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कंकालों को अस्थियों का नाम देकर गुमराह कर रहा है डेरा प्रबंधन: गुरदास तूर
Updated Thu, 21 Sep 2017 12:49 AM IST
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कंकालों को अस्थियों का नाम देकर गुमराह कर रहा है डेरा प्रबंधन : गुरदास तूर
पूर्व प्रबंधक फकीर चंद की जांच में आ चुकी है उसकी हत्या कर डेरा में दफनाए जाने की बात
पूर्व सेवादार गुरदास तूर ने की सरकार से सीबीआई जांच की मांग, बिना जांच के कैसे पता चलेगा कंकाल दफन हैं या अस्थियां
सिरसा।
डेरा सच्चा सौदा के पूर्व सेवादार गुरदास तूर ने डेरा सच्चा सौदा प्रबंधक कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. पीआर नैन पर एसआईटी को गुमराह करने का आरोप लगाया है। गुरदास तूर का कहना है कि पीआर नैन एक एमबीबीएस डॉक्टर हैं कोई अनपढ़ शख्स नहीं जो मोक्ष के नाम पर अनुयायियों की अस्थियों को डेरा की जमीन में दफन की बात करें।
तूर का कहना है कि डेरा की ओर से पिछले दो-तीन सालों में अस्थियां जमीन में दफनाने का काम शुरू किया गया, क्योंकि जिन लोगों की हत्या करके शव जमीन में दफनाए गए हैं उनके राज से कभी पर्दा न उठा सके। तूर का कहना है वर्ष 2010 में सीबीआई ने डेरा के पूर्व प्रबंधक फकीर चंद मामले में एफआईआर दर्ज की थी। सीबीआई की जांच में ये बात साफ तौर पर सामने आई कि फकीर चंद को किसी ने डेरा से बाहर निकलते हुए नहीं देखा। ऐसे में डेरा के अंदर ही उसकी हत्या करके उसकी लाश डेरे में ही दफन कर दी गई। पूर्व सेवादार गुरदास तूर का कहना है कि डेरा प्रबंधन जमीन में आस्था की अस्थियां दफन की बात करके असली राज को दबाना चाहता है। इसलिए सरकार इस मामले की सीबीआई से जांच करवाए, ताकि असल सच्चाई सामने आ सके। सरकार गंभीरता से इस मामले की जांच करवाएगी तभी पता चलेगा कि डेरा की जमीनों में अस्थियां निकलती हैं या नर कंकाल। अगर सरकार ने डेरा प्रबंधन की बातों पर भरोसा करके जांच नहीं करवाई तो डेरा की जमीनों में दफन राज कभी बाहर नहीं आ सकेगा।
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पूर्व प्रबंधक फकीर चंद की जांच में आ चुकी है उसकी हत्या कर डेरा में दफनाए जाने की बात
पूर्व सेवादार गुरदास तूर ने की सरकार से सीबीआई जांच की मांग, बिना जांच के कैसे पता चलेगा कंकाल दफन हैं या अस्थियां
सिरसा।
डेरा सच्चा सौदा के पूर्व सेवादार गुरदास तूर ने डेरा सच्चा सौदा प्रबंधक कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. पीआर नैन पर एसआईटी को गुमराह करने का आरोप लगाया है। गुरदास तूर का कहना है कि पीआर नैन एक एमबीबीएस डॉक्टर हैं कोई अनपढ़ शख्स नहीं जो मोक्ष के नाम पर अनुयायियों की अस्थियों को डेरा की जमीन में दफन की बात करें।
तूर का कहना है कि डेरा की ओर से पिछले दो-तीन सालों में अस्थियां जमीन में दफनाने का काम शुरू किया गया, क्योंकि जिन लोगों की हत्या करके शव जमीन में दफनाए गए हैं उनके राज से कभी पर्दा न उठा सके। तूर का कहना है वर्ष 2010 में सीबीआई ने डेरा के पूर्व प्रबंधक फकीर चंद मामले में एफआईआर दर्ज की थी। सीबीआई की जांच में ये बात साफ तौर पर सामने आई कि फकीर चंद को किसी ने डेरा से बाहर निकलते हुए नहीं देखा। ऐसे में डेरा के अंदर ही उसकी हत्या करके उसकी लाश डेरे में ही दफन कर दी गई। पूर्व सेवादार गुरदास तूर का कहना है कि डेरा प्रबंधन जमीन में आस्था की अस्थियां दफन की बात करके असली राज को दबाना चाहता है। इसलिए सरकार इस मामले की सीबीआई से जांच करवाए, ताकि असल सच्चाई सामने आ सके। सरकार गंभीरता से इस मामले की जांच करवाएगी तभी पता चलेगा कि डेरा की जमीनों में अस्थियां निकलती हैं या नर कंकाल। अगर सरकार ने डेरा प्रबंधन की बातों पर भरोसा करके जांच नहीं करवाई तो डेरा की जमीनों में दफन राज कभी बाहर नहीं आ सकेगा।
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