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गांव बरूवाली के किसानों ने अंतिम छोर तक घग्गर का पानी न आने पर किया प्रदर्शन
Updated Mon, 01 Oct 2018 12:30 AM IST
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घग्गर का जलस्तर ओटू डैम पर 18 हजार क्यूसिक रहा। रविवार को जलस्तर न बढ़ना क्षेत्र के लोगों के लिए राहत है। क्योंकि पिछले एक सप्ताह से घग्गर के जलस्तर में दिन प्रतिदिन वृद्धि हो रही थी। हालांकि सिंचाई विभाग के कर्मचारी घगगर में आने वाली जलकुंभी को निकालने में दिन भर जुटे रहे। वहीं किसान भी तटबंधों की निगरानी में दिन रात जुटे हुए हैं। सिंचाई विभाग के घग्गर डिवीजन के कार्यकारी अभियंता एनके भोला ने बताया कि रविवार को जलस्तर में वृद्धि नहीं हुई। इसका कारण गुहला चीका में पानी कम होना रहा है। ऐसे में यह राहत वाली बात है। बता दें कि पिछले एक सप्ताह से घग्गर में जलस्तर बढ़ता जा रहा था। पहले दिन ढाई हजार क्यूसिक पानी था। जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बन गया था।
बरूवाली के किसानों ने किया प्रदर्शन
वहीं गांव बरूवाली के किसानों ने माइनर के अंतिम छोर तक घग्गर का पानी न पहुंचने पर सिंचाई विभाग के खिलाफ रोष जताते हुए प्रदर्शन किया। किसान रणजीत सिंह, सतबीर सिंह, डॉ. गिद्र सिंह, डॉ. कुलविंद्र सिंह , कश्मीर सिंह, बलबीर सिंह, बूटा सिंह, राम, छिंद्रपाल, विनोद कुमार, शोभाराम, सतनामचंद, भगवानदास, रामचंद, जट्टाराम ने घग्गर का पानी न आना सिंचाई विभाग की लापरवाही बताया। उन्होंने बताया कि घग्गर में फ्लडी पानी लगभग दस वर्ष बाद आया है और यह पानी माइनर के अंतिम छोर तक नहीं पहुंच रहा है। इसमें सबसे बड़ी लापरवाही सिंचाई विभाग की है, क्योंकि विभाग के अधिकारियों ने घग्गर बरूवाली लिंक चैनल की सफाई नहीं करवाई थी, जिसके चलते अनेक खेत सिंचित होने से वंचित रह गए हैं। किसानों ने कहा कि चैनल का निर्माण वर्ष 2009 में लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से करवाया गया था, जिसका उद्देश्य गांव बरूवाली व पास लगते गांव भावदीन, रसूलपुर, दड़बी व भरोखां में खेतों में घग्गर में आने वाली फ्लडी पानी मुहैया करवाना था। सिंचाई विभाग के अधिकारियों व ठेकेदारों की मिलीभगत से चैनल के निर्माण में कई खामियां रही हैं, जिसके चलते यह पानी नहीं मिल पा रहा है। अगर सही ढंग से चैनल की खामियां दूर कर दी जाए और सफाई व खुदाई करवा दी जाए, तो सैकड़ों किसानों की हजारों एकड़ भूमि पर सिंचाई हो पाएगी। वहीं इस मामले में नहरी विभाग के कार्यकारी अभियंता एनके भोला ने कहा कि उनका पूरा प्रयास है कि घग्गर का पानी माइनर के अंतिम छोर तक पहुंचे। इसके लिए कर्मचारी कर्मचंद की ड्यूटी भी लगाई हुई है और वह पानी पहुंचाने में जुटे हुए हैं।
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घग्गर का जलस्तर ओटू डैम पर 18 हजार क्यूसिक रहा। रविवार को जलस्तर न बढ़ना क्षेत्र के लोगों के लिए राहत है। क्योंकि पिछले एक सप्ताह से घग्गर के जलस्तर में दिन प्रतिदिन वृद्धि हो रही थी। हालांकि सिंचाई विभाग के कर्मचारी घगगर में आने वाली जलकुंभी को निकालने में दिन भर जुटे रहे। वहीं किसान भी तटबंधों की निगरानी में दिन रात जुटे हुए हैं। सिंचाई विभाग के घग्गर डिवीजन के कार्यकारी अभियंता एनके भोला ने बताया कि रविवार को जलस्तर में वृद्धि नहीं हुई। इसका कारण गुहला चीका में पानी कम होना रहा है। ऐसे में यह राहत वाली बात है। बता दें कि पिछले एक सप्ताह से घग्गर में जलस्तर बढ़ता जा रहा था। पहले दिन ढाई हजार क्यूसिक पानी था। जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बन गया था।
बरूवाली के किसानों ने किया प्रदर्शन
वहीं गांव बरूवाली के किसानों ने माइनर के अंतिम छोर तक घग्गर का पानी न पहुंचने पर सिंचाई विभाग के खिलाफ रोष जताते हुए प्रदर्शन किया। किसान रणजीत सिंह, सतबीर सिंह, डॉ. गिद्र सिंह, डॉ. कुलविंद्र सिंह , कश्मीर सिंह, बलबीर सिंह, बूटा सिंह, राम, छिंद्रपाल, विनोद कुमार, शोभाराम, सतनामचंद, भगवानदास, रामचंद, जट्टाराम ने घग्गर का पानी न आना सिंचाई विभाग की लापरवाही बताया। उन्होंने बताया कि घग्गर में फ्लडी पानी लगभग दस वर्ष बाद आया है और यह पानी माइनर के अंतिम छोर तक नहीं पहुंच रहा है। इसमें सबसे बड़ी लापरवाही सिंचाई विभाग की है, क्योंकि विभाग के अधिकारियों ने घग्गर बरूवाली लिंक चैनल की सफाई नहीं करवाई थी, जिसके चलते अनेक खेत सिंचित होने से वंचित रह गए हैं। किसानों ने कहा कि चैनल का निर्माण वर्ष 2009 में लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से करवाया गया था, जिसका उद्देश्य गांव बरूवाली व पास लगते गांव भावदीन, रसूलपुर, दड़बी व भरोखां में खेतों में घग्गर में आने वाली फ्लडी पानी मुहैया करवाना था। सिंचाई विभाग के अधिकारियों व ठेकेदारों की मिलीभगत से चैनल के निर्माण में कई खामियां रही हैं, जिसके चलते यह पानी नहीं मिल पा रहा है। अगर सही ढंग से चैनल की खामियां दूर कर दी जाए और सफाई व खुदाई करवा दी जाए, तो सैकड़ों किसानों की हजारों एकड़ भूमि पर सिंचाई हो पाएगी। वहीं इस मामले में नहरी विभाग के कार्यकारी अभियंता एनके भोला ने कहा कि उनका पूरा प्रयास है कि घग्गर का पानी माइनर के अंतिम छोर तक पहुंचे। इसके लिए कर्मचारी कर्मचंद की ड्यूटी भी लगाई हुई है और वह पानी पहुंचाने में जुटे हुए हैं।
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