानते थे। इसलिए फैसले के बाद हिंसा पर उतारू डेरा प्रेमी इन कर्मियों को अपना निशाना बना सकते थे। इसलिए स्टेट इंटेलिजेेंस ने अपने कर्मचारियों को डेरा में डटे रहने का जोखिम नहीं उठाया। अब स्टेट इंटेलिजेंस की भूमिका डेरा सच्चा सौदा के बाहर और डेरा प्रेमी बहुल इलाकों पर पैनी नजर रखने की है।
अभी तक नहीं सर्च ऑपरेशन का निर्देश
हर किसी के जहन में ये सवाल उठ रहा है कि सिरसा प्रशासन ने सुरक्षा बलों को डेरा सच्चा सौदा के अंदर भेजकर सर्च ऑपरेशन क्यों नहीं शुुरू किया। शुरू से प्रशासन यही बोल रहा है कि डेरा के अंदर जाने में कानूनी अड़चन है, बिना मंजूरी के किसी के संस्थान में घुसा नहीं जा सकता। सर्च ऑपरेशन न चलाने से डेरा को इतना समय मिला कि 25 अगस्त की हिंसा के बाद डेरा में जो भी असामान्य रहा उसे सामान्य कर दिया। इसलिए लोगों में सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा हो रहा है। डेरा प्रबंधन का प्रशासन से मिलकर यहां स्थापित शिक्षण संस्थानों को खोलने की अनुमति मांगने से यह साफ हो जाता है कि डेरा के अंदर किसी भाग में जो भी प्रतिबंधित चीजें रही होंगी उन्हें यहां से हटाया जा चुका है। अगर अब प्रशासन सर्ज ऑपरेशन चलाता भी है तो डेरा सच्चा सौदा के अंदर केवल आलीशान भवन, कीमती सामान और डेरा मुखी की गुफा अंदर से कैसी है यही पता चलेगा। नौ दिन बीत जाने के बाद डेरा में कुछ गैर कानूनी चीजें मिलने की संभावना अब लोगों को नहीं दिखती।