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ई-ट्रेडिंग प्रणाली के विरोध में उतरे आढ़ती
Updated Sat, 05 Aug 2017 12:49 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
सरकार की ई-ट्रेडिंग प्रणाली आढ़तियों को रास नहीं आ रही है। अब आढ़तियों ने इस प्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उधर सरकार ने इस प्रणाली को शत-प्रतिशत अपनाने के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं। विरोध स्वरूप आढ़तियों ने मंडी में बोली का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। शुक्रवार को इस मामले को लेकर आढ़तियों ने बैठक भी आयोजित की।
दरअसल केंद्र और प्रदेश सरकार ने मंडी में बिकने वाली फसलों को ई-ट्रेडिंग प्रणाली के तहत खरीद और उसके बाद किसान को सीधी पेमेंट देने का प्रावधान है। इससे किसानों को तो लाभ है पर आढ़तियों को अपनी पेमेंट डूबने का भय सता रहा है जो वे किसानों को फसल मंडी तक लाने से पूर्व ब्याज पर देते हैं। हालांकि सरकार ने ई-ट्रेडिंग प्रणाली करीब एक वर्ष पूर्व शुरू कर दी थी पर अब तक शत-प्रतिशत कार्य इस प्रणाली के तहत नहीं हो पा रहे थे। अब सरकार ने ई-ट्रेडिंग प्रणाली को शत-प्रतिशत लागू करने के लिए 15 अक्तूबर की अंतिम तिथि निर्धारित की है। इसके तहत किसान जब मंडी में फसल लेकर आता है तो कंप्यूटर द्वारा उसका कूपन काटा जाता है। उसके बाद ट्रेडर इस फसल को खरीदता है। खरीदी गई फसल का रेट ऑनलाइन जारी करना होता है। उसके बाद किसान के खाते में सीधी पेमेंट डालनी होती है। इससे आढ़तियों को नुकसान का अंदेशा है क्योंकि किसान बैंक से राशि निकलवाकर आढ़ती का कर्ज चुकाएगा। इसका आढ़तियों को विश्वास नहीं है। इसी को लेकर दी एसोसिएशन आढ़तियांन के प्रधान सुरेंद्र मिचनाबाद, विजय चौधरी, डिंग के प्रधान देवीलाल बड़जाती, धर्मचंद गर्ग, नरेंद्र धिंगड़ा, देव राज कंबोज, रोबिन, साकेत, कृष्ण वधवा आदि ने शुक्रवार को डीसी को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि खरीदी गई फसल की राशि सीधी किसानों के खातों में डाले जाने का फैसला रद किया जाए। उन्होंने मांग की है कि पुरानी प्रणाली को ही लागू रखा जाए ताकि उनके व्यवसाय पर खतरे के बादल न मंडराएं। आढ़ती एसोसिएशन ने अपनी बैठक में ई-ट्रेडिंग प्रणाली के विरोध में प्रस्ताव पास किया। बता दें कि मंडियों में ई-ट्रेडिंग प्रणाली के तहत फसलों की खरीद शुरू हो गई है। लेकिन अब तक इस प्रणाली को शत-प्रतिशत लागू नहीं किया जा सका है जिसको लेकर अब सरकार काफी गंभीर है। इस प्रणाली के तहत किसानों को लाभ होना है लेकिन आढ़तियों को इस बात का भय सता रहा है कि जो कर्ज उन्होंने किसानों को दिया है उसकी रिकवरी काफी कठिन होगी।
नोटिस दिए जाने की प्रक्रिया शुरू: नांदल
इस मामले में मार्केट कमेटी के सचिव परजीत नांदल ने बताया कि सरकार की ओर से आए नोटिस की प्रतियां आज से ही आढ़तियों में वितरित करना शुरू कर दी हैं। जो सरकार का निर्णय है उसी के अनुसार प्रक्रिया चलाई जाएगी।
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नहीं हुई फसलों की आवक
ई-ट्रेडिंग के विरोध के चलते शुक्रवार को मंडी में किसी प्रकार की फसल नहीं आई। वैसे भी अब फसली सीजन नहीं है इसलिए फसलों की आवक कम ही हो पाती है। जब फसल की आवक होती है तभी बोली लगती है। आढ़तियों ने ई-ट्रेडिंग प्रणाली के तहत फसलों की खरीद का बहिष्कार करने का अल्टीमेटम दिया है। अब धान की फसल की आवक एक माह बाद शुरू हो जाएगी। ऐसे में ई-ट्रेडिंग प्रणाली आढ़तियों के लिए सिरदर्दी बन सकती है।
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फोटो:04एसआईआरपी 13:सिरसा में शुक्रवार को किसानों को उनकी फसल का सीधा भुगतान करने के फैसले को वापस लेने की मांग मनवाने को लेकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए आढ़ती एसोसिएशन के पदाधिकारी।
ई-ट्रेडिंग प्रणाली के विरोध में आढ़तियों ने खोला मोर्चा
सरकार ने प्रणाली को शत प्रतिशत अपनाने के लिए जारी किए नोटिस
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सिरसा।
सरकार की ई-ट्रेडिंग प्रणाली आढ़तियों को रास नहीं आ रही है। अब आढ़तियों ने इस प्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उधर सरकार ने इस प्रणाली को शत-प्रतिशत अपनाने के लिए नोटिस जारी कर दिए हैं। विरोध स्वरूप आढ़तियों ने मंडी में बोली का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। शुक्रवार को इस मामले को लेकर आढ़तियों ने बैठक भी आयोजित की।
दरअसल केंद्र और प्रदेश सरकार ने मंडी में बिकने वाली फसलों को ई-ट्रेडिंग प्रणाली के तहत खरीद और उसके बाद किसान को सीधी पेमेंट देने का प्रावधान है। इससे किसानों को तो लाभ है पर आढ़तियों को अपनी पेमेंट डूबने का भय सता रहा है जो वे किसानों को फसल मंडी तक लाने से पूर्व ब्याज पर देते हैं। हालांकि सरकार ने ई-ट्रेडिंग प्रणाली करीब एक वर्ष पूर्व शुरू कर दी थी पर अब तक शत-प्रतिशत कार्य इस प्रणाली के तहत नहीं हो पा रहे थे। अब सरकार ने ई-ट्रेडिंग प्रणाली को शत-प्रतिशत लागू करने के लिए 15 अक्तूबर की अंतिम तिथि निर्धारित की है। इसके तहत किसान जब मंडी में फसल लेकर आता है तो कंप्यूटर द्वारा उसका कूपन काटा जाता है। उसके बाद ट्रेडर इस फसल को खरीदता है। खरीदी गई फसल का रेट ऑनलाइन जारी करना होता है। उसके बाद किसान के खाते में सीधी पेमेंट डालनी होती है। इससे आढ़तियों को नुकसान का अंदेशा है क्योंकि किसान बैंक से राशि निकलवाकर आढ़ती का कर्ज चुकाएगा। इसका आढ़तियों को विश्वास नहीं है। इसी को लेकर दी एसोसिएशन आढ़तियांन के प्रधान सुरेंद्र मिचनाबाद, विजय चौधरी, डिंग के प्रधान देवीलाल बड़जाती, धर्मचंद गर्ग, नरेंद्र धिंगड़ा, देव राज कंबोज, रोबिन, साकेत, कृष्ण वधवा आदि ने शुक्रवार को डीसी को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि खरीदी गई फसल की राशि सीधी किसानों के खातों में डाले जाने का फैसला रद किया जाए। उन्होंने मांग की है कि पुरानी प्रणाली को ही लागू रखा जाए ताकि उनके व्यवसाय पर खतरे के बादल न मंडराएं। आढ़ती एसोसिएशन ने अपनी बैठक में ई-ट्रेडिंग प्रणाली के विरोध में प्रस्ताव पास किया। बता दें कि मंडियों में ई-ट्रेडिंग प्रणाली के तहत फसलों की खरीद शुरू हो गई है। लेकिन अब तक इस प्रणाली को शत-प्रतिशत लागू नहीं किया जा सका है जिसको लेकर अब सरकार काफी गंभीर है। इस प्रणाली के तहत किसानों को लाभ होना है लेकिन आढ़तियों को इस बात का भय सता रहा है कि जो कर्ज उन्होंने किसानों को दिया है उसकी रिकवरी काफी कठिन होगी।
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नोटिस दिए जाने की प्रक्रिया शुरू: नांदल
इस मामले में मार्केट कमेटी के सचिव परजीत नांदल ने बताया कि सरकार की ओर से आए नोटिस की प्रतियां आज से ही आढ़तियों में वितरित करना शुरू कर दी हैं। जो सरकार का निर्णय है उसी के अनुसार प्रक्रिया चलाई जाएगी।
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नहीं हुई फसलों की आवक
ई-ट्रेडिंग के विरोध के चलते शुक्रवार को मंडी में किसी प्रकार की फसल नहीं आई। वैसे भी अब फसली सीजन नहीं है इसलिए फसलों की आवक कम ही हो पाती है। जब फसल की आवक होती है तभी बोली लगती है। आढ़तियों ने ई-ट्रेडिंग प्रणाली के तहत फसलों की खरीद का बहिष्कार करने का अल्टीमेटम दिया है। अब धान की फसल की आवक एक माह बाद शुरू हो जाएगी। ऐसे में ई-ट्रेडिंग प्रणाली आढ़तियों के लिए सिरदर्दी बन सकती है।
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फोटो:04एसआईआरपी 13:सिरसा में शुक्रवार को किसानों को उनकी फसल का सीधा भुगतान करने के फैसले को वापस लेने की मांग मनवाने को लेकर उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए आढ़ती एसोसिएशन के पदाधिकारी।
ई-ट्रेडिंग प्रणाली के विरोध में आढ़तियों ने खोला मोर्चा
सरकार ने प्रणाली को शत प्रतिशत अपनाने के लिए जारी किए नोटिस