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सीडीएलयू युवा महोत्सव: 19-31-48
Updated Sun, 05 Nov 2017 12:35 AM IST
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सिरसा।
चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय युवा महोत्सव में शनिवार को अंतिम दिन सुबह से ही मुख्य मंच और द्वितीय मंच पर हरियाणवी ग्रुप और सोलो डांस की धूम रही। दर्शकों ने पूरा आनंद लिया और प्रतिभागियों का ताली बजाकर हौसला बढ़ाया। समापन समारोह में मुख्यातिथि हरियाणा पर्यटन निगम के चेयरमैन जगदीश चोपड़ा ने विजेता टीमों व प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।
हरियाणवी सोलो डांस में शनिवार को प्रथम प्रस्तुति टीम नंबर 53 के पुरुष प्रतिभागी ने दी। जैसे ही गीत के बोल ‘एक गाम की छोरी, जनूं गन्नै की पोरी’ युवा वर्ग को सुनाई दिए वैसे ही सभागार सीटियों, तालियों व हूटिंग से गूंज उठा। इसके बाद महिला वर्ग में टीम नंबर 56 की प्रतिभागी ने ‘भाती आवैंगे, मेरा ढूंगा मटकै वे दामन ल्यावैंगे’ गीत के साथ प्रतिभागी के मनमोहक हरियाणवी डांस ने तो ऐसा धमाल मचाया कि कुछ युवा तो अपनी सीटों पर ही खड़े होकर नाचने लग गए। इसके बाद टीम नंबर 52 की प्रतिभागी ने ‘छैल गाबरो गया फौज मैं, जंग जीत गै आवैगो’ पर बेहद आकर्षक डांस किया। इस टीम के बाद टीम नंबर 33 के पुरुष प्रतिभागी ने ‘आया फागन का माह, मैं देखूं बाट छोरी की’ गीत पर ऐसे ठुमके लगाए कि वहां बैठी लड़कियां भी अपनी सीटों पर बैठे-बैठे नाचने का मजा लेने लगी।
सभागार में युवाओं ने जमकर उठाया लुत्फ
शनिवार को मंच नंबर एक और दो पर हुई हरियाणवी डांस की प्रस्तुतियों के प्रति विद्यार्थियों में इतना उत्साह था कि सभागार खचाखच भर गया, जबकि मुख्य मंच के सामने भी विद्यार्थियों की काफी भीड़ जुट गई। विद्यार्थियों को बैठने तक के लिए जगह तक नहीं मिल पाई। ऐसे में विद्यार्थियों का प्रवेश ही बंद कर दिया गया। छात्र और छात्राएं स्वयं को हरियाणवी डांस करने से रोक नहीं पाए। अनुशासन समिति के पदाधिकारियों को उन्हें शांति से रहने की बार-बार अपील की गई और एक बार तो कार्यक्रम ही 15 मिनट के लिए रोक दिया।
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कक्षा छह के सचिन ने तबले पर शानदार प्रस्तुति
बारह वर्षीय दिव्यांग सचिन जिसने लाइट वोकल की ‘शबद’ श्रेणी में एक प्रतिभागी के लिए तबले पर संगत दी। जिसे देखकर दर्शक और निर्णायक तक तारीफ किए बना स्वयं को न रोक सके। इतने बड़े प्लेटफार्म पर पहली बार सचिन ने हजारों दर्शकों के सामने प्रस्तुति दी। जब उसका कार्यक्रम खत्म हुआ और वह अपनी जगह से उठा तो लोगों ने देखा कि वह दोनों पैरों से दिव्यांग है, जिस पर तालियों की गड़गड़ाहट भी उसके लिए दुगुनी हो गई। निर्णायक मंडल ने भी उक्त बच्चे को प्रशिक्षण देकर उसका हुनर निखारने का प्रस्ताव उसके पिता मुख्तयार के पास भेजा। सचिन के पिता ने बताया कि चार माह की आयु में ही सचिन के दोनों पैर खराब हो गए थे और वह पैर घिसटकर चलने लगा। मुख्तयार सिंह ने बताया कि सचिन कीर्तिनगर स्थित सरकारी स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ता है। वह स्वयं भी ढोलक मास्टर हैं, इसलिए सचिन को भी ढोल, तबला, ढोलक बजाना सिखाना शुरू किया।
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चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय युवा महोत्सव में शनिवार को अंतिम दिन सुबह से ही मुख्य मंच और द्वितीय मंच पर हरियाणवी ग्रुप और सोलो डांस की धूम रही। दर्शकों ने पूरा आनंद लिया और प्रतिभागियों का ताली बजाकर हौसला बढ़ाया। समापन समारोह में मुख्यातिथि हरियाणा पर्यटन निगम के चेयरमैन जगदीश चोपड़ा ने विजेता टीमों व प्रतिभागियों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।
हरियाणवी सोलो डांस में शनिवार को प्रथम प्रस्तुति टीम नंबर 53 के पुरुष प्रतिभागी ने दी। जैसे ही गीत के बोल ‘एक गाम की छोरी, जनूं गन्नै की पोरी’ युवा वर्ग को सुनाई दिए वैसे ही सभागार सीटियों, तालियों व हूटिंग से गूंज उठा। इसके बाद महिला वर्ग में टीम नंबर 56 की प्रतिभागी ने ‘भाती आवैंगे, मेरा ढूंगा मटकै वे दामन ल्यावैंगे’ गीत के साथ प्रतिभागी के मनमोहक हरियाणवी डांस ने तो ऐसा धमाल मचाया कि कुछ युवा तो अपनी सीटों पर ही खड़े होकर नाचने लग गए। इसके बाद टीम नंबर 52 की प्रतिभागी ने ‘छैल गाबरो गया फौज मैं, जंग जीत गै आवैगो’ पर बेहद आकर्षक डांस किया। इस टीम के बाद टीम नंबर 33 के पुरुष प्रतिभागी ने ‘आया फागन का माह, मैं देखूं बाट छोरी की’ गीत पर ऐसे ठुमके लगाए कि वहां बैठी लड़कियां भी अपनी सीटों पर बैठे-बैठे नाचने का मजा लेने लगी।
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सभागार में युवाओं ने जमकर उठाया लुत्फ
शनिवार को मंच नंबर एक और दो पर हुई हरियाणवी डांस की प्रस्तुतियों के प्रति विद्यार्थियों में इतना उत्साह था कि सभागार खचाखच भर गया, जबकि मुख्य मंच के सामने भी विद्यार्थियों की काफी भीड़ जुट गई। विद्यार्थियों को बैठने तक के लिए जगह तक नहीं मिल पाई। ऐसे में विद्यार्थियों का प्रवेश ही बंद कर दिया गया। छात्र और छात्राएं स्वयं को हरियाणवी डांस करने से रोक नहीं पाए। अनुशासन समिति के पदाधिकारियों को उन्हें शांति से रहने की बार-बार अपील की गई और एक बार तो कार्यक्रम ही 15 मिनट के लिए रोक दिया।
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कक्षा छह के सचिन ने तबले पर शानदार प्रस्तुति
बारह वर्षीय दिव्यांग सचिन जिसने लाइट वोकल की ‘शबद’ श्रेणी में एक प्रतिभागी के लिए तबले पर संगत दी। जिसे देखकर दर्शक और निर्णायक तक तारीफ किए बना स्वयं को न रोक सके। इतने बड़े प्लेटफार्म पर पहली बार सचिन ने हजारों दर्शकों के सामने प्रस्तुति दी। जब उसका कार्यक्रम खत्म हुआ और वह अपनी जगह से उठा तो लोगों ने देखा कि वह दोनों पैरों से दिव्यांग है, जिस पर तालियों की गड़गड़ाहट भी उसके लिए दुगुनी हो गई। निर्णायक मंडल ने भी उक्त बच्चे को प्रशिक्षण देकर उसका हुनर निखारने का प्रस्ताव उसके पिता मुख्तयार के पास भेजा। सचिन के पिता ने बताया कि चार माह की आयु में ही सचिन के दोनों पैर खराब हो गए थे और वह पैर घिसटकर चलने लगा। मुख्तयार सिंह ने बताया कि सचिन कीर्तिनगर स्थित सरकारी स्कूल में छठी कक्षा में पढ़ता है। वह स्वयं भी ढोलक मास्टर हैं, इसलिए सचिन को भी ढोल, तबला, ढोलक बजाना सिखाना शुरू किया।