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चलती एंबुलेंस में महिला ने दिया बच्चे को जन्म
Updated Wed, 13 Dec 2017 01:22 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
एनएचएम कर्मियों की हड़ताल का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा रहा है। मंगलवार को गांव भंभूर निवासी एक गर्भवती महिला की चलती एंबुलेंस में डिलीवरी हुई। खास बात यह है कि एंबुलेंस में बिना ईएमटी के गर्भवती के साथ आई महिलाओं ने डिलीवरी करवाई। एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के कारण एंबुलेंस में ईएमटी नहीं था। चलती एंबुलेंस में हुई डिलीवरी में महिला ने पुत्र को जन्म दिया। सिविल अस्पताल में जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
भंभूर निवासी सोमा देवी को सुबह करीब 11 बजे प्रसव पीड़ा होने लगी। जब पीड़ा असहनीय होने लगी तो परिवार वालों ने एंबुलेंस के लिए सिविल अस्पताल में फोन किया। एंबुलेंस बिना ईएमटी के मौके पर पहुंची, क्योंकि एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कोई ईएमटी ड्यूटी पर मौजूद नहीं था। एंबुलेंस प्रसूता को लेकर सिविल अस्पताल के लिए रवाना हुई तो रामनगरिया के पास सोमा देवी को प्रसव पीड़ा तेज होने लगी। इससे एंबुलेंस में मौजूद परिजनों की सांसें अटक गईं। ईएमटी नहीं होने के कारण एंबुलेंस में मौजूद बुजुर्ग महिलाओं ने चलती एंबुलेंस में ही सोमा की डिलीवरी करवाई। महिला ने पुत्र को जन्म दिया। अस्पताल पहुंचने पर स्टाफ नर्सों ने नवजात बच्चे और जच्चा को संभाला और प्रसूति वार्ड में दाखिल करवाया। इसके बाद जच्चा-बच्चा दोनों की जांच की गई। जच्चा-बच्चा दोनों ही स्वस्थ हैं।
बिना ईएमटी के बड़ा जोखिम था
एंबुलेंस में ईएमटी का होना बेहद जरूरी होता है। गांव भंभूर सिरसा से केवल 12 किलोमीटर दूरी पर है। इसलिए जल्दी से प्रसूता और नवजात बच्चा जल्द से सिविल अस्पताल पहुंच गए और स्टाफ नर्सों ने दोनों को संभाल लिया। प्रसूता दूर गांव की रहने वाली होती तो काफी जोखिम भरा हो सकता था। एंबुलेंस में मौजूद परिवार की बुजुर्ग महिलाओं ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए प्रसूता की सामान्य डिलीवरी चलती एंबुलेंस में करवा दी।
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शुक्र है हमारा गांव नजदीक है
शुक्र है कि हमारा गांव सिरसा के ज्यादा दूर नहीं था। अगर गांव 40 से 50 किलोमीटर दूर होता तो प्रसूता और बच्चे की जान को खतरा हो सकता था। एंबुलेंस में ईएमटी न होने से हम सभी परेशान थे, लेकिन बुजुर्ग महिलाओं ने अपने अनुभव से स्थिति को संभाला और एंबुलेंस में ही सोमा की डिलीवरी करवाई। अस्पताल पहुंचकर पता चला कि हड़ताल के कारण ईएमटी एंबुलेंस में नहीं था। एंबुलेंस चालक विक्रम जल्द ही सोमा व नवजात बच्चे को अस्पताल पहुंचा दिया।
-प्रदीप कुमार, पिता।
हड़ताल के कारण नहीं था ईएमटी
महिला सुबह सिविल अस्पताल में दाखिल हो गई थी, उसे अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा गया था। एंबुलेंस उसे लेकर अल्ट्रासाउंड केंद्र में लेकर गई। अल्ट्रासाउंड करवाने के बाद परिजन वापस अस्पताल में आने की बजाए, प्रसूता को वापस अपने घर ले गए। इसके बाद प्रसूता को प्रसव पीड़ा होने लगी तो परिजनाें ने अस्पताल में फोन करके एंबुलेंस मंगवाई। एनएचएम कर्मियों की हड़ताल के कारण एंबुलेंस में ईएमटी नहीं था। एंबुलेंस प्रसूता को लेकर अस्पताल आ रही थी तो रास्ते में ही उसकी डिलीवरी हो गई। जच्चा और बच्चा दोनों अस्पताल में दाखिल हैं और पूरी तरह से स्वस्थ हैं। ईएमटी का एंबुलेंस में होना जरूरी होता है, लेकिन हड़ताल के कारण ईएमटी उपलब्ध नहीं था। हड़ताल के संबंध में सरकार को ही कोई फैसला लेना है।
-गोबिंद गुप्ता, सिविल सर्जन, सिरसा।
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सिरसा।
एनएचएम कर्मियों की हड़ताल का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा रहा है। मंगलवार को गांव भंभूर निवासी एक गर्भवती महिला की चलती एंबुलेंस में डिलीवरी हुई। खास बात यह है कि एंबुलेंस में बिना ईएमटी के गर्भवती के साथ आई महिलाओं ने डिलीवरी करवाई। एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के कारण एंबुलेंस में ईएमटी नहीं था। चलती एंबुलेंस में हुई डिलीवरी में महिला ने पुत्र को जन्म दिया। सिविल अस्पताल में जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं।
भंभूर निवासी सोमा देवी को सुबह करीब 11 बजे प्रसव पीड़ा होने लगी। जब पीड़ा असहनीय होने लगी तो परिवार वालों ने एंबुलेंस के लिए सिविल अस्पताल में फोन किया। एंबुलेंस बिना ईएमटी के मौके पर पहुंची, क्योंकि एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कोई ईएमटी ड्यूटी पर मौजूद नहीं था। एंबुलेंस प्रसूता को लेकर सिविल अस्पताल के लिए रवाना हुई तो रामनगरिया के पास सोमा देवी को प्रसव पीड़ा तेज होने लगी। इससे एंबुलेंस में मौजूद परिजनों की सांसें अटक गईं। ईएमटी नहीं होने के कारण एंबुलेंस में मौजूद बुजुर्ग महिलाओं ने चलती एंबुलेंस में ही सोमा की डिलीवरी करवाई। महिला ने पुत्र को जन्म दिया। अस्पताल पहुंचने पर स्टाफ नर्सों ने नवजात बच्चे और जच्चा को संभाला और प्रसूति वार्ड में दाखिल करवाया। इसके बाद जच्चा-बच्चा दोनों की जांच की गई। जच्चा-बच्चा दोनों ही स्वस्थ हैं।
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बिना ईएमटी के बड़ा जोखिम था
एंबुलेंस में ईएमटी का होना बेहद जरूरी होता है। गांव भंभूर सिरसा से केवल 12 किलोमीटर दूरी पर है। इसलिए जल्दी से प्रसूता और नवजात बच्चा जल्द से सिविल अस्पताल पहुंच गए और स्टाफ नर्सों ने दोनों को संभाल लिया। प्रसूता दूर गांव की रहने वाली होती तो काफी जोखिम भरा हो सकता था। एंबुलेंस में मौजूद परिवार की बुजुर्ग महिलाओं ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए प्रसूता की सामान्य डिलीवरी चलती एंबुलेंस में करवा दी।
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शुक्र है हमारा गांव नजदीक है
शुक्र है कि हमारा गांव सिरसा के ज्यादा दूर नहीं था। अगर गांव 40 से 50 किलोमीटर दूर होता तो प्रसूता और बच्चे की जान को खतरा हो सकता था। एंबुलेंस में ईएमटी न होने से हम सभी परेशान थे, लेकिन बुजुर्ग महिलाओं ने अपने अनुभव से स्थिति को संभाला और एंबुलेंस में ही सोमा की डिलीवरी करवाई। अस्पताल पहुंचकर पता चला कि हड़ताल के कारण ईएमटी एंबुलेंस में नहीं था। एंबुलेंस चालक विक्रम जल्द ही सोमा व नवजात बच्चे को अस्पताल पहुंचा दिया।
-प्रदीप कुमार, पिता।
हड़ताल के कारण नहीं था ईएमटी
महिला सुबह सिविल अस्पताल में दाखिल हो गई थी, उसे अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए कहा गया था। एंबुलेंस उसे लेकर अल्ट्रासाउंड केंद्र में लेकर गई। अल्ट्रासाउंड करवाने के बाद परिजन वापस अस्पताल में आने की बजाए, प्रसूता को वापस अपने घर ले गए। इसके बाद प्रसूता को प्रसव पीड़ा होने लगी तो परिजनाें ने अस्पताल में फोन करके एंबुलेंस मंगवाई। एनएचएम कर्मियों की हड़ताल के कारण एंबुलेंस में ईएमटी नहीं था। एंबुलेंस प्रसूता को लेकर अस्पताल आ रही थी तो रास्ते में ही उसकी डिलीवरी हो गई। जच्चा और बच्चा दोनों अस्पताल में दाखिल हैं और पूरी तरह से स्वस्थ हैं। ईएमटी का एंबुलेंस में होना जरूरी होता है, लेकिन हड़ताल के कारण ईएमटी उपलब्ध नहीं था। हड़ताल के संबंध में सरकार को ही कोई फैसला लेना है।
-गोबिंद गुप्ता, सिविल सर्जन, सिरसा।