{"_id":"628fe60f4ab1a40bfc5446a5","slug":"77-accused-were-acquitted-out-of-107-cases-of-narcotics-act-in-sirsa","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिरसा: 2019-20 में मादक पदार्थ अधिनियम के 107 केसों में से 77 में आरोपी हुए बरी, नहीं हो रही सही पैरवी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिरसा: 2019-20 में मादक पदार्थ अधिनियम के 107 केसों में से 77 में आरोपी हुए बरी, नहीं हो रही सही पैरवी
Fri, 27 May 2022 02:11 AM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Fri, 27 May 2022 02:11 AM IST
सार
पुलिस न्यायालय में पैरवी ढंग से नहीं कर रही। केवल 28 केसों में ही सजा मिली है। पुलिस कोर्ट में यह साबित ही नहीं कर सकी जो मादक पदार्थ उसने बरामद किए हैं वो गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के हैं।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मादक पदार्थों की तस्करी के मामले में सिरसा पूरे हरियाणा में नंबर एक पर है। पुलिस अभियान चलाकर लोगों को जागरूक और तस्करों को गिरफ्तार कर तो रही है, लेकिन कोई ठोस सबूत पेश नहीं करने से कोर्ट को उन्हें बरी करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2019-20 में मादक पदार्थ तस्करी के 107 केसों में से 77 केसों में आरोपी बरी हो गए और महज 28 केस में ही आरोपियों का दोष सिद्ध हो पाया। ये केस वर्ष 2015 से 2018 के बीच दर्ज हुए थे। पुलिस कोर्ट में यह साबित ही नहीं कर सकी जो मादक पदार्थ उसने बरामद किए हैं वो गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के हैं। इस दौरान यह बात भी सामने आई कि मादक पदार्थ तस्करी के मामले में उन कर्मचारियों को जांच अधिकारी बनाया गया, जिन्हें जांच करने का अधिकार ही नहीं और जिसके खिलाफ विभागीय जांच लंबित है।
विज्ञापन
ये है मुख्य केस
कुछ समय पहले अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने नशे में प्रयुक्त होने वाली डेढ़ किलोग्राम अफीम बरामदगी के मामले में आरोपियों को बरी कर दिया था। ये मामला कालांवाली व का था। उक्त दोनों ही केस वर्ष 2017 में दर्ज किए गए थे। तीन साल तक कोर्ट में सुनवाई चली। कोर्ट के फैसले में दोनों केसों से संबंधित अहम बातें सामने आई हैं।
विज्ञापन
झूठी साबित हुई पुलिस की कहानी
कालांवाली पुलिस ने आरोपी राजपाल निवासी असीर को 29 मई 2017 को कार में 14 हजार गोलियों के साथ गिरफ्तार किया था। एफआईआर और चार्जशीट में पुलिस ने बताया था कि आरोपी ने बताया कि वह ये गोलियां सुनील कुमार निवासी रामनगर अग्रवाल कॉलोनी टिला रोड माल मंडी से खरीदकर लाया था, लेकिन कोर्ट में पुलिस की ये कहानी झूठी साबित हुई। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि पुलिस के पास कोई सबूत नहीं कि ये नशे की गोलियां आरोपी राजपाल की हैं और वह ये सुनील से खरीदकर लाया था।
एचसी का वेतन लेने वाले को बना रखा था इंचार्ज
27 फरवरी 2017 को डिंग पुलिस थाने के गृह भेदन निरोधक स्टाफ ने डिंग मोड़ पर दो युवकों को एक किलो 765 ग्राम अफीम के मामले में गिरफ्तार किया था। लेकिन अदालत ने आरोपियों को सबूतों के अभाव व जांच अधिकारी के अयोग्य होने के कारण बरी कर दिया। इस मामले में जांच अधिकारी एसआई राजाराम थे। कोर्ट ने एसआई राजा राम के रिकार्ड की पड़ताल की तो पता चला कि वह एसआई नहीं बल्कि ईएसआई हैं और एचसी का वेतन ले रहा है। साथ ही इंटरमीडिएट स्कूल का कोर्स भी नहीं किया हुआ था। राजाराम जांच अधिकारी के तौर पर एएसआई रेंक का अधिकारी नहीं था। एक हेड कांस्टेबल रिकवरी कैसे कर सकता है। राजाराम जांच करने और शक्तियों का प्रयोग के लिए सक्षम नहीं पाया गया। इसके अलावा पुलिस आरोपियों से अफीम बरामदगी के ठोस सबूत भी पेश नहीं कर पाई।
10 माह में एनडीपीएस के 436 केस दर्ज
जिला पुलिस 10 माह के दौरान करोड़ों रुपये के नशीले पदार्थ बरामद कर मादक पदार्थ अधिनियम के तहत 436 अभियोग दर्ज कर 736 लोगों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा है। इस अवधि के दौरान पकड़े गए लोगों के कब्जे से 5 किलो 395 ग्राम हेरोइन, 40 किलो 566 ग्राम अफीम, 3588 किलो 413 ग्राम डोडा व चूरापोस्त, 65 किलो 899 ग्राम गांजा तथा 57 हजार 489 नशीली गोलियां व कैप्सूल बरामद किए गए हैं।
एनडीपीएस मामलों में जांच अधिकारियों को अच्छी पैरवी करने का निर्देश दे रखा है। अगर किसी केस में आरोपी बरी होते हैं तो जांच अधिकारी पर एक्शन लिया जाएगा। - अर्पित जैन, पुलिस अधीक्षक, सिरसा