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हॉकी प्रेमियों के लिए उत्सव का दिन
Updated Thu, 03 Aug 2017 11:47 PM IST
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हॉकी प्रेमियों के लिए उत्सव का दिन, संतनगर में जशभन का माहौल
माता-पिता बोले, इससे बढ़ेगा हॉकी का मान
अमर उजाला
रानिया।
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान सरदार सिंह को खेलों के सर्वोच्च अवार्ड राजीव गांधी खेल रत्न देने की घोषणा से क्षेत्र ही नहीं देश के हॉकी प्रेमियों के लिए उत्सव का दिन है। ओलंपियन सरदार सिंह के पैतृक गांव संतनगर में जश्न का माहौल है। हालांकि सरदार सिंह इस समय बंगलुरू शिविर में हैं, मगर उनके परिवार को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
सरदार सिंह को हॉकी पकड़ना सिखाने वाले शुरूआती कोच बलदेव सिंह की आंखों में आज खुशी के आंसू छलक रहे हैं। खुशी से फूले नहीं समा रहे कोच बलदेव सिंह का कहना है कि सही मायनों में सरदार की 24 वर्षों की कठिन तपस्या का फल आज मिला है। खेलों का यह सर्वोच्च अवार्ड लाखों में किसी एक को मिलता है और एक खिलाड़ी के लिए इस अवार्ड से बढ़कर और कुछ नहीं। सरकार के इस निष्पक्ष निर्णय ने हॉकी का मान भी बढ़ा दिया है। एक हॉकी खिलाड़ी को यह सम्मान मिलने से युवाओं में हमारे पारंपरिक खेल हॉकी के प्रति रुझान बढे़गा।
सरदार सिंह के पिता गुरनाम सिंह व माता जसवीर कौर का कहना है वे भारत सरकार, हॉकी इंडिया व सतगुरु उदय सिंह के दिल से आभारी हैं। उनके लाल ने अपनी प्रतिभा से क्षेत्र व देश का मान बढ़ाया था। आज सरकार ने सर्वोच्च खेल अवार्ड देने की घोषणा कर सरदार व हॉकी का मान बढ़ा दिया है।
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गांव संतनगर में सरदार सिंह के परिवार साथ खुशियां साझां करने गए मार्केट कमेटी रानियां के वाइस चेयरमैन संजय सिंगला ने कहा कि सरदार सिंह को यह अवार्ड मिलने से ग्रामीण युवाओं में खेलों के प्रति रुझान बढे़गा।
गौरतलब है कि भारतीय टीम का नेतृत्व करने वाले सरदार सिंह को भारत सरकार पदमश्री अवार्ड व अर्जुन अवार्ड से पहले ही सम्मानित कर चुकी है। प्रदेश सरकार भी प्रदेश के सर्वोच्च खेल भीम अवार्ड से सम्मानित कर चुकी है और सरदार सिंह को डीएसपी रैंक से पुरस्कृत किया गया है।
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माता-पिता बोले, इससे बढ़ेगा हॉकी का मान
अमर उजाला
रानिया।
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान सरदार सिंह को खेलों के सर्वोच्च अवार्ड राजीव गांधी खेल रत्न देने की घोषणा से क्षेत्र ही नहीं देश के हॉकी प्रेमियों के लिए उत्सव का दिन है। ओलंपियन सरदार सिंह के पैतृक गांव संतनगर में जश्न का माहौल है। हालांकि सरदार सिंह इस समय बंगलुरू शिविर में हैं, मगर उनके परिवार को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
सरदार सिंह को हॉकी पकड़ना सिखाने वाले शुरूआती कोच बलदेव सिंह की आंखों में आज खुशी के आंसू छलक रहे हैं। खुशी से फूले नहीं समा रहे कोच बलदेव सिंह का कहना है कि सही मायनों में सरदार की 24 वर्षों की कठिन तपस्या का फल आज मिला है। खेलों का यह सर्वोच्च अवार्ड लाखों में किसी एक को मिलता है और एक खिलाड़ी के लिए इस अवार्ड से बढ़कर और कुछ नहीं। सरकार के इस निष्पक्ष निर्णय ने हॉकी का मान भी बढ़ा दिया है। एक हॉकी खिलाड़ी को यह सम्मान मिलने से युवाओं में हमारे पारंपरिक खेल हॉकी के प्रति रुझान बढे़गा।
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सरदार सिंह के पिता गुरनाम सिंह व माता जसवीर कौर का कहना है वे भारत सरकार, हॉकी इंडिया व सतगुरु उदय सिंह के दिल से आभारी हैं। उनके लाल ने अपनी प्रतिभा से क्षेत्र व देश का मान बढ़ाया था। आज सरकार ने सर्वोच्च खेल अवार्ड देने की घोषणा कर सरदार व हॉकी का मान बढ़ा दिया है।
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गांव संतनगर में सरदार सिंह के परिवार साथ खुशियां साझां करने गए मार्केट कमेटी रानियां के वाइस चेयरमैन संजय सिंगला ने कहा कि सरदार सिंह को यह अवार्ड मिलने से ग्रामीण युवाओं में खेलों के प्रति रुझान बढे़गा।
गौरतलब है कि भारतीय टीम का नेतृत्व करने वाले सरदार सिंह को भारत सरकार पदमश्री अवार्ड व अर्जुन अवार्ड से पहले ही सम्मानित कर चुकी है। प्रदेश सरकार भी प्रदेश के सर्वोच्च खेल भीम अवार्ड से सम्मानित कर चुकी है और सरदार सिंह को डीएसपी रैंक से पुरस्कृत किया गया है।